
Ranchi: राज्य में लकड़ी आधारित उद्योगों के सामने विकट स्थिति आ गयी है. काष्ठ व्यापारियों की मानें तो काष्ठ आधारित उद्योगों की स्थापना और विनियमन के लिये सरकार द्वारा गठित राज्यस्तरीय समिति की प्रधान मुख्य वन सरंक्षक और एचओएफएफ की अध्यक्षता में 25 नवंबर 2021 को बैठक संपन्न हुई. बैठक में लिये गये निर्णयों का पालन अभी तक नहीं किया गया है. जबकि बैठक को एक साल बीत गया है. व्यापारियों ने बताया कि राज्य में दिनांक 1996 के पहले से स्थापित वैध आरा मिलों, काष्ठ आधारित उद्योगों को अधिसूचित वन सीमा से 5 किलो मीटर की न्यूनतम दूरी के बंधेज से छूट दिये जाने का निर्णय उक्त बैठक में लिया गया. यह भी कहा गया था कि इसकी स्वीकृति और इस संदर्भ में आदेश, अधिसूचना राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार को भेजे अनुशंसा के आधार पर लिया जायेगा. व्यापारियों ने चिंता जताते हुए कहा कि अब तक राज्य सरकार द्वारा इसकी अनुशंसा नहीं भेंजी गई है. जिस कारण प्रदेश में आरा मिलों का व्यापार बंद पडा है.
जनहित में लेना है निर्णय
चैंबर ऑफ कॉर्मस के काष्ठ उद्योग उप समिति से जानकारी मिली है कि इस संबध में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गयी थी. जिसके बाद 2017 में झारखण्ड सरकार की ओर से राज्यस्तरीय समिति का गठन किया गया है. समिति का कार्य झारखण्ड में अवस्थित आरा मिल और काष्ठ आधारित उद्योगों की समस्याओं एवं जनहित को देखते हुए निर्णय लेना है. इस संबध में सर्वाेच्च न्यायालय के 2018 में दायर याचिका में झारखण्ड सरकार को आदेश दिया गया है कि झारखण्ड में पूर्व से स्थापित आरा मिल जो वन सीमा से 5 कि.मी. की दूरी के अंदर हैं. उससे बंधेज कर कम सकते हैं. इस निर्णय की अनुशंसा राज्य सरकार को भारत सरकार को भेजा जाना है. अगर राज्य सरकार अब भी इस संबध में निर्णय नहीं लेती है तो काष्ठ उद्योगों के सामने विकट स्थिति उत्पन्न हो जायेगी.
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