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दो साल की सजा के खिलाफ सूरत कोर्ट ने राहुल गांधी को दी फौरी राहत, अब आगे क्या होगा?

Surat: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ‘मोदी सरनेम’ टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में दोषी ठहराए जाने के खिलाफ अदालत में अपील करने के लिए सोमवार को सूरत पहुंचे. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी भाई राहुल के साथ सूरत आईं. सूरत कोर्ट ने राहुल को 13 अप्रैल तक जमानत दे दी. वहीं, उनकी सजा के  खिलाफ सुनवाई के लिए तीन मई की तारीख दे दी है. इस बीच राहुल के सूरत जाने पर राजनीति भी शुरू हो गई है. भाजपा ने आरोप लगाया है कि ये लोग अपील के नाम पर हुड़दंग करने जा रहे हैं तो वहीं कांग्रेस का कहना है कि यह राहुल गांधी के साथ उनकी एकजुटता है. बता दें कि बीते महीने सूरत के सीजेएम कोर्ट ने मोदी सरनेम मानहानि केस में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी.  कोर्ट ने इस सजा को चुनौती देने के लिए राहुल को एक महीने का समय दिया था. कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए याचिका तैयार की गई है. इसी कड़ी में राहुल गांधी ने आज सूरत कोर्ट में याचिका दाखिल की.

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मामला क्या है?

2019 में मोदी उपनाम को लेकर की गई टिप्पणी के मामले में 23 मार्च को सूरत की सीजेएम कोर्ट ने धारा 504 के तहत राहुल को दो साल की सजा सुनाई थी. हालांकि, कोर्ट ने फैसले पर अमल के लिए 30 दिन की मोहलत दी थी.  इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें तुरंत जमानत भी दे दी थी. सूरत कोर्ट में सुनवाई के बाद राहुल की सजा बरकरार रह सकती है या कम भी हो सकती है, या फिर उन्हें बरी भी किया जा सकता है. अगर सूरत कोर्ट से राहत नहीं मिलती तो राहुल के पास हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प भी होगा. सूरत कोर्ट अगर राहुल की सजा पर रोक नहीं लगाता तो भी राहुल ऊंची अदालतों में जा सकते हैं.

सांसदी बहाल कराने के लिए राहुल के पास क्या विकल्प?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता भी बहाल हो सकती है और वो बरी भी हो सकते हैं लेकिन ये सब कुछ ऊपरी अदालत में तय होगा। राहुल के पास अभी कुछ विकल्प बचे हैं, जैसे:

  • सबसे पहले, राहुल गांधी को सजा के खिलाफ स्टे ऑर्डर लेने के लिए सूरत कोर्ट गए हैं। यदि वह अपनी संसद की सदस्यता बरकरार रखना चाहते हैं, तो वायनाड लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव होने से पहले राहुल गांधी को बरी होना होगा है; केवल उनकी सजा के खिलाफ रोक पर्याप्त नहीं होगी।
  • वह 2024 का चुनाव तभी लड़ सकते हैं जब कोई ऊपरी अदालत उनकी सजा को रद्द कर दे, या यदि सूरत की निचली अदालत का फैसला पलट दिया जाए। अगर ऊपरी अदालत निचली अदालत से राहुल गांधी की दोषसिद्धि को रद्द नहीं करती है तो वह 2031 तक चुनाव नहीं लड़ सकते।
  • यदि उन्हें सजा से स्थगन आदेश मिलता है, तो उन्हें लोकसभा सचिव को सूचित करना होगा और अनुरोध करना होगा कि वह संसद से अपनी अयोग्यता के नोटिस को रद्द कर दें। यदि लोकसभा राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता अयोग्यता की अधिसूचना को रद्द नहीं करती है, तो कांग्रेस नेता लोकसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ अदालत जा सकते हैं।

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