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हाईकोर्ट ने 25 साल पुराने हत्या मामले में 4 सजायाफ्ता को किया बरी

रांची के निचली अदालत से चारों को मिली थी आजीवन कारावास की सजा

Rana Pratap Singh

Ranchi : झारखंड हाई कोर्ट ने वर्ष 1998 के एक हत्या मामले में रांची की निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को रद्द करते हुए सभी 4 आरोपियों को बरी कर दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने सुनाया है। मामला थाना बेड़ो , जिला रांची के कर्गे गांव से जुड़ा है।

इस संबंध में रांची की निचली अदालत ने आरोपियों राजेंद्र उरांव, बरिया उरांव, रामधन उरांव और भनुआ उरांव को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। निचली अदालत का यह फैसला 18 अप्रैल 2000 को दिया गया था।

आरोप था कि 21 अप्रैल 1998 की शाम मृतक केशवर साहू पर आरोपियों ने धारदार हथियारों से हमला कर उसकी हत्या कर दी। इस मामले में मृतक के पुत्र राजेंद्र साहू ने स्वयं को प्रत्यक्षदर्शी बताते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हत्या का कारण भूमि विवाद बताया गया था।

हालांकि, हाईकोर्ट ने सजायाफ्ता राजेंद्र उरांव एवं भनुआ उरांव की सजा के खिलाफ क्रिमिनल अपील सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित प्रत्यक्षदर्शी की गवाही विश्वसनीय नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि घटना के समय शोर-शराबा न होना, ग्रामीणों का घटनास्थल पर न पहुंचना और चौकीदार को आरोपियों के नाम न बताए जाना, अभियोजन कहानी पर गंभीर संदेह पैदा करता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपियों के खिलाफ साझा इरादा (common intention) साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए। केवल पारिवारिक दुश्मनी के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को रद्द कर दिया और सभी आरोपियों को आपराधिक दायित्व से मुक्त कर दिया। चूंकि आरोपी पहले से जमानत पर थे, इसलिए उनकी जमानत बांड भी समाप्त कर दी गई।

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