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भाजपा ने राष्ट्र निर्माण और जनसेवा के प्रति समर्पित भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का किया स्मरण

झारखंड विधानसभा परिसर में भी मनायी गयी वाजपेयी की जयंती

Ranchi : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती पर प्रदेश भाजपा ने उनका स्मरण किया. राष्ट्र निर्माण और जनसेवा के लिए उनके समर्पण को याद करते आगे बढ़ने की बात कही. झारखंड विधानसभा परिसर, प्रदेश कार्यालय के अलावा जिलों में भी उनकी जयंती धूमधाम से मनायी गयी.

विधानसभा परिसर स्थित अटलजी की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. इस मौके पर पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी,

क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र नाथ त्रिपाठी, प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह एवं पार्टी के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे. वाजपेयीजी की 100वीं जन्म जयंती पर बुधवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रदर्शनी का शुभारंभ भी बाबूलाल और अन्य ने किया. मौके पर बाबूलाल ने कहा कि भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष और ‘भारत रत्न’ से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती पर उन्हें सादर नमन है. राष्ट्र निर्माण और जनसेवा के प्रति समर्पित उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उन्होंने इस दौरान सबों को ‘सुशासन दिवस’ की शुभकामनाएं भी दीं.

चंपाई सोरेन ने भी वाजपेयी को बताया खास

पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने भी अटल बिहारी को स्मरण करते खास व्यक्तित्व का बताया. अपने विधानसभा क्षेत्र में समर्थकों के बीच कहा कि 25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयीजी की 100वीं जयंती को सुशासन दिवस के रुप में मनाया जा रहा है. इस दिन हम सभी एक ऐसे व्यक्ति को याद कर रहे हैं, जिनके वजह से झारखंड राज्य का अस्तित्व है. सन 1999 में अटलजी चुनावी सभा को संबोधित करने दुमका आए थे. इसमें अटलजी ने कहा था आप मेरी सरकार बनवाएं, मैं आपको अलग राज्य का तोहफा दूंगा. भाजपा की सरकार बनने के बाद अटल बिहारी वाजपेयीजी ने झारखंड की जनता के कई दशक पुराने आंदोलन को सम्मान दिया. बिहार की तत्कालीन राष्ट्रीय जनता दल सरकार के विरोध के बावजूद 15 नवंबर 2000 को अटल बिहारी वाजपेयीजी ने झारखंड को अलग राज्य बना दिया. उनसे पहले की कांग्रेस की सरकारों के रवैये को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अगर अटलजी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार नहीं होती तो शायद हमें इस राज्य के लिए कई वर्षों या फिर दशकों का इंतजार तथा संघर्ष करना पड़ता. शायद उस बीच कितने लोगों को बलिदान भी देना पड़ता.

कई दशकों तक संथाल आदिवासी समाज के लोग संथाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने के लिए प्रयास कर रहे थे. हमने भी इसके लिए आंदोलन किया था. उस दौर की कांग्रेस की सरकारें हमारी मांगों को नकारती रही. फिर अटलजी की सरकार ने 2003 में संथाली भाषा (ओल चिकी लिपि) को संविधान में स्थान दिलाया.

सन 1999 में जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी थी, तब भारत में पहली बार जनजातीय मंत्रालय का गठन किया गया था. इससे देश में आदिवासियों का विकास तीव्र गति से होने लगा.

झारखंड और विशेषकर जमशेदपुर से अटलजी का गहरा नाता था. प्रधानमंत्री रहते और उसके बाद भी वे कई बार झारखंड आए. हर बार उनकी सभाओं में बहुत भीड़ उमड़ती थी. उन्होंने इस राज्य में कई योजनाएं शुरू कीं.

झारखंड के विकास के लिए उनका अपना विजन था. उन्होंने यहाँ के लिए और विशेष कर आदिवासियों के लिए कई योजनाएं शुरू की थी. लेकिन आज यहाँ भ्रष्टाचार का बोलबाला है. नोटों के पहाड़ मिल रहे हैं. आदिवासियों की संख्या घट रही है. घुसपैठिये हमारी भूमि पर कब्जा कर रहे हैं. अटलजी जहाँ भी होंगे, यह देख कर दुखी होंगे. केंद्र में नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार अटलजी के सपनों को पूरा कर रही है. पिछले वर्ष आदिवासियों के कल्याण के लिए शुरू हुई पीएम जनमन योजना तथा झारखंड के हर कोने में बन रहे 88 एकलव्य मॉडल विद्यालय आदिवासियों को शिक्षित एवं सशक्त बनाने के उनके सपने को पूरा करेंगे. पोखरण परमाणु परीक्षण द्वारा देश को महाशक्ति बनाने तथा कारगिल के युद्ध में पाकिस्तान को पराजित करने वाले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयीजी बेहद खास राजनेता थे.

विधानसभा परिसर में मनाई गई जयंती

झारखण्ड विधानसभा परिसर में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न, स्व० अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मनायी गई. इस अवसर पर विधानसभा परिसर में स्थित उनकी मूर्ति पर एंव अटलजी की तस्वीर पर विधानसभा के पदाधिकारियों, कर्मियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया.

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