JharkhandLead NewsRanchi

तकनीकी स्वीकृति के बिना करा लिया गया बिरसा स्मृति संग्रहालय का काम, नगर विकास ने अब पकड़ी गलती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को करने वाले हैं इसका उद्घाटन

Nikhil Kumar

Ranchi : रांची की पुरानी जेल को संरक्षित करने और बिरसा मुंडा स्मृति संग्रहालय को विकसित करने का काम बिना तकनीकी स्वीकृति के कर दिया गया. नगर विकास विभाग ने अब जाकर इस गलती को पकड़ा है. विभाग ने इसे पीडब्ल्यूडी कोड का उल्लंघन बताया है. एक तो जुडको (झारखंड अरबन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलमेंट कंपनी) ने तकनीकी स्वीकृति के बजाय महज तकनीकी अनुमोदन के आधार पर इस योजना का काम करा लिया और अब जब इसका प्राक्कलन बढ़ रहा है तो सरकार से 4 करोड़ 65 लाख 87 हजार 368 रुपये की राशि की मांग की जा रही है.

इसे भी पढ़ें : T20 World Cup में पाकिस्तान की हार पर दामाद शाहीन शाह पर बरसे शाहिद अफरीदी, कहा- इतना तो दिमाग लगाते !

नगर विकास सचिव ने किया निरीक्षण

इधर नगर विकास सचिव विनय कुमार चौबे और आदिवासी कल्याण सचिव केके सोन ने उद्घाटन से पहले शनिवार को बिरसा मुंडा संग्रहालय सह स्मृति पार्क का निरीक्षण किया और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए.

बिरसा स्मृति संग्रहालय का काम पूरा

बता दें कि सौंदर्यीकरण-जीर्णोद्धार का काम लगभग पूरा हो गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस सह जनजातीय गौरव दिवस पर इसका उद्घाटन करने वाले हैं तो नगर विकास विभाग के अधिकारियों ने इस गड़बड़ी को पकड़ा है. अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक जुडको लिमिटेड ने बिरसा मुंडा जेल के जीर्णोद्धार व इसे संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना के लिए सरकार से अंतिम किस्त के रूप में 4.65 करोड़ की राशि की मांग की है. इसके लिए निर्माण कार्य के अभिलेख भी विभाग को भेजे गये हैं. इन अभिलेखों को नगर विकास विभाग के अफसरों ने जब गौर से जांचा तो गड़बड़ी पकड़ी गयी है.

इसे भी पढ़ें :  गैराज में खड़ी बस में फंदे से लटका मिला युवक का शव, हत्या की आशंका

दरअसल, जुडको ने अपने लिखे पत्र में कहा है कि बिरसा मुंडा जेल के संरक्षण और इसे संग्रहालय के रूप में विकसित करने के लिए इस परियोजना में प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त करने के बाद प्राक्कलन का सृजन किया गया एवं इसकी कुल प्राक्कलित राशि 22 करोड 93 लाख 24 हजार 900 रुपये पर मुख्य अभियंता नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गयी. इसके आधार पर ही निविदा निष्पादित करते हुए मेसर्स पैन इंटेलकॉम को 21 करोड़ 41 लाख 62 हजार 486 रुपये का कार्य आवंटित किया गया.

क्या कहता है नियम

जुडको ने इसकी पूरी डिटेल्स डॉक्यूमेंट विभाग को दी है. इसका अध्ययन करने के बाद नगर विकास विभाग ने जुडको के अधिकारियों से पूछा है कि दिए गये अभिलेख से यह पता चल रहा है कि कुल प्राक्कलन 22 करोड़ 93 लाख 24 हजार 900 रुपये के प्राक्कलन पर मुख्य अभियंता नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा तकनीकी स्वीकृति न प्रदान कर तकनीकी अनुमोदन प्रदान किया गया है, जबकि पीडब्ल्यूडी कोड के क्लाउज नंबर-132(a) के अनुसार किसी भी योजना के लिए निविदा की कार्रवाई प्रारंभ करने के पूर्व तकनीकी स्वीकृति प्राप्त कर लेना आवश्यक है.

चूंकि यह योजना पूर्ण होने वाली है एवं जुडको लिमिटेड द्वारा विभाग को अंतिम किस्त की राशि की अधियाचना प्राप्त हुई है, ऐसे में विभाग ने अब कहा है कि उक्त परियोजना की लागत में वृद्धि के संबंध में एक तथ्यात्मक प्रतिवेदन तथा प्राक्कलन पर तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करते हुए विभाग को अधियाचना भेजें. विभाग ने पूरे तथ्यों पर कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट देने का भी निर्देश दिया है. बता दें कि इस पूरी परियोजना में 142 करोड़ से अधिक खर्च हो चुके हैं.

क्या है तकनीकी स्वीकृति और अनुमोदन

किसी योजना के निर्माण के लिए निकाले जाने वाले टेंडर के पहले उसकी तकनीकी स्वीकृति जरूरी है. तकनीकी अनुमोदन किसी योजना के प्राक्कलन पर मोटे तौर पर एक ग्रीन सिग्नल होता है, लेकिन योजना अंतिम रूप से स्वीकृति के लिए तकनीकी स्वीकृति जरूरी है.

इसे भी पढ़ें : पैसेंजर्स एसोसिएशन ने खोला मोर्चा, कहा – रेलवे के फैसले से जनरल क्लास में सफर करने वालों पर बढ़ेगा बोझ

Related Articles

Back to top button