
Rana Pratap Singh
Ranchi: राज्य सरकार की तत्कालीन उद्योग सचिव वंदना डाडेल को झारखंड हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. हाई कोर्ट ने वंदना डाडेल की अपील को स्वीकृत करते हुए उनके खिलाफ सीबीआई जांच करने एवं उनपर विभागीय कार्रवाई करने के एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने वंदना ददेल, बेबको मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड एवं आदित्यपुर औद्योगिक विकास प्राधिकार की याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि बिना तथ्य की जांच किए और बिना वंदना डाडेल को मौका दिए याचिका में सीबीआई जांच का आदेश देना गलत है. इसलिए वंदना डाडेल के खिलाफ सीबीआई जांच करने एवं विभागीय कार्यवाही के एकल पीठ के आदेश को निरस्त किया जाता है. कोर्ट ने आदित्यपुर औद्योगिक विकास प्राधिकार (आयडा) को निर्देश दिया कि वह बेबको मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड को दोबारा नोटिस देगी एवं उसे अपनी बात रखने का मौका देगी और इसके बाद फिर से आदेश पर आदेश पारित करेगी.
बेबको मोटर्स से आयडा ने शोरूम खोले जाने पर मांगे थे 51 लाख
दरअसल, बेबको मोटर्स को आयडा ने इंडस्ट्रियल परपज पर जमीन दी थी. बेबको मोटर्स ने उसपर सर्विस सेंटर खोला था. इस पर आयडा की ओर से बेबको मोटर्स को नोटिस जारी करते हुए 51लाख रुपए की मांग की गई. साथ ही कहा गया कि चुकी वे 14 हजार स्क्वायर फीट का शोरूम चला रहे हैं इसलिए 51लाख रुपए दे. वही बेबको मोटर्स की ओर से कहा गया कि वह उस जमीन पर शोरूम नहीं चला रहे हैं, खाली जगह है, जहां कार को तैयार कर रखा जाता है, यहां कार का रिपेयर भी होता है, नई गाड़ी का स्टॉक यार्ड है और कार डिलीवरी के लिए यह छोटी सी जगह है, बेबको का शोरूम बिष्टुपुर में है. इसलिए आयडा द्वारा 51 लाख की मांग करना गलत है, आयडा ने उनकी बातों को सुने बिना ही नोटिस जारी कर 51 लाख रुपए की मांग की है. इसे लेकर बेबको मोटर्स की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी.
क्यों दी गई थी सीबीआई जांच
हाई कोर्ट की एकल पीठ ने बेबको मोटर्स की याचिका पर सुनवाई करने के दौरान पाया था कि आयडा में नियमों का उल्लंघन कर जमीन आवंटित की गई है और कई संस्थानों के लिए जमीन की व्यावसायिक दर तय की गई है. जिसके बाद कोर्ट ने आयडा की तत्कालीन अध्यक्ष और तत्कालीन उद्योग विभाग सचिव वंदना डाडेल को ऐसे मामलों में संलिप्त मानते हुए उनके खिलाफ सीबीआई को जांच एवं विभागीय कार्रवाई करने का आदेश दिया था.जिसे वंदना डडल की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी गई थी. पूर्व में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने वंदना डाडेल की एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए उनके खिलाफ सीबीआई जांच और विभागीय कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई थी.
आयडा ने हाई कोर्ट की एकल पीठ दी थी ये जानकारी
पूर्व में मामले की सुनवाई के दौरान जब हाई कोर्ट की एकल पीठ ने आयडा के बायल़ॉज और अधिकार क्षेत्र के मामले में जानकारी मांगी थी, तो कई तथ्य सामने आए थे. यह बात भी सामने आयी थी कि आयडा में फैक्ट्री लगाने के बदले शो रूम खोलने का भी प्रावधान है. जब अदालत ने जानना चाहा था कि क्या आयडा खुद इस तरह का प्रावधान कर सकता है. क्या किसी एक्ट में बदलाव के लिए विधायिका की मंजूरी नहीं लेनी है, तो बताया गया था कि आयडा के निदेशक मंडल ने सर्वसम्मति से ऐसा करने का निर्णय लिया था. यह भी निर्णय लिया गया था कि फैक्ट्री के बदले शोरूम खोलने वालों से व्यावसायिक शुल्क लिया जाएगा, ताकि राजस्व आता रहे. अदालत को बताया गया कि जब यह निर्णय लिया गया तब आयडा की तत्कालीन अध्यक्ष वंदना डाडेल भी बैठक में थीं. अदालत को उस समय बताया गया था कि आयडा में 15 शोरूम चल रहे हैं.
एकल पीठ ने उस समय की थी ये टिप्पणी
वंदना डाडेल के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश देते हुए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कहा था कि प्रतीत होता है कि आयडा में अधिकारी अधिकार का दुरूपयोग कर जमीन आवंटन कर रहे हैं. इसमें उनका निजी स्वार्थ भी हो सकता है. जिस समय शो रूम के लिए व्यावसायिक दर तय हुआ उस समय डाडेल ही आयडा की चेयरमैन थीं. उद्योग सचिव बनने के बाद भी मामले में उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की. इससे प्रतीत होता है कि अधिकारियों की मिलीभगत से यह गड़बड़ी की जा रही है.




