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धनबाद के पूर्व SSP सुरेंद्र कुमार झा समेत 4 पुलिस अधिकारी को बड़ी राहत, 6 साल बाद थानेदार की हत्‍या का मामला खारिज

2016 में दर्ज कराया गया था शिकायतवाद, छह साल बाद अदालत ने किया खारिज

Dhanbad: तोपचांची के पूर्व थानेदार उमेश कच्छप की मौत मामले में दायर शिकायतवाद को आज अदालत ने खारिज कर दिया. शुक्रवार को धनबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुजीत कुमार सिंह की अदालत ने नंदी कच्छप के अधिवक्ता कुमार मनीष की दलील सुनने के बाद शिकायतवाद को खारिज कर दिया. मामले में अदालत के फैसले से धनबाद के तत्‍कालीन एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा, बाघमारा के तत्कालीन डीएसपी मजरूल होदा, हरिहरपुर के तत्‍कालीन थाना प्रभारी संतोष रजक और तोपचांची के तत्‍कालीन इंस्‍पेक्‍टर डीके मिश्रा को बड़ी राहत मिली है.

मालूम हो कि थानेदार उमेश कच्‍छप का शव थाना परिसर में ही स्थित उनके आवासीय कमरे में फांसी के फंदे से लटकता मिला था. मामले में उमेश कच्‍छप की भाभी नंदी कच्छप ने धनबाद के पूर्व एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा समेत अन्‍य के खिलाफ आत्‍महत्‍या के लिए दबाव बनाने की एफआइआर साल 2016 में दर्ज कराई थी. बाद में मामले की जांच सीआइडी को सौंप दी गई थी. आज शिकायत वाद दर्ज होने के छह साल बाद तोपचांची के पूर्व थानेदार उमेश कच्छप की मौत मामले में दायर शिकायतवाद को आज अदालत ने खारिज कर दिया.

यह है पूरा मामला

रांची के नगड़ी के रहने वाले 1994 बैच के दारोगा उमेश कच्‍छप का शव 17 जून 2016 को थाने में ही फांसी के फंदे से लटकता मिला. वे घटना से महज 10 दिन पहले तोपचांची थाना में बतौर थानेदार योगदान दिया था. इंस्पेक्टर उमेश कच्छप की मौत के बाद उनकी भाभी नंदी कच्छप ने धनबाद की अदालत में 6 अगस्त 2016 को शिकायतवाद दायर कर कहा था कि उनके देवर उमेश कच्छप एक ईमानदार पुलिस अधिकारी थे. 14 जून 2016 को उमेश ने फोन कर उन्हें तथा अपनी पत्‍नी को बताया था कि एक फर्जी कांड में उन्हें फंसाया जा रहा है. डीएसपी मजरूल होदा और तब राजगंज के थानेदार रहे संतोष रजक ने चमड़ा लदे एक ट्रक को पकड़ा था तथा उसके ड्राइवर नजीम पर गोली चलाई थी. इस मामले में राजगंज थाना में 16 जून 2016 को कांड संख्या 27/16 दर्ज किया गया था. बाद में फर्जी एनकाउंटर का यह मामला तूल पकड़ने लगा. नंदी कच्‍छप के अनुसार, उमेश ने कहा था कि इसमें उन्हें फंसाया जा रहा है. घटना राजगंज थाना क्षेत्र की थी, जबकि उसे तोपचांची में दिखाया जा रहा है. उन्होंने एसएसपी साहब को सूचना दी और उनसे मदद मांगी तो उनके द्वारा भी धमकाया जा रहा है. 18 जून 2016 को उन्हें (नंदी कच्छप को) मोबाइल पर सूचना मिली कि उनके देवर की स्थिति काफी नाजुक है. सूचना पर जब वह लोग तोपचाची थाना पहुंचे तो उनकी देवर की लाश थाने में पड़ी थी. नंदी ने आरोप लगाया कि वह लोग अनुसूचित जाति के हैं, इस कारण अधिकारियों द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया गया और आत्महत्या के लिए उनके देवर उमेश कच्‍छप को मजबूर कर दिया गया. उमेश कच्‍छप की पत्‍नी ने भी इस मामले में कोर्ट में गवाही देते हुए इन अधिकारियों पर आरोप लगाए थे.

उल्लेखनीय है कि जिले के इस बहुचर्चित मामले में तोपचांची के तत्कालीन थानेदार उमेश कच्छप ने बाघमारा डीएसपी मजरूल होदा व राजगंज के थानेदार दारोगा संतोष रजक द्वारा नजीम गोलीकांड में उनपर दबाव बनवाकर तोपचांची में एफआइआर दर्ज कराए जाने का आरोप लगाया था. कहा कि गलत तरीके से इस घटनास्‍थल को तोपचांची थाना क्षेत्र का साबित करने का प्रयास किया गया. इसी बीच 17 जून 2016 को उनका शव थाने में ही फांसी के फंदे से लटकता मिला. पुलिस ने इस मामले को आत्महत्या बताया था. उस समय इसे लेकर काफी बबाल मचा था, जिसके बाद डीएसपी मजरूल होदा, इंस्पेक्टर धीरेंद्र मिश्रा व राजगंज थानेदार संतोष रजक को निलंबित कर दिया गया था, जबकि एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा का स्थानांतरण कर दिया गया था. फिलहाल जांच के बाद दारोगा संतोष रजक को पुलिस सेवा से बर्खास्‍त किया जा चुका है.

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