
Jamshedpur : बहरागोड़ा विधानसभा जेएमएम के टिकट पर विधायक बने कुणाल षाडंगी के भाजपा ज्वाइन करने के बाद भाजपा नेता समीर मोहंती ने मान लिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी का टिकट कुणाल को ही मिलेगा.
भाजपा से चुनाव लड़ने की अपनी मंशा पर पानी फिरते देख समीर पार्टी छोड़ने को भी तैयार हो हैं, लेकिन इससे पहले वे पार्टी नेतृत्व को चयन का मौका देना चाहते हैं.
समीर ने गांव की चौपाल में बैठक कर आपसी सहमति से खास योजना बनायी है जिसके जरिये वे ‘बहरागोड़ा की पसंद’ का पता लगायेंगे.
ग्रामीण अंचल में ठोस पकड़ रखने वाले समीर मोहंती के समर्थक गांव-गांव और घंर-घर मतपेटी लेकर जा रहे हैं जहां ग्रामीणों से तीन सवाल पूछे जा रहे हैं. सभी का जवाब हां या ना में देना है.
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क्या हैं सवाल
पहला सवाल- क्या समीर मोहंती को राजनीति करनी चाहिए?
दूसरा सवाल- क्या समीर मोहंती को चुनाव लड़ना चाहिए?
तीसरा सवाल- क्या समीर मोहंती को भाजपा छोड़ दूसरे दल से चुनाव लड़ना चाहिए ?
इन तीन सवालों के जवाब लेकर कार्यकर्ता गांव के इसी चौपाल में लौटेगे. जहां इन जवाबों की गिनती होगी. चौपाल की सहमति से इन जवाबों को भाजपा आलाकमान को सौंपा जायेगा.
जो फैसला भाजपा देगी उस फैसले को फिर चौपाल के सामने रखा जायेगा. आखिर में चौपाल ही निर्णय करेगी की समीर मोहंती को कौन सा राजनीतिक निर्णय लेना है.
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कौन हैं समीर मोहंती
2014 में बहरागोड़ा से समीर मोहंती जेवीएम से चुनाव लड़ चुके है. हांलाकि इस चुनाव में समीर मोहंती नंबर तीन पर रहे थे. लेकिन दूसरे नंबर पर रहे डॉ दिनेशानंद गोस्वामी से महज 400 वोट से ही पीछे थे.
चुनाव कुणाल षाडंगी जीते थे. उस वक्त भी समीर मोहंती की खूब चर्चा हुई थी. ग्रामीण परिवेश में जन्मे समीर मोहंती की पढ़ाई-लिखाई बहरागोड़ा में ही हुई.
पिता जिला स्कूल में शिक्षक थे. उनकी राजनीतिक शुरुआत झारखंड अलग आंदोलन से हुई थी.
क्या कहते हैं समीर
समीर मोहंती का कहना है की बहरागोड़ा के विकास के लिए ही भाजपा में वे शामिल हुए. उनका सपना है कि बहरागोड़ा के मुद्दों को लेकर बिधानसभा में आवाज बुलंद कर सकें.
भाजपा में शामिल हुए कुणाल षाड़ंगी का स्वागत करते हुए समीर मोहंती आगे कहते हैं कि अभी तक पार्टी ने कुणाल के चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं की है. लिहाजा उनके पास समय है कि वे पार्टी को स्थिति का सही आकलन दे सकें.
उनका ये भी कहना है कि राजनीति न तो उनको विरासत में मिली है और न ही वो दौलत के दम पर राजनीति करते हैं. वो गांव की गलियों से राजनीति में आये हैं, लिहाजा गरीबों के हित के लिए उनसे जो बन पड़ेगा वे करेंगे.
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