
Ranchi: माना जा रहा है कि राज्य सरकार विधानसभा के मॉनसून सत्र में मॉब लिंचिंग विधेयक को फिर से लाने की तैयारी में है. कैबिनेट से पास किए जाने के बाद इसी सत्र में इसे लाया जाना है. पूर्व सीएम और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इसे लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं.
सोशल मीडिया के जरिये अपनी बात रखते कहा है कि सीएम हेमंत सोरेन मॉब लिंचिंग पर फिर एक बार विधेयक लाने जा रहे हैं जिसे पिछली बार राज्यपाल ने लौटा दिया था. बाबूलाल ने सवाल पूछते कहा है कि आखिर मुख्यमंत्री इस विधेयक के लिए इतना व्याकुल क्यों हैं. अगर उनके मन में तनिक भी ईमानदारी है तो धर्म परिवर्तन रोकने को भी विधेयक लाना चाहिये. लव जिहाद से पूरा झारखंड खासकर संथालपरगना और संताल समुदाय तबाह हो रहा है. सरकार को दम है तो इस पर विधेयक लाए. बाबूलाल के मुताबिक सरकार ऐसा करेगी नहीं. इससे उसका घुसपैठिया वोटर नाराज हो जायेगा. झारखंड की हजारों संताल, आदिवासी लड़कियों समेत अन्य की लव जिहाद, धर्म परिवर्तन ने जिंदगी छीन ली. भाजपा इस मुद्दे को छोड़ने वाली नहीं है. सरकार में आएंगे तो “चांडाल” को सबक सिखाएंगे.
राज्यपाल की आपत्ति को किया गया दूर
गौरतलब है कि दिसंबर 2021 में राज्य सरकार ने विधानसभा में मॉब लिंचिंग विधेयक पास कराया था. इसे तत्कालीन राज्यपाल ने मार्च 2022 में लौटा दिया था. उन्होंने आपत्ति जताते कहा था कि इस विधेयक के अंग्रेजी संस्करण में धारा दो के उपखंड (1) के उपखंड 12 में गवाह संरक्षण योजना का जिक्र किया गया है. लेकिन हिंदी संस्करण में इसका जिक्र ही नहीं है. इसी धारा के उपखंड (1) के उपखंड 6 में दी गयी भीड़ की परिभाषा पर उन्होंने आपत्ति की थी. कहा गया था कि दो या दो से अधिक व्यक्तियों के समूह को अशांत भीड़ नहीं कहा जा सकता.
कहा जा रहा है कि राज्य सरकार ने महाधिवक्ता की राय के बाद राज्यपाल द्वारा उठायी गयी आपत्तियों को दूर कर लिया है. सरकार के मुताबिक उन्मादी भीड़ द्वारा कानून को अपने हाथ में लेकर की जाने वाली हिंसा और हत्या गंभीर चिंता का विषय है. इस पर रोक के लिए मॉब लिंचिंग विधेयक की जरूरत है.




