
Ranchi: केंद्र सरकार आयुष्मान भारत योजना में कई स्तर पर बदलाव करेगी. इसको लेकर नीति आयोग के सदस्य बिनोद पॉल के अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति ने रिपोर्ट सौंपी है. जिसके बाद घुटने की सर्जरी को इस योजना के तहत जोड़ा जायेगा. इस रिपोर्ट में मोतियाबिंद जैसी आम तरह की सर्जरी को हटाने का फैसला किया गया है. इस समिति में स्वास्थ्य और स्वास्थ्य अनुसंधान एवं आयुष्मान भारत के सचिव भी शामिल थे.
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खूंटी के पूर्व सांसद और पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा ने इसका विरोध किया है. उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि आयुष्मान भारत योजना से मोतियाबिंद के ईलाज को बाहर नहीं किया जाये. झारखंड के एक बड़े वर्ग को आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभ मिल रहा है. आयुष्मान योजना से ईलाज को बाहर करने पर 45 से 75 आयुवर्ग के लोगों को लाभ से वंचित होना पड़ेगा.
राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत भी होता है मोतियाबिंद का ईलाज
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर विनोद पॉल की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति आयुष्मान भारत के लिए गठित की गयी थी. समिति ने मोतियाबिंद सर्जरी को हटाये जाने की सिफारिश की है. रिपोर्ट में समिति के द्वारा कहा गया है कि हम इस श्रेणी के तहत धोखाधड़ी और दुरुपयोग की जांच करने में असमर्थ हैं. आयुष्मान लाभार्थियों के बीच यह बहुत लोकप्रिय सर्जरी रही है, लेकिन इसकी जांच करना असंभव है, क्योंकि सरकार आयुष्मान भारत और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के तहत एक ही व्यक्ति की सर्जरी का वित्तपोषण कर रही है. अन्य योजनाओं में लाभार्थियों की जांच के लिए मजबूत आइटी प्लेटफॉर्म का अभाव है. इसी समय मोतियाबिंद को राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत वित्त पोषित किया जा सकता है.
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आयुष्मान योजना से मोतियाबिंद के ईलाज के लिए मिलते हैं 5 हजार, एनपीबी में 2 हजार
आयुष्मान भारत योजना से हटाने की सिफारिश इसलिए की गयी क्योंकि मोतियाबिंद का ईलाज दो योजनाओं से होता था. अस्पताल गलत तरीके से दोनों योजनाओं से पैसे ले रहे थे. एनपीबी राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम के तहत इस ईलाज के लिए 2 हजार मिलते हैं. और सामान 3 हजार का लगता है. वहीं आयुष्मान भारत के तहत इसके ईलाज के लिए 5 हजार दिये जाते हैं. इसलिए कड़िया मुंडा ने इस योजना से मोतियाबिंद के ईलाज को नहीं हटाने का आग्रह किया है.
स्वामी दयानंद नेत्रालय के निर्मल सिंह का कहना है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत मोतियाबिंद ऑपरेशन को आयुष्मान भारत के पैकेज से अलग किया जा रहा है. जो ऑपरेशन 2000 रुपये में देशभर में सुलभ है, निजी नेत्रालय के द्वारा सीधे 25 से 50 हजार लिया जाता है.
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