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#MediaWatch: 88 हजार आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका व पोषण सखी के आंदोलन की खबर अखबारों से गायब

Surjit Singh

Ranchi: राज्य की करीब 88, 832 आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका और पोषण सखी पिछले दो सप्ताह से आंदोलन पर हैं. मांगों को लेकर आंदोलन कर रही महिलाएं सड़क पर ही सो जा रही हैं. पर, सरकार उनकी नहीं सुन रही है. सरकार कुपोषण सप्ताह मना रही है. ताकि झारखंड में कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी लायी जा सके. लेकिन कुपोषण से लड़ने वाली महिलाओं की चिंता ही नहीं.

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इस बीच चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं आंदोलन कर रही हैं, पर इसकी खबर मीडिया से गायब है. 3 सितंबर को रांची से प्रकाशित किसी भी अखबार (हिन्दी या अंग्रेजी) में यह खबर नहीं दिखी. आखिर इसकी वजह क्या हो सकती है. आखिर किन कारणों से मीडिया इतनी बड़ी संख्या में आंदोलन कर रही महिलाओं की खबर लोगों तक नहीं पहुंचा रही.

रांची से हिन्दी के प्रमुख अखबारों में प्रभात खबर, हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और अंग्रेजी के द टेलिग्राफ, टाईम्स ऑफ इंडिया व पायोनियर अखबार छपते हैं. इन अखबारों की कीमत 3 रुपये से लेकर 5 रुपये के बीच हैं.

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झारखंड में करीब 39 हजार आंगनबाड़ी केंद्र हैं. इनमें 38,432 सेविका, 38,400 आंगनबाड़ी सहायिका और 12,000 पोषण सखी हैं. पोषण सखी, सिर्फ उन जिलों (गिरिडीह, चतरा, गोड्डा, धनबाद, दुमका व देवघर) में हैं, जहां सबसे अधिक कुपोषण है. ये वही महिलाएं हैं, जो आंगनबाड़ी केंद्रो पर पहुंचने वाले बच्चों को खाना बना कर खिलाने का काम करती है.

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क्या जायज नहीं है मांगे

एक सवाल उठता है. क्या आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका व पोषण सखी की मांगें जायज नहीं हैं. जो मीडिया ने उनकी खबर को बायकॉट कर दिया है. हम यहां उनकी मांगों के बारे में बता रहे हैं.

– वादे के मुताबिक मानदेय में बढ़ोतरी की जाये

– आंगनबाड़ी कर्मियों का स्थायीकरण किया जाये.

– जनवरी 2018 में सरकार से हुए समझौते को लागू किया जाये

– मानदेय के स्थान पर वेतन दिया जाये.

– समान काम के लिए समान वेतन दिया जाये.

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