
Dumka : राफेल विमान घोटाले के विरुदध कांग्रेस छह सितंबर से गांव-गांव जाकर जागरुकता कार्यक्रम आयोजित करेगी. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व कांग्रेस नेता आलमगीर आलम ने गुरुवार को कांग्रेस कार्यालय में प्रेसवार्ता का आयोजन कर यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार देश में जिला स्तर पर प्रेसवार्ता कर इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया गया है. कहा कि विमान सौदे को सावर्जनिक रूप से जनता के बीच ले जाया जायेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि अप्रैल 2015 में केंद्र सरकार ने 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीद का सौदा राष्ट्रीय सुरक्षा हित को दरकिनार कर किया. खरीद में अनियमितता का आशंका जतायी. उन्होंने बताया कि पूर्व में मनमोहन सरकार द्वारा12 दिसंबर 2013 में यह सौदा किया जा रहा था. जिसमें प्रति लड़ाकू विमान 526.10 करोड़ की लागत से कुल126 विमान का सौदा किया जाना था.
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भाजपा सरकार को बेनकाब करते हुए घोटाले को उजागर किया जायेगा
वर्तमान सरकार ने करार को रद्द करते हुए मात्र 36 विमानों का सौदा 1670.70 करोड़ प्रति विमान का किया. इतने बड़े अंतर से घोटाले की आशंका है. उन्होंने मोदी सरकार पर नियमों का उल्लंघन करने और राष्ट्रहित की अनदेखी करने का आरोप लगाया. कहा कि सरकार ने नियमों को दरकिनार कर सौदा किया है. एक तरफ सरकार सौदे को सार्वजनिक नहीं करने को लेकर सुरक्षा का हवाला दे रही है. दूसरी ओर रिलांयस कंपनी को अनुचित ढंग से लाभ पहुंचाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 6 सितंबर से गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करते हुए भाजपा सरकार को बेनकाब करते हुए सौदे में हुए घोटाले को उजागर किया जायेगा. भाजपा के राष्ट्र प्रेम के ढ़ोंग को सार्वजनिक किया जायेगा.
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एनसीआर लागू करने से पहले सरकार करे समीक्षा
पाकुड़ और साहिबगंज जिले में एनसीआर लागू करने को लेकर आलमगीर आलम ने बताया कि कांग्रेस सरकार पूर्व में ही देश के असम राज्य में एनसीआर लागू कर चुकी है. उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि घुसपैठ रूके. कोई भी देश के लोग भारत में अवैध तरीके से नहीं रह सकते है. एनसीआर लागू करने के निर्णय से सहमत होते हुए कहा कि सरकार पहले यह तय करे कि बाहरी और भितरी कौन है. एनसीआर लागू होने से पूर्व इसकी समीक्षा होना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा आजादी के समय 1952 तक का समय निर्धारित किया था, जिसके तहत पाकिस्तान और भारत के लोगों को आने-जाने का समय दिया गया था. जिसे बाद में बढ़ाकर वर्ष 1961 किया गया. जिसके तहत जो जिस देश में रह रहे हैं, वहीं के निवासी कहलायेंगे.
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राजमहल में बड़ी संख्या में वैसे लोग रहते हैंं, देश का निवासी होने का सबूत नहीं है
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष आलमगीर आलम ने बताया कि राजमहल में बड़ी संख्या में अब भी वैसे लोग रहते है, जिनके पास किसी प्रकार का देश का निवासी होने का सबूत नहीं है. अब भी मजदूर एवं गरीब वर्ग के लोग सरकारी जमीनों पर किसी तरह गुजर बसर करने को विवश है. जबकि वैसे लोग कई पीढ़ी से यहां रहते आ रहे है. आलमगीर आलम ने सरकार को एनसीआर में मूलवासियों का ख्याल रखते हुए राशन कार्ड, वोटर कार्ड एवं वंशावली सहित अन्य पहचान पत्रों के आधार पर समीक्षा कर गंभीरता से लागू करने की सलाह दी.
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कांग्रेस भवन तोड़वाना राजनीति से प्रेरित
देवघर में कांग्रेस भवन को जर्जर बता कर जिला प्रशासन द्वारा तोड़वाने के निर्णय को आलमगीर आलम ने राजनीति से प्रेरित बताया. उन्होंने बताया कि कांग्रेस भवन को राजकुमार सिन्हा नामक व्यक्ति ने दान में दिया था. न्यायालय द्वारा इस मामले में स्टे ऑडर्र मिल चुका है. उन्होंने न्याय में आस्था नहीं रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अपने तरीके से काम करना चाहती है. कहा कि कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री रघुवर दास से वह और जरमुंडी विधायक बादल पत्रलेख मिले थे. मुख्यमंत्री ने आश्वासन देते हुए जिला प्रशासन को रोक का निर्देश देते हुए तीन से चार माह में भवन की मरम्मति करवाने की सलाह दी थी. लेकिन कुछ दिन बाद ही जिला प्रशासन द्वारा भवन को गिरवा दिया गया.
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प्रतिबंधित मांस को लेकर पाकुड़ में हुई हिंसा दुर्भाग्यपूर्ण
बीते दिनों पाकुड़ जिले के महेशपुर में प्रतिबंधित मांस पर रोक लगाने को लेकर पुलिस और ग्रामीणों में हुई झड़प को आलमगीर आलम ने दुभाग्यपूर्ण बताया. कहा कि ऐसी घटना की पुनरावृति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने लोगों से विचार और मानसिकता में बदलाव लाने की जरूरत बताया. आगे शांति की उम्मीद जताते हुए कहा कि लोगों को संयम और संविधान के दायरे में रहकर काम करना चाहिए.




