
- टंडवा का बच्चा कांके रिंग रोड के पास हुआ था गुम
- मनातू क्षेत्र के सुभाष लोहरा और पिंकी देवी ने कांके थाना में पहुंचाया बच्चे को
- थाना से बच्चे को बाल कल्याण समिति को सौंपा गया
- मंगलवार दोपहर बच्चे को बाल कल्याण समिति ने घर पहुंचाया
Ranchi: भटकते बच्चों के प्रति दया बहुत कम लोग ही दिखाते हैं. अमूमन लोगों की सोच ऐसे बच्चों के प्रति शक भरी ही होती है. लेकिन इन सबसे परे हमारे समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने आराम को छोड़ इन बच्चों के लिए सोचते हैं. कुछ ऐसा ही किया है कांके थाना अंतर्गत मनातू निवासी सुभाष लोहरा और उनकी पत्नी पिंकी देवी ने. सोमवार को मनातू स्थित अपनी बस्ती के निकट रिंग रोड मोड़ के पास दिन के लगभग 12 बजे एक बच्चे को भटकते हुए देखा. भटकते बच्चे को देख दंपति को लगा कि बच्चा अपने परिजनों से बिछड़ गया है, जो यहीं कहीं आसपास होंगे. बच्चे की मदद करने के लिए दोनों ने बच्चे से बात की. बच्चे ने अपना पता तेलियाडीह बताया. बच्चे की उम्र छह-सात साल होने के कारण, इसके आगे बच्चा कुछ नहीं बता पाया. इसके बाद पिंकी देवी और सुभाष लोहरा को यकीन हो गया कि बच्चा गुमशुदा है. दोनों बच्चे को अपने घर ले गये और खाना खिला कर कांके थाना लाये.
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दस मिनट तक की बात, लेकिन बच्चे ने नहीं दी घर की जानकारी
इस संबंध में सुभाष लोहरा ने बताया कि बच्चा रिंग रोड के पास मिला था. बच्चे से जानकारी लेने के लिए दस मिनट तक बात की, लेकिन फिर भी बच्चे ने तेलियाडीह से अधिक जानकारी नहीं दी. जिसके बाद कांके थाना प्रभारी को फोन किया गया. सुभाष ने कहा कि कांके थाना प्रभारी ने सारी बात सुन कर बच्चे को थाना लाने की बात कही. थाना ले जाने के बाद जानकारी मिली की बच्चे ने जो पता बताया है वो उसके परिजनों तक पहुंचने के लिए काफी नहीं है. ऐसे में बच्चे और दंपति को लेकर कांके थाना के सहायक अवर निरीक्षक सुनील मुर्मू रांची जिला बाल कल्याण समिति पहुंचे.
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बच्चे को सकुशल घर पहुंचाया गया
बाल कल्याण समिति के सदस्य कौशल किशोर ने बताया कि मंगलवार दोपहर तक बच्चे को उसके घर पहुंचा दिया गया. रात में बच्चे को करूणा आश्रम में रखा गया था. कौशल किशोर ने कहा कि बच्चा चतरा टंडवा के तेलियाडीह का रहनेवाला है. काफी पूछताछ के बाद पता चला कि बच्चा कांके में अपने जीजा के साथ रहता था. मेला घूमने के नाम से बैग और पांच सौ रुपये लेकर घर से निकल गया. जिसके बाद सुभाष लोहरा और पिंकी देवी को मिला. उन्होंने बताया कि समिति की ओर से वे बच्चे को तेलियाडीह पहुंचाने गये थे. बता दें कि बाल कल्याण समिति का गठन किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत जिला स्तर पर किया गया है. यह समिति बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकतावाले बच्चों के सर्वोत्तम हित में फैसला लेती है.
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