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कहीं लैप्स ना हो जाये गांव की सरकार के लिए आये 800 करोड़ रुपये

दिसंबर 2020 तक गांव की सरकार का टर्म हो जायेगा पूरा, पंचायत चुनाव कब होंगे पता नहीं

Ranchi: दिसंबर 2020 तक गांव की सरकार का टर्म पूरा हो जायेगा. पंचायत चुनाव राज्य में कब होंगे, किसी के पास इसका जवाब नहीं है. इधर अब चिंता यह होने लगी है कि 15वें वित्त से मिले 800 करोड़ रुपये कहीं लैप्स ना कर जाये. पंचायतों को इस साल 1 जुलाई से 15वें वित्त का पैसा जारी होना शुरू हुआ. अब तक दो किस्तों में 2020-21 के लिये 400-400 करोड़ से भी अधिक राशि उन्हें दी जा चुकी है. पर संकट जब पंचायती व्यवस्था ही नहीं रहेगी तो 15वें वित्त का पैसा खर्च किसके जरिये होगा.
हालांकि माना जा रहा है कि ऐसे में राज्य सरकार बाबू साहबों के हाथों में जिम्मा सौंपेगी. पर पंचायतों ने भी कमर कस ली है. अगर बीडीओ और सीओ के हाथों में वित्तीय अधिकार सौंपा गया तो मुखिया संघ कानूनी सलाह भी लेगा.

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गाइडलाइन में है निकायों के लिये निर्देश

ग्रामीण विकास विभाग (पंचायती राज), झारखंड की ओर से 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में एक मार्गदर्शिका (अधि सं 1551, दिनांक 25.09.20) जारी की गयी है. इसमें कहा गया है कि स्थानीय अभिशासन की इकाई के रूप में पंचायतों को स्थापित करना ही वित्त आयोग की अनुशंसाओं का लक्ष्य है.
15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित राशि तीनों स्तर की पंचायती राज संस्थाओं को जारी की जायेगी. इस राशि में अनटाइड फंड (अनाबद्ध अनुदान) का उपयोग संबंधित निकाय द्वारा किया जायेगा. यानि वित्त आयोग के अनुसार पंचायती राज व्यवस्था के जरिये ही राशि का उपयोग किये जाने की बात कही गयी है.

3 महीने बाद आयी गाइडलाइन

जुलाई में पंचायतों के साथ- साथ जिला परिषदों को भी पैसे दिये गये. परिषदों को 42,22,50,000 रुपये आवंटित किये गये. दो किस्तों में पंचायतों को भी अभी तक पैसे जारी हुए हैं. पैसे का खर्च करने के लिये जरूरी गाइडलाइन सितंबर में जारी की गयी. अब जबकि गांव की सरकार की विदाई बेला करीब है, तब जाकर गाइडलाइन आय़ी है. ऐसे में 15वें वित्त के पैसे के उपयोग पर पंचायत प्रतिनिधियों को ज्यादा काम करने का मौका नहीं मिलेगा. वित्त आयोग के पैसे के साथ साथ पंचायत चुनाव होने तक गांव के विकास की योजनाएं फंसी रहेंगी.

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कानूनी सलाह लेकर मुखिया संघ उठायेगा अगला कदम

राज्य मुखिया संघ के महासचिव अजय कुमार सिंह के अनुसार वित्त आयोग की नियमावली में पंचायती व्यवस्था को सबल करने और उसे अनुदान देकर मजबूत करने की बात है. पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने को है. अब जाकर 15वें वित्त के पैसे को खर्च करने की गाइडलाइन आयी है. हो सकता है कि पंचायतों के विदा होने के बाद सरकार प्रशासनिक पदाधिकारियों को इस पैसे को खर्च करने का पावर दे दे. वे इसका विरोध करेंगे. यहां तक कि इसके खिलाफ कानूनी सलाह लेकर आगे कदम उठाएंगे.

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सरकार कर सकती है पावर का उपयोग

सोशल ऑडिट यूनिट (झारखंड सरकार) के प्रमुख गुरजीत सिंह के अनुसार ग्राम पंचायतों में ली गयी योजना (जीपीडीपी) पर राज्य सरकार काम कर सकती है. पंचायतें ना भी हो तो चयनित योजनाओं के लिये पैसे खर्च किये जा सकते हैं. नयी योजनाओं को लेने और उस पर काम करने में मनाही होगी. वैसे पंचायती राज व्यवस्था के होने से गांव के विकास की योजनाओं पर क्रियान्वयन में आसानी होती है.

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पंचायतों को 15वें वित्त आयोग से मिली राशि

किस पंचायत को कितनी राशि मिली

क्र संजिलापं समिति की संग्राम पंचायतआवंटित राशि
01गढ़वा2018914,71,62,405
02पलामू2126919,55,32,332
03लातेहार9115 8,95,38,502
04चतरा121611,95,03,883
05हजारीबाग1625118,10,77,834
06कोडरमा61066,79,93,131
07गिरिडीह1335226,13,53,325
08देवघर1019414,12,44,658
09गोड्डा920114,37,52,286
10साहेबगंज916311,70,83,317
11पाकुड़61289,83,33437
12दुमका1020614,88,00,755
13जामताड़ा61188,40,76,784
14धनबाद1025616,46,13,076
15बोकारो924116,35,08,900
16रामगढ़61258,34,14,245
17लोहरदगा7664,91,88,508
18गुमला1215912,62,08,697
19खूंटी6866,34,36,590
20रांची1830521,37,95,154
21सिमडेगा10947,47,05,438
22प सिंहभूम1821717,24,88,455
23सरायकेला-खरसावां91329,93,76,295
24पू सिंहभूम1123116,06,86,993

 

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