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बीएसयूपी योजना के तहत इंसानों के रहने के लिए बने आवास सुअरों का रैन बसेरा बने

Ranchi : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जेएनएनयूआरएम के तहत शहर को स्लम मुक्त करने के लिए बेसिक सर्विसेज फॉर अर्बन पुअर (बीएसयूपी) योजना की शुरुआत की गयी थी.  इसके लिए लगभग 110 करोड रुपए का फंड जारी किया गया था. लेकिन राजधानी में यह योजना कितना सफल रही,  इसका अनुमान मधुकम में बने आवासों से सहज ही लगाया जा सकता है.  गरीब, निर्धन परिवार जिनके पास रहने के लिए अपने मकान नहीं हैं,  वैसे लोगों को बसाने के लिए बीएसयूपी योजना के तहत पक्के आवास बनाकर बसाने की योजना थी. लेकिन सरकार द्वारा  निर्मित मकान आज सुअरों के रहने के काम आ रहे हैं.  इन दिनों मधुकम में बनाये गये आवास में सुअर रह रहे हैं. देखरेख के अभाव में पूरा भवन जर्जर हो चुका है.

भवन में लगे सभी बिजली के तार,  पानी टंकी,  बिजली के बोर्ड सभी चोरी कर लिये गये हैं. इसके अलावा इन मकानों में आपराधिक गतिविधियां भी बढ़ गयी हैं. मधुकम में लगभग 11 करोड़ की योजना से भवन का निमार्ण कराया गया था,  लेकिन करोडों के बजट में निर्मित हुए इस भवन में इंसान नहीं सुअर,  कुत्ता और अन्य जानवर रहते हैं.

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 21 यूनिट में  336 फ्लैट का हुआ है निर्माण

मधुकम में कुल 21 यूनिट में कुल 336 फ्लैट का निर्माण किया गया है. लेकिन अब तक सिर्फ 10 यूनिट के  148 फ्लैट का ही आवंटन हुआ है. शेष बचे 188 फ्लैट बीते तीन सालों से भी ज्यादा समय से खाली पड़े हुए हैं. इन खाली पडे फ्लेटों को भगवान भरोसे छोड दिया गया है. न बाउंड्री की गयी है और न ही अन्य कोई सुरक्षा के इंतजाम हैं.

सिर्फ खानापूर्ति के लिए निगम की और से नाम के लिए गार्ड की तैनाती की गयी है लेकिन वह गार्ड भी एक पांव से लाचार है और आपराधिक तत्वों को रोकने में सक्षम नहीं है. गार्ड नंदू उरांव ने स्वयं बताया कि यहां आपराधिक गतिविधियां बढ़ी हुई हैं. प्रति दिन रात आठ बजते ही आपराधिक तत्वों को जमावड़ा लगने लगता है. दारु,  गांजा व अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते है. कुछ कहो तो हमसे ही उलझने और मारपीट करने लगते हैं.

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दरवाजे की कुंडी से लेकर कमरे के अन्य सामान हो चुके

हैं गायब

मधुकम में बने आवासों के खाली पड़े रहने के कारण चोर-उचक्कों को मौका मिल गया है. दरवाजे की कुंडी तोड़ कर कमरे के अंदर लगे बिजली के तार, पानी की टंकी व अन्य सामग्री चुरा ली गयी है. सूत्रों के अनुसार देर रात इन कमरों में शराब और शबाब की पार्टी चलती है.

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दस कदम पर ही है सुखदेव नगर थाना

मजेदार बात यह है कि इन आवासों से मात्र दस कदम की दूरी पर सुखदेव नगर थाना अवस्थित है. लेकिन थानेदारों को इससे कोई लेना-देना नहीं.  लोगों का आरोप है कि सब कुछ जानते हुए भी पुलिस पदाधिकारी आंख में पट्टी बांधकर बैठे रहते हैं. पुलिस अधिकारी अन्य स्थानों पर छापेमारी कर गांजा-शराब बेचने और पीने वालों पर कार्रवाई करते हैं,  लेकिन ऑफिस के पास ही धडल्ले से चले रहे अवैध कार्यों पर ध्यान नहीं देते.

क्यों खाली पड़े हैं आवास

दरअसल पूर्व में इन स्थानों पर इस्लाम नगर वासियों को बसाने की योजना थी. लेकिन इस्लामनगर वासियों ने यहां आने से इनकार कर दिया. इसके बाद हरमू रोड़ स्थित वाल्मीकि नगर में रहने वाले विस्थापितों को बसाने की योजना बनी. वाल्मीकि नगर वासियों ने अपने स्थान को खाली करने से मना दिया. इसके बाद विस्थापितों को बसाने का मामला बीते तीन वर्ष से ठंडे बस्ते में चला गया है. हालांकि यहा पहाडी मंदिर के पीछे रहने वाले विस्थापित बसना चाहते हैं, लेकिन उन्हें बसाया नहीं जा रहा.

मेयर को है सभी बातों की जानकारी

ऐसा नहीं है कि मेयर आशा लकड़ा इन सब बातों से अनभिज्ञ है. उनका कहना है कि खाली स्थान पर आपराधिक गतिविधियां होती ही हैं. अब जब तक सरकार की और से दिशा निर्देश जारी नहीं होता, तब तक  कुछ नहीं किया जा सकता.

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