
Ranchi: कृषि, पशुपालन विभाग किसानों की मदद के लिये नयी पहल करने में लगा है. 15 अगस्त तक सभी किसानों को पीएम किसान योजना से जोड़ने का लक्ष्य है. इसे लेकर और भी प्रयास होने हैं. एक हेल्पलाइन नंबर जारी करने की भी योजना बनायी गयी है. मकसद किसानों की समस्या का जल्द से जल्द निदान करना होगा. पर इसके लिये पहले से संचालित हेल्पलाइन नंबरों और सेवा केंद्रों का ही पूरा यूज नहीं किया जा पा रहा है.
नेपाल हाउस, डोरंडा में सीएम किसान राहत हेल्पलाइन सेवा पहले से चल रही है. यहां दर्ज होने वाली समस्याओं का समाधान पूरी तरह हो रहा है या नहीं, इसे देखने में गंभीरता नहीं दिखती. इसी तरह डीसी ऑफिस, रांची में चल रहा किसान हेल्प डेस्क अब हेल्पलेस होकर आखिरी सांसें गिनने की कगार पर आ चुका है.
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डीसी लेवल पर शिकायतें ज्यादा
राज्य में मुख्यमंत्री किसान राहत हेल्पलाइन सेवा अप्रैल 2017 से शुरु की गयी थी. यह अब भी सातों दिन काम करता है. कोई भी किसान 0651-2490542 और 7632996429 पर संपर्क करके अपनी कंप्लेन दर्ज कराकर इसका लाभ ले सकता है. हेल्पलाइन में आने वाली शिकायतों के आंकड़ों की मानें तो किसानों को सबसे अधिक परेशानी डीसी स्तर पर हो रही है.
किसी दूसरे विभाग की बजाये लोकल एडमिनिस्ट्रेटिव स्तर पर अधिक परेशानियां उठानी पड़ रही हैं. ऐसे केस जिनमें लॉ एंड ऑर्डर का मसला हो, किसी दूसरे के द्वारा जबर्दस्ती खेत जुताई का केस हो, पारिवारिक संपत्ति या जमीन विवाद संबंधी विवाद हो या पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिलने में समस्या आ रही हो, इसके निदान के लिये डीसी के ही पास मामला फंसा हुआ दिखता है.
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7000 में से 2000 केस डीसी के पास पेंडिंग
झारखंड के किसान बैंक लोन, भुखमरी से ज्यादा प्रशासनिक स्तर पर सहयोग नहीं मिलने से परेशान हैं. पिछले 3 सालों में हेल्पलाइन में सबसे अधिक शिकायतें डीसी के खिलाफ ही दर्ज हुई हैं. 23 जुलाई 2020 तक के कॉल रिकॉर्ड के अनुसार राज्य के सभी 24 जिलों से 7000 से भी अधिक लोगों ने हेल्पलाइन में कंप्लेन दर्ज कराया है.
इनमें से लगभग 2000 ऐसे मामले हैं जिस पर फाइनली डीसी को ही डिसीजन लेना है. हालांकि इनमें से आधे केस में समाधान किये जाने की खबर है. 200 मामले ऐसे हैं जिनमें शिकायतकर्ता ने स्थानीय प्रशासन से मदद नहीं मिलने पर दोबारा शिकायत दर्ज करायी है.
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नौ सालों से किसान हेल्प डेस्क की नहीं बजी घंटी
डीसी ऑफिस, रांची में संचालित किसान हेल्प डेस्क बदहाल है. 7 सितंबर, 2009 को इसे यहां खोला गया था. इसका उपयोग किसान कर सकें, इसके लिए हेल्प डेस्क में एक टेलिफोनिक कनेक्शन दिया गया था. 0651-2217223 पर कोई भी फोन करके केसीसी संबंधी परामर्श या फिर सरकार की किसान संबंधी स्कीम के बारे में जानकारी ले सकता था.
लाभुकों का रिकॉर्ड रखने और अन्य कामों के लिए एक कंप्यूटर, प्रिंटर की भी व्यवस्था थी. 2011 में टेलीफोन बिल नहीं चुकाये जाने के कारण यहां फोन की घंटी यहां नौ सालों से नहीं बज रही. एक कंप्यूटर था जो पिछले दो सालों से बेकार होकर बंद पड़ा है. अब स्थिति यह है कि यहां दो स्टाफ आते हैं, दिन भर खाली बैठे रहने के बाद शाम को निकल जाते हैं.




