
New Delhi: वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन के जरिये दावा किया है कि अगर भारत में कुपोषण और मोटापे के खिलाफ काम किया जाए तो इसका सीधा असर टाइप-2 डायबिटीज पर भी पड़ेगा. अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि इसके जरिये देश में टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों के इलाज में सुधार किए जा सकते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन बी-12 की कमी की वजह से एमओडी काफी तेजी से बढ़ रहा है. स्वीडन में हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दिखाया कि डायबिटीज को पांच उप समूहों में विभाजित कर सकते हैं. साथ ही इनमें से चार उपसमूहों के बीच आनुवंशिक अंतर है. द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथ ईस्ट एशिया जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में पुष्टि हुई है कि पश्चिमी राज्यों के डायबिटीज के रोगियों से मिलती वर्गीकरण प्रणाली का पता चला है.




