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Analysis: कुपोषण और मोटापा रोकने से डायबिटीज का खतरा कम, रोगियों पर किया गया विश्लेषण

New Delhi: वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन के जरिये दावा किया है कि अगर भारत में कुपोषण और मोटापे के खिलाफ काम किया जाए तो इसका सीधा असर टाइप-2 डायबिटीज पर भी पड़ेगा. अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि इसके जरिये देश में टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों के इलाज में सुधार किए जा सकते हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन बी-12 की कमी की वजह से एमओडी काफी तेजी से बढ़ रहा है. स्वीडन में हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दिखाया कि डायबिटीज को पांच उप समूहों में विभाजित कर सकते हैं. साथ ही इनमें से चार उपसमूहों के बीच आनुवंशिक अंतर है. द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथ ईस्ट एशिया जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में पुष्टि हुई है कि पश्चिमी राज्यों के डायबिटीज के रोगियों से मिलती वर्गीकरण प्रणाली का पता चला है.

 2,217 मरीजों की जांच की गई

प्रोफेसर रश्मी प्रसाद ने कहा, अध्ययन के दौरान 2,217 मरीजों की जांच की गई थी. अध्ययन भारत और यूरोप में टाइप-2 डायबिटीज के विभिन्न रूपों के बीच अनुवांशिक समानता और अंतर को उजागर करता है. उन्होंने बताया कि उनका यह अध्ययन पश्चिमी भारत में 821 मरीजों पर आनुवंशिक जोखिम स्कोर विश्लेषण (जीआरएस) पर आधारित हैं।हम इसे भारत में टाइप-2 डायबिटीज को लेकर एक रोमांचक नए कदम के रूप में देखते हैं.

47 फीसदी भारतीय मरीजों में एसआईडीडी

अध्ययन में 47 फीसदी भारतीय मरीजों में इंसुलिन की कमी वाला डायबिटीज यानी एसआईडीडी मिला है. यह डायबिटीज का ऐसा प्रकार है जो रोगी में देरी से अपना प्रभाव  दिखाता है. प्रसाद का कहना है कि प्रारंभिक जीवन में भारतीयों में कुपोषण टाइप-2 डायबिटीज की एक बड़ी वजह हो सकती है

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