
सात साल काम कर चुके प्राचार्यों को मिलता है डीडीओ का पद
राज्य में लंबे समय में शिक्षकों की प्रोन्नति नहीं होना डीडीओ पदों के समाप्त करने का बना मुख्य कारण
Ranchi: स्कूलों की व्यवस्था में सुधार करने के लिये राज्य सरकार नये-नये नियम लागू कर रही है. इसके तहत 2019 में डीडीओ निकासी और व्ययन अधिकारी पद को समाप्त करने की योजना बनायी गयी है.
इसकी जानकारी खुद स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग के वरीय अधिकारियों से मिली.अमूमन डीडीओ ब्लॉक या ब्लॉक स्तर पर स्कूलों की संख्या के अनुसार रहते हैं.
जिनका मुख्य कार्य शिक्षकों का वेतन भुगतान करना है. 2019 के पहले तक राज्य में 29,000 डीडीओ थे. लेकिन वर्तमान में मात्र तीन हजार हैं.
इनमें से कई डीडीओ अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं. जिससे शिक्षकों के वेतन भुगतान में देर हो रही है. अधिकारियों से ही जानकारी मिली कि सरकार की योजना है कि डीडीओ पदों को समाप्त करना. इसकी शुरूआत कर दी गयी है. आने वाले समय में इसमें और भी परिवर्तन किये जायेंगे.
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बिना तैयारी के समाप्त किये जा रहे पद
स्कूली शिक्षा साक्षरता विभाग की ओर से उर्दू शिक्षकों के वेतन का भुगतान जिला शिक्षा अधीक्षकों के हवाले से किया जा रहा है. जिससे वेतन भुगतान में बीस से पचीस दिनों की देर हो रही है. जबकि अन्य शिक्षकों के वेतन का भुगतान डीडीओ के माध्यम से किया जा रहा है.
ऐसे में न ही अन्य विषयों के शिक्षकों को समय से वेतन मिल पा रहा और न ही उर्दू शिक्षकों को. जिससे शिक्षकों की समस्या बढ़ती जा रही है. वहीं शैक्षणिक कार्यों का डिजिटलाइजेशन भी इसका एक प्रमुख कारण है.
लेकिन कुछ डीडीओ ने बताया कि इसके लिये विभाग को पहले पूर्ण तैयारी कर लेनी चाहिये. कई स्कूलों में शिक्षकों को प्रभारी प्राचार्य होना या प्राचार्यों की सेवानिवृत्ति भी इसका मुख्य कारण है.
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अतिरिक्त प्रभार में काम कर रहे डीडीओ
कई डीडीओ से बात करने से जानकारी हुई कि वे अतिरिक्त प्रभार में कार्यरत हैं. जिससे काम अधिक हो जाता है. आमतौर पर डीडीओ वैसे प्राचार्यों को बनाया जाता है जो सात साल तक प्राचार्य पद पर कार्यरत रहते हैं.
ऐसे में इन डीडीओ के ऊपर स्कूली कार्य के साथ अपने क्षेत्र में आनेवाले शिक्षकों के वेतन भुगतान से संबंधित भी कार्य करने पड़ रहे हैं. कुछ डीडीओ ने बताया कि लंबे समय से सरकारी शिक्षकों की प्रोन्नति रूकी हुई है. लगभग बीस सालों से.
ऐसे में जो सहायक शिक्षक हैं वो प्राचार्य नहीं बन रहे और कई तो सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं. राज्य में प्राचार्यों की काफी कमी है. जिसके कारण भी डीडीओ पद समाप्त किये जा रहे हैं.
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