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जिस भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों के आवासों के लिए अमित शाह ने किया था भूमि पूजन, वहां एक ईंट भी नहीं जोड़ी जा सकी है

गांव के सभी बोरिंग सूख गये हैं.  ग्रामीणों को पेयजल के लिए पंरपरागत जल स्रोतों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है. रोजगार की तलाश में उलिहातू के कई युवा पलायन कर चुके हैं.

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Pravin kumar

Ranchi : 17 सितंबर 2017 को रांची से लेकर खूंटी के उलिहातू तक भगवा लहरा रहा था. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के गांव उलिहातू पहुंचे थे. वहां  उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के परपोते सुखराम मुंडा के आंगन में शहीद ग्राम विकास अंतर्गत आवास योजना का भूमि पूजन किया था.

17 सितंबर 2019 को दो साल हो जायेंगे, लेकिन अब तक एक ईट भी नहीं जोड़ी जा सकी है. गांव के सभी बोरिंग सूख गये हैं.  ग्रामीणों को पेयजल के लिए पंरपरागत जल स्रोतों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है. रोजगार की तलाश में उलिहातू के कई युवा पलायन भी कर चुके हैं.

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क्या थी शहीदों के गांवों की आवास योजना

कल्याण विभाग की योजना है कि राज्य के शहीदों के गांवों में आवास बनाकर दिया जायेगा. सरकार की योजना के मुताबिक, कल्याण विभाग की तरफ से झारखंड में आठ शहीदों के गांव के लिए शहीदों के नाम पर आवास योजना की शुरुआत की गयी, जिसमें सबसे पहला नाम उलिहातू का है.योजना की शुरुआत बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने उलिहातू से की.

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दरअसल योजना के मुताबिक 8बाय 9 फीट के दो कमरे, 6 बाय 6.6 फीट का एक किचन, 7 बाय 6.6 फीट का एक बरामदा, 4 बाय 4 का बाथरूम और 4 बाय 3 फीट का (Water Closet) यानी ट्वॉयलेट वाला एक मॉडल मकान बनाकर दिया जाना था.  कल्याण विभाग की तरफ से इस योजना के तहत उलिहातू में 136 आवास बनने थे. इन आवासों को गांववालों के बीच बांटना था.

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शहीदों के गांवों की आवास योजना का क्यों किया था उलिहातू के ग्रामीणों ने विरोध

गांववालों ने इस मॉडल का विरोध किया. उनका कहना है कि इतने छोटे-छोटे मकान कबूतरखाने की तरह हैं. उन्हें दो कमरे का 15 गुना 12 फीट कमरेवाला मकान चाहिए. इस बात को लेकर उलिहातू गांव में कई बार ग्राम सभा हुई. ग्राम सभा में प्रशासन की तरफ से भी अधिकारी पहुंचे. अब जाकर काफी मनुहार के बाद गांव के लोग आवास योजना पर सहमत हुए . बिरसा मुंडा के परपोते सुखराम मुंडा कहते हैं कि आवास बनने की सहमति गांव वाले दे चुके हैं, लेकिन पानी की कमी के कारण आवासों नहीं बन रहे हैं.

बिरसा मुंडा के परपोते सुखराम मुंडा ने नेताओं की घोषणा को लेकर क्या कहा

बिरसा मुंडा के परपोते सुखराम मुंडा कहते हैं  कि गांव में राजनेता बड़ी-बड़ी बातें कह कर जाते हैं,  लेकिन किये गये वादे पूरे होते हैं,  यह नहीं कोई देखता है. गांव को अब तक रोशनी, पेयजल, संड़क ,बैंक जैसी सुविधा से जोड़ा गया है. लेकिन स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर सिर्फ गांव में भवन ही बना हुआ है.  यहां महीने में एक बार ही चिकित्सक आते हैं. गांव के लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. हालांकि  पाइप के जरिये गांव के सभी टोलों को जोड़ा जा चुका है,  लेकिन उलिहातू के सभी चार टोलों के बोरिंग सूख चुके हैं,  इस कारण ग्रामीणों को पेयजल के लिए अपने पंरपारगत जल स्रोतों पर फिर से निर्भर होना पड़ा है.

सुखराम मुंडा कहते हैं कि एक महीने से अधिक समय हो चुका है खूंटी उपायुक्त को सूचना दिये हुए, लेकिन गांव में पेयजल की समस्या का हल अभी तक नहीं हो सका है. गांव में रोजगार के साधन नहीं होने के कारण कई ग्रामीण गांव से पलायन कर चुके हैं. सुखराम मुंडा आगे कहते हैं कि शहीदों के गांवों की आवास योजना  के तहत सरकार ने 15 बाय 12 का कमरा बना कर देने  की ग्रामीणों की मांग सरकार ने नहीं मानी.

ग्रामीण और जिला प्रशासन के बीच आवास योजना को लेकर गतिरोध जनवरी-फरवरी में समाप्त हुआ.  इसके बाद लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण काम शुरू नहीं किया जा सका. चुनाव परिणाम आने के बाद काम शुरू करने की तैयारी थी, लेकिन पानी के अभाव के कारण अब भी काम शुरू नहीं किया जा सका है.

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