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पलामू की लाइफ लाइन कोयल नदी में डंप होते हैं मरे हुए जानवर, जिम्मेवार मौन

Palamu: पलामू की लाइफ लाइन कोयल नदी है. इस नदी के किनारे मेदिनीनगर शहर बसा है. शहरी क्षेत्र की बड़ी आबादी हर तरह से इस नदी पर निर्भर है, लेकिन हाल के दिनों में इस नदी के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. इस नदी को उसके मूल उद्देश्य से हटाकर गंदगी का डंप यार्ड बनाकर रख दिया गया है.

नालों की गंदगी और कचरे के बाद मरे हुए मवेशी होते हैं डंप

कल तक इस नदी के किनारे गंदे नाले के पानी और शहर से निकलने वाले कचरे को गिराया जाता था, लेकिन हाल के दिनों इस नदी के बीचोबीच मरे हुए पालतू जानवरों के शवों को फेंका जा रहा है.

इससे वायु के साथ-साथ जल प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है. दिन के उजाले में बड़े आसानी से कोयल पुल से मरे हुए मवेशियों को नीचे गिराया जा रहा है.

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आने लगी है दुर्गंध

मवेशियों को फेंके जाने से नदी का पानी जहां प्रदूषित हो रहा है, वहीं दुर्गंध फैलने से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है. जिस जगह पर मवेशियों को गिराया जाता है, उससे महज सौ मीटर की दूरी पर ओपेन जिम है.

यहां सुबह और शाम बड़ी संख्या में हर उम्र के लोग एक्सरसाइज के लिए पहुंचते हैं. लेकिन दुर्गंध फैलने से अच्छी सेहत के लिए यहां पहुंचने वाले लोग बीमार पड़ने की स्थिति में पहुंच गये हैं.

जिम्मेवार साधे हैं मौन

पिछले एक सप्ताह से मवेशियों के शव पानी में पड़े-पड़े सड़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेवार मौन साधे हुए हैं. कोयल नदी और उससे सटे इलाके मेदिनीनगर नगर निगम क्षेत्र में आते हैं. लेकिन इन मवेशियों के शव को नदी से हटाने में निगम प्रशासन कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा.

रेलिंग की मरम्मत कर ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की दिशा में भी ठोस पहल नहीं हो पाती. निगम के कर्मी कभी मॉनिटरिंग करने तक नहीं आते. शहर में क्या क्या हो रहा है? नदी नालों की स्थिति कैसी है, इसपर धयान नहीं दिया जाता.

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कार्रवाई नहीं होने के कारण डंप होते हैं मरे हुए मवेशी

दरअसल, ऐसी स्थिति नगर निगम के सुस्त रवैये से बनी है. शहरी क्षेत्र में जब भी कोई पालतू मवेशी मर जाते हैं तो उसे रखने वाले बड़े आराम से मवेशियों के शव को कोयल पुल पर भेजवा देते हैं और वहीं से उसे नदी में गिरा दिया जाता है.

पुल की रेलिंग क्षतिग्रस्त, फेंकने में होती है आसानी

मवेशियों को कोयल नदी पुल से गिराने में बड़ी आसानी होती है. पिछले दिनों दुर्घटना के बाद पुल की रेलिंग का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त है. छह महीने बीत जाने के बाद भी क्षतिग्रस्त रेलिंग की मरम्मत नहीं की गयी है.

ऐसे में मवेशियों के शव लाने के बाद बड़े आराम से उसे टूटी रेलिंग से नीचे गिरा दिया जाता है. विदित हो कि पूरे देश में दिनों स्वच्छता पखवाड़ा चल रहा है. सफाई अभियान चलाने के साथ-साथ साफ सफाई के महत्व बताये जा रहे हैं.

लेकिन पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर में ऐसी स्थिति देखकर लगता है कि यह अभियान सिर्फ फोटो खिंचवाने और कागजों तक ही सिमट कर रह गया है.

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