
Ranchi: राज्य के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल रिम्स में प्रबंधन व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे कर रहा है. वहीं हर तरह की मशीनें लगाई जा रही है जिससे कि मरीजों को इलाज से लेकर जांच के लिए कहीं और जाने की जरूरत ही न पड़े. लेकिन प्राइवेट लैब के एजेंट बिना किसी रोक टोक रिम्स में घूम रहे है. इतना ही नहीं मरीजों को पकड़कर उनका खून निकाल ले रहे है यह कहकर कि वे रिपोर्ट जल्दी दिला देंगे. इस बीच मरीजों की परेशानी तो कम नहीं हुई है. इसके उलट प्राइवेट लैब के एजेंट बंपर कमाई कर रहे है. इसके बावजूद न तो ड्यूटी में तैनात होम गार्ड इन्हें रोक पा रहे है और न ही अधिकारियों की नजर इसपर है.
एक ही कैंपस में दो नियम
हॉस्पिटल की मेन बिल्डिंग में जहां दलालों का दबदबा कायम है. डॉक्टर भी बाहर के लैब की रिपोर्ट देखकर दवाएं लिख रहे है. वहीं सुपरस्पेशियलिटी बिल्डिंग में डॉक्टरों ने आदेश जारी कर दिया है. जिसमें डॉक्टरों ने कहा है कि इलाज के लिए केवल रिम्स के लैब की ही रिपोर्ट मान्य होगी. चाहे वह किसी भी तरह के टेस्ट हो. टेस्ट नहीं होने की स्थिति में बाहर से टेस्ट कराया जा सकता है. ऐसे में साफ है कि एक ही कैंपस में दो तरह के नियम है. मेन बिल्डिंग में डॉक्टर किसी भी रिपोर्ट को मान ले रहे है. जबकि सुपरस्पेशियलिटी में केवल रिम्स की रिपोर्ट वैलिड है.
इनडोर में 1500 मरीज रहते है एडमिट
हॉस्पिटल के ओपीडी में हर दिन 2000 से अधिक मरीज इलाज को पहुंचते है. वहीं इनडोर में भी एडमिट मरीजों की संख्या 1500 से अधिक रहती है. ऐसे में जाहिर है कि रिम्स में मरीजों का लोड होगा. इसी का फायदा उठाकर प्राइवेट लैब के एजेंट मरीजों को फंसा रहे है. मनमाना चार्ज वसूल रहे है और रिपोर्ट भी टाइम से नहीं मिल पाती.
कैंपस में लगी है 5 करोड़ की टेस्ट मशीन
हॉस्पिटल के कैंपस में ही सेंट्रल लैब को हाइटेक बनाया गया है. जहां पर पांच करोड़ की आटोमैटिक टेस्टिंग मशीन लगाई गई है. जिसमें 24 घंटे में 10 हजार सैंपल टेस्ट करने की कैपेसिटी है. फिर भी प्राइवेट लैब के एजेंट रिम्स पर हावी है. जिससे साफ है कि कहीं न कहीं डॉक्टर, स्टाफ की मिली भगत से भी यह खेल चल रहा है.
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