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जहरीली शराब से 7 की मौत के बाद पुलिस हुई रेस, शराब माफियाओं की तलाश जारी

30 सितंबर को जहरीली शराब पीने से हुई थी सात लोगों की मौत    

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Ranchi : जहरीली शराब पीने से हुई सात लोगों के मौत के बाद रांची पुलिस शराब के बड़े माफियाओं की तलाश कर रही है .झारखंड सरकार अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए खुद राज्यभर में दुकानें चला रही है. इसके बावजूद राजधानी रांची में अवैध शराब का अवैध धंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा. रांची में शराब की अवैध रूप से बिक्री ही नहीं हो रही है, बल्कि शहर के विभिन्न इलाकों में बनाया भी जा रहा है.

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हरिओम साहू के गिरफ्तारी के बाद मिलेगी जानकारी

हातमा बस्ती में हुए शराबकांड में अभी तक चंदवे के संतोष साहू, सोना राम, मोना राम, कांके होचर के हरिओम साहू, विजय साहू के नाम सामने आए हैं.लेकिन ये सभी शराब के छोटे कारोबारी है. लेकिन पुलिस को शक है इन सब के पीछे कोई बड़ा शराब माफिया है. हरिओम साहू की गिरफ्तारी के बाद इस कांड की जांच में तेजी आएगी. राज्य के सबसे बड़े शराब तस्कर सिंघानिया पिछले साल जहरीली शराब से हुई 22 लोगों की मौत के बाद गिरफ्तार हुआ था. उसे अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है.

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शहर के बाहरी इलाकों में बनाते है अवैध शराब

अवैध शराब के कारोबारियों ने शराब का कारोबार करने के लिए शहर के बाहरी इलाकों को अपना अड्डा बनाया है. इन इलाकों राजधानी के वैसे इलाके शामिल हैं जहां पर लोगों का आना जाना कम होता है. इन इलाकों में शराब कारोबारी ने अपनी डंपिंग यार्ड भी बना रखी है. समय-समय पर पुलिस इस इलाके में छापेमारी करती है तो अवैध शराब की खेप भी बरामद की जाती है. लेकिन आजतक छापेमारी में उन ठिकानों से कोई कारोबारी गिरफ्तार नहीं हुआ है. क्योंकि पुलिस के आने की सूचना उन्हें पहले ही मिल जाती है.

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इन इलाकों में बनता है शराब

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शराब कारोबारी पुलिस के अनुसार कांके, नगड़ी, पिठोरिया, चंदवे, होचर, खटंगा, हेथू, विद्यानगर हरमू, ओरमांझी और धुर्वा के आसपास इलाकों में अवैध रूप से शराब बनाने का काम करते है. वहां से शराब की सप्लाई शहर के छोटे-छोटे बस्तियों में किया जाता है. खासकर रिंग रोड से सटे इलाके शराब कारोबारियों के लिए काफी सुरक्षित मानी जाती है. बाहर राज्यों से इन इलाकों में शराब को लाकर जमा किया जाता है और फिर धीरे-धीरे उसे राजधानी के अलग-अलग इलाकों में पहुंचा दिया जाता है.

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 कबाड़ी वाले पहुंचाते हैं अवैध शराब

शहर के अड्डों तक अवैध शराब पहुंचाने के लिए माफिया बड़ी गाड़ियों का सहारा नहीं लेते हैं. वे फेरी वाले और कबाड़ी वाले के जरिए अवैध शराब की खेप अड्डों तक पहुंचाते हैं. क्योंकि इन लोगों पर पुलिस को शक नहीं होगा और आसानी से खेप संबंधित ठिकानों तक पहुंच जाती है. बताया जाता है कि शराब की खेप पहुंचाने के एवज में माफिया उन्हें अच्छी रकम भी देते हैं. रांची पुलिस अब वैसे लोगों की भी जांच करने की तैयारी कर रही है.

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 ब्रांडेड शराब का बनता है लेबल

रांची पुलिस ने महंगी और ब्रांडेड शराब का लेबल बनाने वालों की तलाश शुरू कर दी है. इसके लिए पुलिस गुप्तचरों की भी मदद ले रही है. अवैध रूप से लेबल बनाने वालों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेजेगी. पुलिस की जांच में रांची के कई इलाकों में महंगी और ब्रांडेड शराब का लेबल बनाने की बात सामने आ रही है.

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