Opinion

कर्नाटक व गोवा के बाद अब झारखंड में “शुद्धिकरण” की बारी !

Surjit Singh

Jharkhand Rai

पिछले कुछ सालों में देश की राजनीति में “शुद्धिकरण” शब्द की चर्चा खूब होती है. इसका अर्थ यह होता है कि जब तक कोई राजनेता, सांसद या विधायक विपक्ष में है.

तब तक वह घपलेबाज है, परिवारवाद करता है, देश को तोड़ने वाली बात करता है. लेकिन जैसे ही वह राजनेता खास दल से जुड़ जाता है. पूरी तरह शुद्ध हो जाता है. राजनीतिक हलकों में इस पूरी प्रक्रिया को “शुद्धिकरण” कहा जाता है.

खैर यह “शुद्धिकरण” सही है. गलत है. नैतिक है. अनैतिक है. यही राजनीति की रीत है. इस पर चर्चा फिर कभी. फिलहाल, चर्चा कर्नाटक और गोवा के बाद झारखंड की.

Samford

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पिछले एक सप्ताह से कर्नाटक की राजनीति में हंगामा मचा हुआ है. कांग्रेस-जेडीएस सरकार संकट में है. कांग्रेस के 13 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं. कुछ का इस्तीफा स्वीकार हो चुका है. कुछ को नोटिस किया गया है.

बागी विधायकों की तस्वीर अखबारों में छप रही है. जिसमें वे होटल के हॉल में योगा करते दिख रहे हैं. यह संदेश हैं, उनके “शुद्धिकरण” का.

इस बीच 11 जुलाई को अखबारों में खबर है कि गोवा कांग्रेस में भी फूट पड़ गयी है. कांग्रेस के 10 विधायक अचानक विधानसभा अध्यक्ष के पास पहुंचे औऱ भाजपा में शामिल होने की जानकारी दी. 40 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 15 विधायक थे. अब सिर्फ पांच बचे हैं.

अब बात झारखंड की. राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा शुरु हो गयी है कि कर्नाटक व गोवा के बाद अब झारखंड की बारी है. झारखंड में भी “शुद्धिकरण” का दौर जल्द ही शुरु होगा. चुनाव के पहले झामुमो और कांग्रेस में टूट की आशंका व्यक्त की जाने लगी है. इसके लिये कोशिशें शुरु हो गयी हैं.

रिश्ते, पावर, पैसे, संबंध सभी हथियारों का इस्तेमाल होना तय है. और जिन्हें अपने विधायकों को टूटने से बचाना है, वह शायद अपने हालात से वाकिफ ही नहीं है. इस कारण अपने चाल-चलन में बदलाव करना ही नहीं चाहते.

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विपक्षी दलों के हालात यह हैं कि, उनके विधायकों को अपने नेता से बात करने तक के लिये भी पहले दूसरी जगहों पर संपर्क साधने पड़ते हैं. इससे विधायकों में जबरदस्त नाराजगी है. कुछ मिलाकर भाजपा के लिये झारखंड में खुला मैदान है और विपक्षी दल वॉक ओवर देने की तैयारी में है.

झारखंड में भाजपा और आजसू का गठबंधन सत्ता में है.भाजपा के 37 विधायक हैं. जेवीएम से टूट कर आये 6 विधायकों को जोड़ दें, तो यह संख्या 43 होती है.

भाजपा का स्पष्ट बहुमत है. आजसू के 5 विधायक थे, जिनमें से विकास मुंडा ने पार्टी छोड़ दी. चंद्र प्रकाश चौधरी विधायक से सांसद बन गये. जबकि लोहरदगा से आजसू के विधायक कमल किशोर भगत की सदस्यता रद्द कर दी गयी है.

ऐसे में आजसू के दो विधायक बचे हैं. विपक्षी दल झामुमो के 19 और छह विधायक टूटने के बाद जेवीएम के दो विधायक हैं. वहीं कांग्रेस के 8 विधायक हैं.

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