
Ranchi: झारखंड राज्य बार काउंसिल के सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलने पहुंचा, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी. सीएमओ की ओर से उन्हें सूचना दी गई कि अधिवक्ताओं का सीएम से मिलने का समय 7 जनवरी को निर्धारित किया गया है. इसके बाद काउंसिल की एक आपात बैठक हुई, जिसमें सीएम द्वारा अधिवक्ताओं की कमेटी से नहीं मिलने की निंदा की गई.
काउंसिल ने अपनी आपात बैठक में निर्णय लिया है कि राज्य के सभी अधिवक्ता 6 जनवरी से न्यायिक कार्य से अलग रहेंगे. इसके अलावा राज्य के सभी जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को 8 जनवरी को रांची में आयोजित बैठक में काउंसिल की ओर से बुलाया गया है . जिसमें आगे की रणनीति तय होगी. बैठक में कौंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्ण, उपाध्यक्ष राजेश शुक्ला के अलावा संजय विद्रोही, अमर कुमार सिंह, राधेश्याम गोस्वामी, एके रसीदी, प्रशांत कुमार सिंह, बालेश्वर प्रसाद सिंह, कुंदन प्रकाशन, परमेश्वर मंडल, हेमंत सिकरवार, मृत्युंजय कुमार श्रीवास्तव, प्रयाग महतो, अनिल कुमार महतो सहित 18 काउंसिल के सदस्य उपस्थित थे.
इसे पहले सोमवार को काउंसिल का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल रमेश बैस से मिला था. काउंसिल की ओर से राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौपा गया था.
काउंसिल ने राज्यपाल से मिलकर विधानसभा से पारित कोर्ट फी संशोधन विधेयक 2022 को राज्य सरकार द्वारा वापस लेने का आग्रह किया था. इसके अलावा एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, झारखंड में लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजक बार संघ के अनुभवी अधिवक्ताओं को बनाने, अन्य राज्यो की तरह झारखंड में अधिवक्ता कल्याणकारी योजनाओं के लिए बजटीय प्रावधान स्थापित करने, झारखंड में राज्य विधि आयोग के गठन का भी आग्रह किया था. राज्यपाल बैस ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वस्त किया था कि वे काउंसिल की भावनाओं का ख्याल रखेंगे.
इसे भी पढ़ें: सहायक टाउन प्लानर की नियुक्ति मामले में सुनवाई अब 11 जनवरी को




