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महाधिवक्ता अजित कुमार ने काले सरदार के भाई की जमीन की जमाबंदी रद्द कराने के लिए सरकार को दी गलत जानकारी, कोर्ट नाराज

-      सरयू राय ने सीएम को लिखी चिट्ठी कहा - पद से हटाएं

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Ranchi: खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को एक चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में उन्होंने कहा है कि एक बार फिर से झारखंड के महाधिवक्ता अजित कुमार ने सरकार को गलत जानकारी दी. गलत जानकारी की वजह से पूर्वी सिंहभूम के दलजीत सिंह (अमरप्रीत सिंह काले के बड़े भाई हैं, हाल ही में देखा गया था कि कैसे सीएम ने श्री काले को देखते ही एक मंच साझा नहीं किया था, वापस लौट गए थे) की जमीन की जमाबंदी रद्द कर दी गयी. मामले को लेकर दलजीत सिंह फिर से कोर्ट गए. कोर्ट को जब यह पता चला कि महाधिवक्ता अजित कुमार ने गलत जानकारी दी है, तो कोर्ट ने अपनी नाराजगी जाहिर की और मामले को लेकर शपथ पत्र देने को कहा. कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा से महाधिवक्ता अजित कुमार ने सरकार को लिखा कि उनकी पुरानी जानकारी को नहीं माना जाए. उस पत्र को रद्द कर दिया जाए. अजित कुमार के सरकार को पत्र लिखे जाने के बाद सरकार ने भू-राजस्व विभाग और उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम को अजित कुमार की दी गयी जानकारी को रद्द मानने की चिट्ठी भेजी गयी.

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पहला मामला नहीं, सरकार उन्हें पद से हटाए : सरयू राय

मंत्री सरयू राय ने सीएम को लिखे अपनी चिट्ठी में कहा है कि दोबारा ऐसा हुआ है, जब महाधिवक्ता अजित कुमार ने सरकार को कोर्ट के आदेश की गलत जानकारी दी है. इससे पहले हाल ही में अजित कुमार ने कोर्ट को खनन विभाग से जुड़ी एक गलत जानकारी दी थी. कोर्ट में महाधिवक्ता ने यह कह दिया था कि शाह ब्रादर्स और मेसर्स निर्मल कुमार एवं प्रदीप कुमार से अवैध उत्खनन करने के कारण उनपर लगाए गए 250 करोड़ के बकाया अर्थ दंड को 20 किस्तों में करने का निर्णय हो गया है. जबकि विभाग ने कहा है कि 20 किस्तों में अर्थ दंड वसूलने पर कोई सहमति नहीं दी गई है. उन्होंने लिखा है कि प्रासंगिक मामले में महाधिवक्ता के साथ ही चाईबासा के डीएमओ की संलिप्तता सामने आई है.

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महाधिवक्ता ने कहा कोर्ट ने दिया है मौखिक आदेश, लेकिन ऐसा हुआ ही नहीं था

झारखंड हाईकोर्ट में चल रहे टाटा स्टील लिमिटेड बनाम झारखंड सरकार एवं अन्य के मामले में महाधिवक्ता ने कोर्ट के संबंध में गलत सूचना राज्य सरकार को दी. अपने पत्रांक 6777 और दिनांक 4 जुलाई 2017 को महाधिवक्ता ने राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव और पूर्वी सिंहभूम जिला के उपायुक्त को जानकारी दी कि हाई कोर्ट ने मौखिक आदेश दिया है, जो कि बाद में गलत पाया गया. महाधिवक्ता अजीत कुमार ने अपने पत्र में कहा कि कोर्ट ने मौखिक रूप से मामले में कहा है कि राज्य सरकार इस मामले में सुधारात्मक निर्देश या जरूरी किसी भी तरह का आदेश दे सकती है या कार्रवाई कर सकती है. जो कि बाद में गलत पाया गया. महाधिवक्ता की इस जानकारी के आलोक में राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को निर्देश दिया कि वह जरूरी कार्रवाई करें. निर्देश के बाद दलजीत सिंह की जमीन की जमाबंदी रद्द कर दी गई.

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हाईकोर्ट नाराज, शपथ पत्र देने को कहा

मामले की सुनवाई के वक्त दलजीत सिंह के वकील ने हाईकोर्ट का ध्यान राज्य के महाधिवक्ता की जानकारी, जो उन्होंने राज्य सरकार को दी थी उस ओर आकृष्ट कराया. बताया कि कैसे महाधिवक्ता अजीत कुमार ने राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग को गलत सूचना दी है. इसपर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस पर नाराजगी जताई और शपथ पत्र देने का आदेश दिया. जिसके बाद महाधिवक्ता अजीत कुमार ने अपने पत्रांक 3931 और दिनांक 26 अप्रैल 2018 में सरकार को लिखा कि उन्होने पहले जो जानकारी दी थी उसे विलोपित किया जाए.

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क्या है पूरा मामला

दलजीत सिंह ने जमशेदपुर के सर्किट हाउस एरिया में करीब 5 एकड़ जमीन 90 के दशक में खरीदी थी. इस जमीन पर टाटा स्टील लिमिटेड के साथ विवाद था. विवाद यह था कि जमीन रैयती है या टाटा की लीज वाली जमीन है. इस मामले में बिहार सरकार और 2012 तक झारखंड सरकार का यह मत रहा है कि यह जमीन रैयती है. इस मुकदमे में बिहार सरकार और बाद में झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र भी दायर किया है. 2012 में हाईकोर्ट का फैसला टाटा स्टील लिमिटेड के विरोध में आया. इसके बाद टाटा स्टील ने झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ के सामने इसकी अपील की. अपील में पहले दिए गए फैसले को बहाल रखने को कहा गया. कोर्ट के निर्णय के बाद सरकार ने जमीन की जमाबंदी दलजीत सिंह के पक्ष में करने का निर्देश दिया. इसी बीच किसी मुंशी रजक नाम से एक बेनामी आवेदन सचिव राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग को आया. हालांकि मुंशी रजक नाम का व्यक्ति कौन है ? कहां रहता है? उसका कोई अता-पता नहीं चला. आवेदन पूरी तरह से बेनामी थी, फिर भी विभाग ने इस पर उपायुक्त से मंतव्य मांगा. उपायुक्त बदल जाने के बाद राज्य सरकार ने फिर से उपायुक्त से मंतव्य मांगा. जवाब में उपायुक्त ने उन छह त्रुटियों का हवाला दिया, जिसे पहले ही सुनवाई के दौरान खारिज कर दिया गया था.

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सरकार ने दोबारा से उपायुक्त से हस्तक्षेप याचिका डालने को कहा. मामले पर जब हाईकोर्ट में सरकार के स्टैंडिंग कॉन्सिल विकास कुमार से राय ली. विकास कुमार ने हस्तक्षेप याचिका दायर करने से मना किया. लेकिन उनकी बात को दरकिनार करते हुए उपायुक्त ने हस्तक्षेप याचिका दायर की, जो विचाराधीन है. बावजूद इसके महाधिवक्ता अजीत कुमार राज्य सरकार की ओर से इस मुकदमे में लगातार बहस कर रहे हैं. इसी बहस के दौरान उन्होंने 4 जुलाई 2017 को हाईकोर्ट के उस मौखिक आदेश के बारे में राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग को गलत सूचना दी, जो आदेश न्यायालय ने दिए ही नहीं थे.

कौन है दलजीत सिंह 

दलजीत सिंह अमरप्रीत सिंह काले के बड़े भाई हैं. अमरप्रीत सिंह जमशेदपुर के एक बड़े व्यवसायी और एक चर्चित नाम है. उन्हें काले सरदार के नाम से भी जाना जाता है. काले सरदार को पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का काफी करीबी माना जाता है. ऐसी चर्चा होते रहती है कि काले की सरकार से फिलवक्त बन नहीं रही है. दुर्गा पूजा के मौके पर मुख्यमंत्री रघुवर दास जमशेदपुर पहुंचे थे. सभी पंडालों में घूमते हुए वो उस पंडाल के मंच पर पहुंचे जहां काले सरदार पहले से ही मौजूद थे. काले सरदार को मंच पर देखते ही सीएम ने मंच पर एक मिनट भी रुकना नहीं चाहा. वे फौरन मंच से उतर गए और अपने काफिले के साथ वहां से रवाना हो गए. इस पूरे वाक्ये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.

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