न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

आदिवासी बालिका छात्रावास : शौचालय-स्नानघर में दरवाजा नहीं, पीने को पानी नहीं, बेटियों को ऐसे बचा और पढ़ा रही है सरकार

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा जपनेवाली राज्य सरकार का कल्याण विभाग करता है आदिवासी बालिका छात्रावास का संचालन, आदिवासी कल्याण आयुक्त ने कहा- स्थिति की है जानकारी, जल्द ही शुरू होगी रिपेयरिंग, बढ़िया से किया जायेगा काम

178

Chhaya

eidbanner

Ranchi : बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा जपकर अपने मुंह मियां मिट्ठू बननेवाली राज्य की रघुवर सरकार राज्य की आदिवासी बेटियों को किस तरह बचा और पढ़ा रही है, इसका नजीर है रांची का आदिवासी बालिका छात्रावास. झारखंड सरकार के कल्याण विभाग की ओर से संचालित इस आदिवासी बालिका छात्रावास की जर्जर स्थिति की खबरें समय-समय पर प्रकाशित होती रही हैं. छात्रावास में रहनेवाली लड़कियों को पीने का पानी लाने के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है. परिसर में चार छात्रावास हैं, जहां जलापूर्ति की कोई समय-सीमा तय नहीं है. अन्य बुनियादी सुविधाएं भी जीर्ण-शीर्ण पड़ी हैं. इसके लिए अब तक ठोस पहल नहीं की गयी है. अब परिस्थिति ऐसी हो गयी है कि छात्राएं बालक छात्रावास से पानी ढोकर लाती हैं और इसी से अपना काम चला रही हैं. आदिवासी बालिका छात्रावास में सरना, आकांक्षा, दीपशिखा, भगीरथी नाम से चार छात्रावास हैं. सरना छात्रावास की छात्राओं ने बताया कि छात्रावास सौ बेड का है, जबकि छात्राएं वर्तमान में 65 हैं. एक सप्लाई नल के भरोसे पूरा हॉस्टल नहीं रह सकता. यही स्थिति दीपशिखा और आकांक्षा छात्रावास की भी है, जहां तीन सौ बेड का छात्रावास एक-एक सप्लाई नल के भरोसे चल रहा है. इन छात्राओं ने बताया कि मुसीबत पड़ने पर लड़कियों को बालक छात्रावास से पानी लाना पड़ता है. वीमेंस कॉलेज साइंस ब्लॉक में भी पानी की किल्लत सालों भर रहती है, जिससे छात्राओं को और भी परेशानी होती है.

दुपट्टे से पर्दा लगाकर नहाती हैं छात्राएं

छात्रावास के अंदर जब जायजा लिया गया, तो पाया गया कि शौचालय और स्नानघर में पर्दा लगा है. छात्राओं से इस विषय में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि पिछले कई सालों से छात्रावास की यही स्थिति है. कई बार वार्डेन से शिकायत की गयी कि शौचालय और स्नानघर के दरवाजे लगाये जायें, लेकिन इस पर कोई पहल नहीं की गयी. ऐसे में छात्राएं खुद ही दुपट्टा और चादर आदि से पर्दा लगाकर शौचालय जाती हैं और नहाती हैं. इससे वे खुद को काफी असुरक्षित महसूस करती हैं.

पैसा मिलाकर रसोई में लगा दी प्लास्टिक शीट

हॉस्टल निरीक्षण के दौरान जब रसोई घर देखा गया, तो रसोई की छत में काली प्लास्टिक शीट लगी मिली. छात्राओं ने बताया कि बरसात के दिनों में यहां पानी टपकता है, ऐसे में छात्राओं ने खुद ही पैसा मिलाकर प्लास्टिक शीट खरीदी और उसे रसोई की छत पर लगा दिया. साथ ही इन छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में पिछले तीन साल से रसोइया नहीं है, ऐसे में बारा-बारी से छात्राएं खुद ही खाना पकाती हैं. विशेष परेशानी परीक्षा के समय हो जाती है, जब परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ खाना बनाना पड़ता है. भगीरथी आदिवासी बालिका छात्रावास में पिछले कुछ दिन से रसोइया को रखा गया है, वह भी अखबारों में छपी छात्रावास की जर्जर स्थिति के बाद.

वार्डेन नहीं आतीं, शिकायत कर-करके थक गये

बात करने पर अधिकतर छात्राओं ने बताया, “कई सालों से रह रहे हैं, घर की स्थिति उतनी अच्छी नहीं, पर फिर भी पढ़ाई तो करनी है. ऐसे में आदिवासी छात्रावास में रहकर पढ़ना ही विकल्प है.” चार साल से छात्रावास में रह रही रिंकी टोप्पो ने बताया कि वह जब से छात्रावास आयी हैं, तब से स्थिति ऐसी ही है. सीमा कुमारी ने बताया कि कई बार वार्डेन को शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. छात्राओं ने कहा कि वार्डेन तो मुश्किल से तीन माह में एक बार आती हैं, ऐसे में छात्रावास की स्थिति से वह कैसे अवगत होंगी. कई बार वार्डेन से इस संबध में बात करने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया.

Related Posts

दर्द-ए-पारा शिक्षक: बूढ़ी मां घर चलाने के लिए चुनती है इमली और लाह के बीज, दूध और सब्जियां तो सपने जैसा

मानदेय से मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति की जाती है, इच्छाएं पूरी नहीं होती

डीपीआर तैयार नहीं, अगले माह से हो सकती है रिपेयरिंग : आदिवासी कल्याण आयुक्त

इस विषय में जब आदिवासी कल्याण आयुक्त गौरी शंकर मिंज से बात की गयी, तो उन्होंने बताया कि स्थिति की पूरी जानकारी पदाधिकारियों को है. छात्राओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेगी. काफी सवाल करने के बाद उन्होंने बताया कि शायद आनेवाले माह से रिपेरिंग का काम शुरू हो जायेगा. उन्होंने कहा कि छात्रावास रिपेयरिंग के लिए योजना तो बन गयी है, लेकिन डीपीआर तैयार नहीं है.

इसे भी पढ़ें- आरयू छात्रसंघ चुनाव : हथियारबंद लाव-लश्कर लेकर एबीवीपी की प्रत्याशी के समर्थन में कैंपस पहुंचे…

इसे भी पढ़ें- नमामि गंगे प्रोजेक्ट फेज-2 : 520 करोड़ की लागत से धनबाद और फुसरो में बनेगा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: