
Ravi/Deepak/ Pravin
Ranchi : झारखंड की रघुवर सरकार ने 2014-15 से लेकर 30 दिसंबर 2018 तक प्रचार-प्रसार में 530.69 करोड़ खर्च कर दिये हैं. इसका खुलासा सरकार की ही मध्यावधि फिस्कल रिपोर्ट में किया गया है. सरकार का ध्यान विकास पर कम और पब्लिसिटी पर ज्यादा है. मोमेंटम झारखंड के नाम पर सिर्फ रांची ही नहीं बल्कि देश के सभी प्रमुख हवाईअड्डों, रेलवे स्टेशन और महानगरों में पोस्टर-बैनर लगाकर निवेशकों को आमंत्रित करने की कोशिश की गयी. 3.10 लाख करोड़ के निवेश के लिए 210 एमओयू हुए थे, जिसमें 6 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार देने का वायदा किया गया था. 16 और 17 फरवरी 2017 में आयोजित इस कार्निवाल में सरकार ने 37 करोड़ सिर्फ प्रचार-प्रसार और होर्डिंग्स में खर्च कर दिया. मौके पर टाटा, आदित्य बिड़ला सरीखी कंपनियों के बड़े ओहदेदार आये. दो दिनों तक रांची में उद्योगपतियों का रेड कारपेट वेलकम किया गया. नतीजा फिसड्डी रहा.
पीआरडी में सबसे अधिक खर्च
सूचना और जनसंपर्क विभाग (पीआरडी) का खर्च दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है, वहीं केंद्रीय अनुदान और ग्रांट इन एड की राशि घटती जा रही है. चालू वित्तीय वर्ष में पीआरडी ने अब तक 76.22 प्रतिशत राशि खर्च कर ली है. वहीं 2017-18 में पीआरडी ने 89.34 प्रतिशत खर्च कर दिया है. पिछले चार साल में पीआरडी ने 530.69 करोड़ खर्च कर दिया है.
आधारभूत संरचना के क्षेत्र में हो रहा है कम काम
राज्य सरकार के लाख दावों के बावजूद आधारभूत संरचना के क्षेत्र जैसे बिजली, पानी, शिक्षा, खाद्य आपूर्ति, स्वास्थ्य और कृषि में खर्च का प्रतिशत पीआरडी के मुकाबले काफी कम है. वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार कृषि में बजट का 38.66 फीसदी, खाद्य आपूर्ति में 42.04 फीसदी, स्वास्थ्य में 59.66 और ऊर्जा विभाग में 32.27 फीसदी ही 30 दिसंबर 2018 तक खर्च हुआ है. वहीं पीआरडी ने 76.22 फीसदी खर्च कर दूसरे विभागों को काफी पीछे छोड़ दिया है.
2017-18 में भी पीआरडी खर्च में अव्वल
वित्तीय वर्ष 2017-18 में पीआरडी 89.34 फीसदी खर्च कर अव्वल रहा. वहीं खाद्य आपूर्ति विभाग ने 33.17, स्वास्थ्य विभाग ने 52.07 प्रतिशत, उच्च शिक्षा ने 60.45 प्रतिशत, स्कूली शिक्षा ने 50.53 फीसदी और आवास विभाग ने सबसे कम 1.18 प्रतिशत, कल्याण विभाग ने 33.04 फीसदी, पेयजल और स्वच्छता विभाग ने 74.56, ऊर्जा विभाग ने 61.62 और महिला तथा बाल विकास विभाग ने 43.33 फीसदी राशि ही आवंटित बजट के आधार पर खर्च की.
बढ़ती गयी बजट की राशि, घटता गया खर्च
राज्य सरकार की तरफ से मुलभूत सुविधाओं के लिए बजट में एक से बढ़ कर एक प्रावधान किये गये. बजट की राशि भी लगातार बढ़ती गयी. पर फाइलों के मुवमेंट और सहमति देने में ही बजट की राशि कागजों में ही सीमित रही. खर्च कम होते गये. 2014-15 में 31.44 प्रतिशत खर्च में वृद्धि दर्ज की गयी थी. यह 2016-17 में घट कर 9.05 फीसदी हो गयी. 2017-18 में खर्च में बढ़ोत्तरी सिर्फ 17 फीसदी तक सीमित रही.
केंद्रीय अनुदान भी घटता गया
राज्य सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित योजनाओं से मिली राशि खर्च नहीं किये जाने से अनुदान का प्रतिशत भी घटता गया. 2014-15 में 81.86 प्रतिशत राशि झारखंड को मिली. यहां यह बतातें चलें कि केंद्र सरकार से मिली राशि का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट समय पर नहीं भेजे जाने से 2015-16 में 0.74 प्रतिशत राशि ही झारखंड को मिली. 2016-17 में इसमें थोड़ी वृद्धि हुई और आंकड़ा 26.22 फीसदी तक पहुंचा. 2017-18 में यह 50 फीसदी भी नहीं पहुंच पाया.
| 2018-19 योजना का आकार खर्च खर्च का प्रतिशत |
| कृषि 1882.83 करोड़ 727.97 करोड़ 38.66 प्रतिशत |
| खाद्य आपूर्ति 1344.29 करोड़ 561.06 करोड़ 42.04 प्रतिशत |
| स्वास्थ्य 2969.8 करोड़ 1771.11 करोड़ 59.66 प्रतिशत |
उच्च शिक्षा |
| कौशल विकास 1159.56 करोड़ 1271 करोड़ 109 प्रतिशत |
| पीआरडी 159.07 करोड़ 121.25 करोड़ 76.22 प्रतिशत |
| ऊर्जा 5438 करोड़ 1754.99 करोड़ 32.27 प्रतिशत |
2017-18 |
| पेयजल 1967.37 करोड़ 1466.95 करोड़ 74.56 प्रतिशत |
| ऊर्जा 6000 करोड़ 3697.20 करोड़ 61.62 प्रतिशत |
| खाद्य आपूर्ति 1391.19 करोड़ 461.48 करोड़ 33.17 प्रतिशत |
| स्वास्थ्य 3105.97 करोड़ 1637.01 करोड़ 52.07 प्रतिशत |
| उच्च शिक्षा 1167.10 करोड़ 704.88 करोड़ 60.04 प्रतिशत |
| पीआरडी 114.28 करोड़ 102.10 करोड़ 89.34 प्रतिशत |
| स्कूली शिक्षा 8591.32 करोड़ 4341.53 करोड़ 50.53 प्रतिशत |
| आवास 51.08 करोड़ 0.60 करोड़ 1.18 फीसदी |
श्रम, कौशल |
| विकास 299.63 करोड़ 87.32 करोड़ 29.14 प्रतिशत |
2014-15 |
| कृ षि 1451.41 करोड़ 2.2 करोड़ |
| पशुपालन 351.62 करोड़ 0.0 |
| ऊर्जा 5438.4 करोड़ 0.0 |
| खाद्य आपूर्ति 1344.29 करोड़ 0.0 |
| स्वास्थ्य 2969.8 करोड़ 16.68 करोड़ |
| ऊच्च शिक्षा 1159.56 करोड़ 0.0 |
| पीआरडी 159.07 करोड़ 0.0 |
2015-16 |
| कृषि 401.42 करोड़ 0.0 |
| ऊर्जा 5438.4 करोड़ 0.0 |
| खाद्य आपूर्ति 1344.29 करोड़ 0.14 |
| स्वास्थय 2969.8 करोड़ 72.64 करोड़ |
| उच्च शिक्षा 1159.56 0.0 |
| पीआरडी 159.07 करोड़ 0.0 |
सरकार के खर्च में वृद्धि |
| 2014-15 2015-16 2016-17 2017-18 |
| 31.44 फीसदी 35.95 फीसदी 9.05 फीसदी 17 फीसदी |
केंद्रीय अनुदान और सहायता |
| 2014-15 2015-16 2016-17 2017-18 |
| 81.86 फीसदी 0.74 प्रतिशत 26.22 फीसदी 44.84 प्रतिशत |
चार साल में किस मद में कितना खर्च (राशि करोड़ में) |
| विषय 2014-15 2015-16 2016-17 2017-18 |
| पेंशन और अन्य सेवाएं 3465.32 3992.26 4138.40 5853.43 |
| शिक्षा, खेलकूद 5744.43 6542.46 7977.83 10360.13 |
| स्वास्थ्य 1358 1833.38 1967.69 2663.62 |
पेयजल, शहरी विकास |
| आवास सुविधाएं 1739.48 2389.61 4103.90 4072.64 |
| सूचना एवं जनसंपर्क 65.95 103.83 132.11 107.55 |
| बिजली 2343.92 2204.45 1754.64 4098.38 |
(स्त्रोत-मध्यावधि फिस्कल रिपोर्ट, झारखंड सरकार-2017-18)
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