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“बेदाग” के विज्ञापन वाले अखबारों में ही भ्रष्टाचार की खबरें, फिर रघुवर सरकार बेदाग कैसे!

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Surjit singh

28 दिसंबर को रघुवर सरकार के चार साल पूरे हो गये. सरकार ने इस दिन को भी एक इवेंट-उत्सव की तरह प्रचारित-प्रसारित किया. सरकार ने राज्य ही नहीं दूसरे राज्यों के अखबारों में भी बड़े-बड़े विज्ञापन प्रकाशित कराया. अखबारी भाषा में इन विज्ञापनों को जैकेट विज्ञापन कहा जाता है. विज्ञापन में उपलब्धियां गिनायी गयीं. कुछ अखबारों ने सरकार की उपलब्धियों पर संपादकीय भी लिखा. जिसमें रघुवर सरकार के चार साल के कार्यकाल को बेदाग बताया गया.

जिन अखबारों में सरकार ने बड़े-बड़े विज्ञापन छपवाये या जिन अखबारों ने सरकार को बेदाग बताते हुए खबरें लिखीं, उन्हीं अखबारों के अंदर के पन्नों पर सरकार के “बेदाग” होने के दावे को झुठलाने वाली खबरें हैं. सवाल यह उठता है कि सरकार लाखों रुपये खर्च करके अखबार के जिन पाठकों तक यह बात पहुंचाने की कोशिश कर रही है कि रघुवर सरकार के चार साल का कार्यकाल “बेदाग” रहा है, वह उन खबरों को पढ़ कर क्या समझ रहे होंगे. अगर नहीं समझे हैं, तो एक बार अखबारों के पन्नों को पलटिये और समझने की कोशिश करिये कि भ्रष्टाचार की इन प्रमाणित खबरों के बीच रघुवर दास की सरकार “बेदाग” कैसे है. अगर आप 28 दिसंबर को अखबारों में छपी कुछ खबरों पर गौर करें, तो साफ होता है कि सरकार के चार साल का कार्यकाल दागदार है. भ्रष्टाचार की सूचनाओं व  खबरों पर सरकार के स्तर से कार्रवाई नहीं की गयी.

“हिन्दी दैनिक प्रभात खबर” के पेज-दो पर खबर हैः- गरीबों को बांटने के लिये कंबल बनाने की योजना में फर्जी दस्तावेज के आधार पर झारक्राफ्ट ने किया 18.41 करोड़ रुपये का भुगतान… इस खबर को न्यूज विंग ने 03 अप्रैल 2018 को सबसे पहले खबर प्रकाशित किया था. खबर का शीर्षक था- NEWSWING EXCLUSIVE: नौ लाख कंबलों में सखी मंडलों ने बनाया सिर्फ 1.80 लाख कंबल, एक दिन में चार लाख से अधिक कंबल बनाने का बना डाला रिकॉर्ड, जानकारी के बाद भी चुप रहा झारक्राफ्ट.

न्यूज विंग ने कई किस्तों में इस घोटाले का खुलासा किया. पर सरकार ने कार्रवाई नहीं की. अब महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में इसकी पुष्टि कर दी है. नीचे के लिंक पर क्लिक करके आप पूरी खबर पढ़ सकते हैं.

कंबल घोटाला : सबको थी खबर, पर “सबसे पहले” 19 मार्च को न्यूज विंग ने छापी खबर, अब दो अखबारों में लगी “सबसे पहले” क्रेडिट लेने की होड़

“हिन्दी दैनिक प्रभात खबर” के ही पहले पन्ने पर भ्रष्टाचार की दूसरी खबर है. विधानसभा में मंत्री सीपी सिंह का बयान छपा है. सीपी सिंह ने कहा हैः “हाईकोर्ट भवन निर्माण में अनियमितता पर तीन महीने में कार्रवाई होगी”. इस मामले में विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित वरिष्ठ अफसरों की कमेटी ने बड़ी वित्तीय अनियमितता की रिपोर्ट सरकार को दी है. दरअसल, नये हाइकोर्ट भवन के निर्माण के लिये 366 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गयी थी. इसके विरुद्ध पुरनरीक्षित तकनीकि स्वीकृति 697 करोड़ रुपये कर दी गयी.

इस वित्तीय अनियमितता की खबर भी न्यूज विंग ने सबसे पहले 24 फरवरी 2018 को प्रकाशित किया था. पहली खबर का शीर्षक थाः 366 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले हाइकोर्ट भवन का टेंडर आरके कंस्ट्रक्शन को देने के लिए दूसरी कंपनियों को गलत तर्क देकर अयोग्य बताया गया! पर सरकार के स्तर से इस मामले में कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गयी.

“हिन्दी दैनिक प्रभात खबर और दैनिक भास्कर” के अंदर के पन्नों पर सरकार के मंत्री सरयू राय द्वारा लिखे गये एक पत्र के हवाले से खबर छपी है. सरयू राय ने सरकार के महाधिवक्ता के ऊपर लगे आरोपों को लेकर पत्र लिखा है. न्यूज विंग ने भी सरयू राय के पत्र के हवाले से विस्तृत खबर प्रकाशित किया है. शीर्षक हैः महाधिवक्ता राज्य के जनहित के मामलों में हुए फेल, नहीं किया काम : सरयू राय

इस लिंक को क्लिक कर पढ़ें, सरयू राय ने क्या कहा है : महाधिवक्ता राज्य के जनहित के मामलों में हुए फेल, नहीं किया काम : सरयू राय

भ्रष्टाचार की एक अन्य खबर लगभग सभी अखबारों में है. बहुत छोटी सी. वह है झारखंड में हुए दुधारू गाय की खऱीद में घोटाले की. सरकार ने जनवरी 2016 में बीपीएल महिलाओं को रोजगार देने के लिये 90 प्रतिशत सब्सिडी पर दो दुधारू गाय देने का फैसला लिया था. सरकार ने 5,208 महिलाओं को गाय उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा था. पर, सिर्फ 1,553 महिलाओं को गाय उपलब्ध कराया जा सका. इसमें भी घोटाला हो गया. महालेखाकार ने दुधारू गायों के लिये मिनरल मिक्चर की खरीद में घोटाले की आशंका जतायी है और निगरानी जांच की अनुशंसा की है.

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