
Ranchi: झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन( जेएसएससी) स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के विज्ञापन संख्या 21/ 2016 से संबंधित मीना कुमारी एवं अन्य की कुल 252 याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में महाधिवक्ता राजीव रंजन एवं जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने कोर्ट में को सुझाव दिया कि इस केस से संबंधित सभी केस की अलग-अलग (इंडिविजुअल आधार पर ) सुनवाई हो एवं आदेश पारित किया जाए. प्रार्थियों की ओर से मामले में ज्यूडिशियल कमिश्नर नियुक्त किए जाने का सुझाव दिया गया. जिसका विरोध महाधिवक्ता राजीव रंजन की ओर से किया गया. उनकी ओर से कोर्ट को कहा गया कि जेएसएससी एवं राज्य सरकार के पास सारे दस्तावेज हैं जो कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान रखे जाएंगे. जेएसएससी के सुझाव को देखते हुए हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने 31 जुलाई से हर मामले में अलग-अलग सुनवाई करने का आदेश पारित किया. प्रार्थियों के अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, चंचल जैन, अमृतांश वत्स एवं शेखर प्रसाद गुप्ता ने पैरवी की . सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से टेबुलर चार्ट प्रस्तुत किया गया, लेकिन प्रार्थियों का कहना था कि यह कोर्ट के 7 अप्रैल 2025 के आदेश के रूप नहीं है. महाधिवक्ता की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि यह टेबुलर चार्ट कोर्ट के आदेश के अनुरूप ही है. बता दें कि पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने पहले टेबुलर चार्ट में प्रार्थियों की रिट संख्या, प्रार्थियों का नाम, विषय, कोटि , प्राप्तांक ,कोटि के अनुसार अंतिम चयनित अभ्यर्थी का अंक (जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सुरक्षित है/सुरक्षित नहीं है) मांगा था. जबकि दूसरे टैबलेट चार्ट में हाई कोर्ट ने विषय , कोटि, 18 सितंबर 2019 तक नियुक्त अभ्यर्थियों की संख्या, 19 सितंबर 2019 से 2 अगस्त 2022 तक नियुक्त अभ्यर्थियों की संख्या का विवरण मांगा था. दरअसल, पूर्व की सुनवाई के दौरान कोर्ट को दिखाया गया था कि कई प्रार्थियों का प्राप्तांक, विषयवार, कोटिवार, अंतिम चयनित/ नियुक्त अभ्यर्थी से अधिक है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सही तरीके से पालन नहीं किया है जिसके कारण मेरिट लिस्ट में काफी त्रुटिपूर्ण है. इन त्रुटियों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया था. वहीं जेएसएससी की ओर कोर्ट को बताया गया था कि स्टेट वाइज मेरीट लिस्ट के अनुसार जेएसएससी के द्वारा नियुक्ति के अनुशंसा की गई है. प्रार्थियों का यह कथन गलत है कि प्रार्थी का प्राप्तांक स्टेट वाइज मेरीट लिस्ट में अंतिम चयनित अभ्यर्थी से कम है. सभी प्रार्थी का प्राप्तांक स्टेट वाइज मेरीट लिस्ट के चयनित अंतिम अभ्यर्थी से कम है इसलिए इनकी नियुक्ति नहीं की गई है उल्लेखनीय है कि मीना कुमारी एवं अन्य की ओर से हाइकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई है. इसमें कहा गया है कि वर्ष 2016 में जो हाई स्कूल शिक्षक की नियुक्ति का विज्ञापन निकला था उसके आलोक में उनकी भी नियुक्ति होने चाहिए. क्योंकि कट ऑफ से ज्यादा मार्क्स उन्होंने लाया है, अगर हाई स्कूल शिक्षकों की रिक्तियां बची है तो उनकी भी नियुक्ति होनी चाहिए.




