
- 2017-18 में केंद्र ने राज्य को दिये थे 75 करोड़ खर्च करने को
- तीन सालों में 7 लाख जॉब कार्ड किया गया डिलीट
- मनरेगा योजना में एसटी और एसटी का प्रतिशत क्रमशः 11.17 % , 32.38 %
Ranchi: जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा है कि रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में मनरेगा योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति कामगारों की संख्या काफी घटी है. दूसरी ओर वित्तीय वर्ष 2017-18 में योजना के तहत केंद्र ने राज्य को जो 75 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी, उसे भी राज्य सरकार उपयोग में नहीं ला सकी है. जिसे बाद में राज्य सरकार ने केंद्र को वापस कर दिया. एक तरफ सरकार स्वयं मान चुकी है कि राज्य इन दिनों सूखाग्रस्त हो गया है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में हाशिये पर जी रहे एससी, एसटी को सरकार रोजगार नहीं दे पा रही है. हेमंत सोरेन ने कहा कि योजना में एसी और एसटी की संख्या क्रमशः 11.17 प्रतिशत, 32.38 प्रतिशत रह गयी है. इससे मालूम होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार बेरोजगारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है. जेएमएम अब इन हाशिये पर जी रहे लोगों के लिए संघर्ष को तैयार है. पार्टी इसे लेकर प्रखंड स्तर पर जमीनी संघर्ष शुरू करेगी.
किसान के हितोंवाली भाजपा की सारी योजनाएं फेल
शनिवार को आयोजित पार्टी की कार्यकारिणी समिति की बैठक के बाद प्रेस वार्ता में जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में सूखा की स्थिति को रघुवर सरकार ने भी स्वीकार कर लिया है. लेकिन इसके उलट किसानों के हितों के लिए सरकार केवल सर्वे करने पर ही ध्यान दे रही है. किसानों के हितों के लिए लागू की गयी भाजपा की सारी योजनाएं आज पूरी तरह फेल हैं. मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जो रोजगार मिलता है. वह भी कम हो गया है. ऐसे में राज्य के किसान आज भुखमरी के कगार पर हैं. सरकार को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है. जेएमएम यह मांग करता है कि किसानों को राहत पहुंचाने, मुआवजा देने में सरकार तत्परता दिखाने के साथ रोजगार देने का एक बड़ा अभियान चलाये. मनरेगा के तहत सरकार अगर 15 दिनों में रोजगार नहीं देती है, तो ग्रामीणों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाये. फिर भी रोजगार देने में वह असमर्थ होती है. तो संवैधानिक व्यवस्था के तहत दी जानेवाली 50 प्रतिशत तक के बेरोजगारी भत्ता की मांग जेएमएम करेगा.
7 लाख जॉब कार्ड किया डिलीट
हेमंत सोरेन ने कहा कि मनरेगा योजना के तहत तीन सालों ( वित्तीय वर्ष 16-17, 17-18, 18-19) में करीब 7 लाख जॉब कार्ड को डिलीट कर दिया गया. कार्ड डिलीट करनेवाले जिलों में दुमका, गढ़वा, साहेबगंज, कोडरमा, गिरिडीह, लातेहार शामिल हैं. वही 2017-18 में केंद्र द्वारा राज्य को दिये गये 75 करोड़ रुपये भी राज्य सरकार खर्च नहीं कर सकी. जिसे बाद में केंद्र को वापस करना पड़ा. आज भी योजना के तहत ऐसे कई मजदूर हैं, जिनकी मजदूरी का भुगतान सरकार नहीं कर सकी है.
50 लाख लोगों को जोड़ने का चलेगा अभियान
लोकसभा व विधानसभा चुनाव की बात करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि सांगठनिक स्तर पर पार्टी अब मजबूती से कार्य करना चाहती है. इसके लिए एक विशेष सदस्यता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है. यह अभियान 10 दिसम्बर से 10 जनवरी तहत चलेगा. अभियान के तहत 50 लाख लोगों को जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके लिए प्रत्येक जिले में दो-दो प्रभारियों की नियुक्ति की गयी है, ताकि अभियान को पूरा किया जा सके.
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