
Ravi/Pravin
Ranchi: राज्य सरकार लाख दावा कर ले कि खजाने में पैसा है. हकीकत यह है खजाने में सिर्फ 250 से 300 करोड़ ही हैं. हालांकि खजाने में राशि आती-जाती रहती है. फाइनेंशियल क्राइसिस की वजह से अब तक लगभग 90 हजार कर्मियों को वेतन नहीं मिल पाया है. राज्य में लगभग 1.75 लाख से अधिक कर्मचारी हैं. आंकड़ों के अनुसार अब तक 86226 कर्मियों को ही वेतन मिल पाया है. इस हिसाब से 88774 कर्मियों को अब तक वेतन नहीं मिला है. शिक्षक, जेलकर्मी, रेल पुलिस, सर्व शिक्षा अभियान में काम करने वाले कर्मचारी, आंगनबाड़ी सेविकाओं को अब वेतन नहीं मिल पाया है.
वेतन पर सालाना खर्च है 12820 करोड़ रुपये
राज्य सरकार अफसरों और कर्मियों के वेतन पर सालाना लगभग 12820 करोड़ रुपये खर्च करती है. पेंशन मद में सालाना 5598 करोड़ रुपये खर्च होता है. खजाने में पैसा नहीं होने के कारण राज्य सरकार केंद्रीय करों से मिलने वाली हिस्सेदारी की बाट जोह रही है. केंद्रीय करों से मिलने वाली हिस्सदारी समय पर नहीं मिलने के कारण कर्मियों के वेतन भुगतान में विलंब हो रहा है.
25 तारीख तक विभागों को भेज दिया जाता है बिल
सैलरी के लिए डिपार्टमेंट को एलॉटमेंट महीने के 25 तारीख तक भेज दिया जाता है. इसके साथ ही एक कॉपी ट्रेजरी को भी भेज दी जाती है. जिससे ट्रेजरी यह देख सके कि जितना पैसा है उतना ही निकल रहा है या नहीं. या किसी ने अधिक निकासी तो नहीं की. ट्रेजरी से महीने की अंतिम तिथि को बिल पास होता है. बिल पास होने के साथ ही कर्मियों को वेतन का भुगतान हो जाता है.
क्यों हुआ वेतन भुगतान में देरी
इस माह भारत सरकार से पैसे आने में देरी हुई. इस कारण वेतन भुगतान में विलंब हुआ. राज्य को भारत सरकार से जीएसटी सहित अन्य करों से राशि प्राप्त होती है. केंद्रीय करों की हिस्सेदारी समय पर नहीं मिलने और खजाने में पैसे की कमी के कारण भुगतान में विलंब होता है.
किन स्त्रोतों से राज्य सरकार को मिलता है पैसा
- केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदीरी- 2700 करोड़
- राज्य कर- 19250 करोड़
- अन्य स्त्रोत – 9030 करोड़
- केंद्र से सहायता अनुदान- 13850 करोड़
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