
Ranchi: झारखंड हाइकोर्ट ने साहिबगंज में पाइपलाइन जलापूर्ति योजना पूरी करने के लिए और 210 दिन का मांगे जाने पर राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई. हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कोर्ट में सशरीर उपस्थित पेयजल स्वच्छता विभाग के सचिव से पूछा मौखिक कहा कि रात दिन एक कर जल्द से जल्द साहिबगंज के लोगों को पाइपलाइन से पानी उपलब्ध कराए. खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा 210 दिन और समय मांगे जाने के आग्रह को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि साहिबगंज के लोगों को पानी दिलाने के लिए जनहित याचिका 16 साल से चल रही है, 2016 में इससे संबंध एक जनहित याचिका साहिबगंज में लोगों को पानी पहुंचाने के सरकार के आश्वासन के बाद निष्पादित कर दी गई थी. इसके बावजूद भी साहिबगंज के लोगों को पानी नहीं मिलने पर 2 साल बाद फिर से दूसरी जनहित याचिका हाई कोर्ट में दाखिल की गई. इसमें भी राज्य सरकार की ओर से जून 2024 के शपथ पत्र में साहिबगंज के 6 वार्ड में 10 दिन के भीतर पानी सप्लाई करने की बात कही गई थी लेकिन इसे भी पूरा नहीं किया गया. नाराज कोर्ट ने कहां की राज्य सरकार का शपथ पत्र आईवाश है. सरकार शपथ पत्र में कही गई बातें बार-बार बदलती हैं और गलत दावा किया जाता है. कोर्ट ने अगली सुनवाई में भी पेयजल स्वच्छता विभाग के सचिव को सशरीर उपस्थित रहने का निर्देश देते हुए उनसे गलत शपथ पत्र दायर करने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है, कोर्ट ने उनसे यह भी पूछा है कि साहिबगंज के लोगों को कब तक पानी उपलब्ध करा दिया जाएगा. अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी. सोमवार को साहिबगंज में पाइपलाइन जलापूर्ति योजना के शीघ्र चालू करने काे लेकर दायर सिद्धेश्वर मंडल की जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई की. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने साहिबगंज के लोगों को अब तक पाइपलाइन से जलापूर्ति नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई. कोर्ट ने मौखिक कहा कि साहिबगंज के लोगों को 16 सालों से सरकार से पानी के नाम पर आश्वासन ही मिला है. पानी लोगों की मौलिक जरूरत होती है, झारखंड के ग्रामीण इलाकों जिले साहिबगंज में पानी को लेकर लोगों को जूझना पड़ेगा? ऐसे में झारखंड के विकास की बात कैसे सोची जा सकती है? प्रार्थी की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव शर्मा एवं अधिवक्ता ओम प्रकाश ने पक्ष रखा. पिछली सुनवाई में सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि साहिबगंज में पेयजल के लिए पाइपलाइन लाइन बिछाने हेतु रेलवे से एनओसी लेना था, इसके एवज में रेलवे को पैसे की भुगतान करने की प्रक्रिया जारी है. इस पर कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2017 में ही रेलवे से एनओसी मांगी गई थी इसके बाद 7 साल तक सरकार की ओर से कोई आगे पहल नहीं की गई.



