
Rahul Kumar
Ranchi: झारखंड में बीजेपी ने सोरेन vs सोरेन चुनावी मुकाबला कर दिया है. जिसका असर पूरे झारखंड के साथ संथाल परगना में ज्यादा देखने को मिलेगा. इस राजनीतिक लड़ाई की शुरुआत सोरेन परिवार की बड़ी बहू और पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन ने की है. बीजेपी में शामिल होने के बाद सीता सोरेन का कद खूब बढ़ा है. सबसे पहले उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई, उसके बाद दुमका लोकसभा क्षेत्र के सिटिंग सांसद सुनील सोरेन का टिकट काट कर सीता सोरेन को बीजेपी ने उम्मीदवार बना दिया है. दुमका लोकसभा और दुमका विधानसभा सीट पर सोरेन परिवार का वर्चस्व रहा है. पूर्व सीएम और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन इस सीट से लंबे समय तक संसद रहे हैं. हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार सुनील सोरेन ने शिबू सोरेन को चुनाव हरा दिया था. अब जेएमएम के कई नेता यह बोल रहे हैं कि जेल से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन दुमका लोकसभा से चुनाव लड़ेंगे. अगर ऐसा होता है तो यह मुकाबला आमने-सामने का हो जायेगा.
जेल से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं हेमंत सोरेन
80 वर्षीय जेएमएम के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन के बारे में कहा जा रहा है कि वह इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे. शिबू सोरेन फिलहाल राज्यसभा सदस्य हैं. शिबू सोरेन की जगह पार्टी सोरेन परिवार के किसी अन्य सदस्य को दुमका लोकसभा सीट से चुनाव लड़ाना चाहती है. और वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए जेएमएम हेमंत सोरेन को उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में देख रही है. और चर्चा है कि इस लोकसभा सीट से हेमंत सोरेन जेल से ही चुनाव लड़ेंगे.
दुमका सीट पर सीता कितनी मजबूत
दुमका लोकसभा सीट की भौगोलिक स्थिति को देखें, तो इस लोकसभा क्षेत्र में चार जिलों की छः विधानसभाएं आती हैं. इनमें दुमका, शिकारीपाड़ा, जामताड़ा, नाला, जामा और सारठ विधानसभा शामिल हैं. विधानसभावार देख जाये तो इस लोकसभा सीट पर इंडी गठबंधन काफी मजबूत है. क्योंकि शिकारीपाड़ा, दुमका और नाला सीट पर जेएमएम के विधायक हैं, तो वहीं जामताड़ा सीट पर कांग्रेस के विधायक ने 2019 चुनाव जीता है. सिर्फ दो सीट सारठ और जामा बीजेपी के पास हैं. हालांकि जामा विधानसभा से सीता सोरेन खुद जेएमएम से जीत कर आयी थीं, वहीं बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. लेकिन अभी तक विधानसभा अध्यक्ष ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है. ऐसे में सिर्फ सोरेन परिवार की बहु होना चुनावी मैदान में काफी होगा यह समझ से परे है.
सांसद सुनील सोरेन के समर्थक नाराज
बीजेपी ने 2 मार्च को 195 लोकसभा उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की. उसी लिस्ट में झारखंड के 11 उम्मीदवारों के नाम का एलान किया गया था. जिसमें सांसद सुनील सोरेन को बीजेपी ने दुमका लोकसभा सीट से उम्मीदवार घोषित किया था. लेकिन बीजेपी सीता सोरेन के आने के बाद पार्टी की 5वीं सूची जारी हुई और सांसद सुनील सोरेन का टिकट काट कर सीता सोरेन को उम्मीदवार बना दिया गया. जिसके बाद से मौजूदा सांसद के समर्थक पार्टी के इस निर्णय से नाराज चल रहे हैं. अगर इस नाराजगी को बीजेपी समय रहते दूर नहीं करती है, तो चुनाव परिणाम पर इसका असर पड़ सकता है.
आठ बार दुमका लोकसभा सीट रही है सोरेन परिवार के नाम
वर्ष 1980 में पहली बार जीतने के बाद शिबू सोरेन वर्ष 1989, 1991, 1996, 2002, 2004, 2009 और 2014 के आम चुनावों में यहां अपना परचम लहराते रहे. दुमका सीट पर उनकी सिर्फ़ चार बार हार हुई. पहली बार 1984 में कांग्रेस के पृथ्वी चंद किस्कू ने उन्हें शिकस्त दी. इसके बाद वर्ष 1998 और 1999 के चुनावों में उन्हें बीजेपी प्रत्याशी के रूप में बाबूलाल मरांडी ने हराया था. फिर 2019 के चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार सुनील सोरेन ने शिबू सोरेन को शिकस्त दी.
इसे भी पढ़ें – दुमका से सीता सोरेन बीजेपी उम्मीदवार, धनबाद से ढुल्लू और चतरा से कालीचरण को टिकट



