Koderma

ध्वजाधारी धाम में दो दिवसीय शिवरात्रि मेला शुरू, हजारों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर लिया आशीर्वाद

Koderma: जिले के ध्वजाधारी धाम में दो दिवसीय शिवरात्रि मेले का शुक्रवार को उद्घाटन हुआ. मेले का उद्घाटन महंत सुखदेव जी महाराज, जिप अघ्यक्ष रामधन यादव व अन्य ने किया. इस दौरान कई जनप्रतिनिधि, विभिन्न दलों व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे. ध्वजाधारी धाम में आयोजित दो दिवसीय शिवरात्रि मेले में बिहार-झारखंड और बंगाल से हजारों की संख्या में शिव भक्त पहुंचते हैं और 777 सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ पर बसे बाबा भोले का जलाभिषेक करते हैं, ऐसी मान्यता है कि यहां आने वाले शिव भक्तों की मुराद पूरी होती है.

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

कोडरमा के ध्वजाधारी धाम में शिवरात्रि मेले में शिव भक्तों की भीड़ उमड़ रही है, जिसको देखते हुए मेला में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है. इसके साथ ही पूरे मेला परिसर के चारों ओर सीसीटीवी लगाए गए हैं और ड्रोन कैमरे से पूरे मेला पर नजर रखी जा रही है. चूंकि शिव भक्तों के लिए 777 सीढ़ियां चढ़ना आसान नहीं हैं. इसको देखते हुए मेला आयोजन समिति के वॉलेंटियर और पुलिस जवान शिव भक्तों की सेवा में पहाड़ के अंतिम छोर तक लगे हुए हैं. वहीं मेले में जिला प्रशासन की ओर से एक मेडिकल टीम और दो एम्बुलेंस भी तैनात किए गए हैं, ताकि इमरजेंसी में किसी को कोई परेशानी हो तो उसे राहत पहुंचाई जा सके. कोडरमा के ध्वजाधारी धाम में पहुंचने वाले शिव भक्तों के लिए पूजन सामग्री से लेकर खाने-पीने के कई स्टॉल लगाए गए हैं. इसके साथ ही बच्चों के लिए झूला और मनोरंजन के साथ-साथ कई खिलौने की दुकानें लगाई गई हैं. यहां पहुंचने वाले भक्ति और आस्था के साथ बाबा भोले का जलाभिषेक कर अपने और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की.

भगवान शिव कर्दम ऋषि की तपस्या से हुए थे खुश

प्राचीन मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में ब्रम्हा के पुत्र कद्रम ऋषि ने यहां भगवान शिव की तपस्या की थी. और भगवान शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें ध्वजा और त्रिशूल भेंट की थी, तभी से इस पहाड़ का नाम ध्वजाधारी पहाड़ पड़ गया. इस ध्वजाधारी आश्रम से होकर एक ऊंची पहाड़ हैं, जहां भगवान शिव विराजमान है. शिव भक्त अपनी मन्नत को लेकर 777 सीढ़ियां चढ़कर कठिन सफर के बाद बाबा भोले को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक करते हैं.

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