
Ranchi: कब तक ऑपरेशन पूरा होगा.. आखिर क्यों बार बार मशीन खराब हो रही है. बहुत दिन हो गया है चिंता भी बहुत हो रही है. डर भी लगता है. वहां सब ठीक है न… कुछ ऐसे ही सवाल है जो उत्तरकाशी में फंसे मजदूरों के परिजन श्रम कंट्रोल रूम से हर दिन पूछते है. उत्तरकाशी सुरंग हादसा में फंसे मजदूरों का आज 17वां दिन है. जहां रेस्क्यू टीम मजदूरों को बाहर निकालने के लिये मशक्कत कर रही है.
वहीं, मजदूर भी सुरंग से बाहर निकल आजादी चाहते है. इन सबके बीच परिजनों की सांस अपनों के लिये अटकी है. फंसने वाले मजदूरेां में सबसे अधिक झारखंड के मजदूर है. श्रम कंट्रोल रूम की ओर से लगातार मजदूरों के परिजनों की मॉनिटरिंग की जा रही है. मजदूरों के परिजन खुद भी श्रम कंट्रोल रूम के संपर्क में है. ऐसे में जहां परिजनों को अपने घरवालों का बेसब्री से इंतजार है. वहीं, श्रम कंट्रोल रूम के लिये भी परिजनों को सांत्वना देना भावनात्मक कार्य है. कंट्रोल रूम कर्मियों से बात करने से जानकारी हुई कि कुछ मजदूरों के परिजन उत्तरकााशी पहुंचे हुए है. वहीं, कुछ परिजन घरों से ही श्रम कंट्रोल रूम के संपर्क में है.
बैचेनी के बावजूद संयम
कंट्रोल रूम कर्मियों की मानें तो परिजन बहुत ही भावनात्मक सवाल पूछते है. परिजनों की चिंता में कई बार परिजन दिन में चार पांच बार कॉल करते है. कुछ मजदूर सुदूर गांवों के भी है. जिन्हें वस्तुस्थिति की जानकारी दी जाती है. हालांकि कुछ परिजन तो टीवी और सोशल मीडिया के जरिये भी वस्तुस्थिति से अवगत रहते है. कंट्रोल रूम की मानें तो ऐसे वक्त में लोगों को ढांढस बांधना चुनौतिपूर्ण है. परिजनों से बात करते हुए उन्हें उम्मीद रखने और संयम से काम लेने की जानकारी दी जाती है.
सेना ने संभाला मोर्चा
अब भी मजदूरों तक पहुंचने के लिये रेस्क्यू टीम को 88 मीटर वर्टिकल ड्रिलिंग करनी है. इसके बाद टीम मजदूरों को बाहर निकाल सकती है. श्रमिकों तक पहुंचे के लिये एसजेवीएनएल वर्टिकल ड्रिलिंग कर रही है. वहीं, दूसरी तरफ से स्टील पाइप हॉरिजांटल निकास सुरंग बनाने के लिये रैट माइनर्स की टीम खुदाई कर रही है. सोमवार तक एसजेवीएनएल ने 36 मीटर तक ड्रिलिंग पूरी कर ली थी. जबकि ड्रिलिंग के दौरान फंसे ऑर्गर मशीन को 70 घंटे के बाद निकाला गया.
रैट माइर्नस की टीम को लगभग 12 मीटर मैनुअल तरीके से सुरंग की ख्ुादाई करनी है. सोमवार रात 11 बजे तक टीम ने लगभग डेढ़ मीटर खुदाई की थी. अब तक 49.5 मीटर सुरंग मजदूरों के निकासी के लिये तैयार हो गयी है. अभी तक आंकलित समय सीमा के मुताबिक 30 नवंबर तक मजदूरों को बाहर निकाल लिया जायेगा. खुदाई के साथ साथ 800 एमएम पाइप भी सुरंग में ढाला जा रहा है.
सुरंग बना रही कंपनी पर कमेटी गठित
दूसरी तरफ एनएचआईडीसीएल ने नवयुग कंपनी को सुरंग निमार्ण का कार्य दिया था. सुरंग बनाने के टेंडर में पहली शर्त सुरंग में एस्केप टनल का निमार्ण करना था. इसके बाद भ्ज्ञी कपंनी ने सुरंग में एस्केप टनल नहीं बनायी. इसके लिये जांच कमेटी बनायी गयी है. कमेटी से जल्द से जल्द रिपोर्ट की मांग की गयी है.
राज्य के 15 मजदूर: इसमें रांची के तीन, पूर्वी सिंहभूम के 7, खूंटी के 3 और गिरिडीह के दो मजूदर है. फिलहाल इन मजदूरों को खाना पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. विश्वजीत कुमार और सुबोध कुमार गिरिडीह से, रांची से अनिल बेदिया, श्राजेंद्र बेदिया और सुखराम, खूंटी से विजय होरो, चमरा उरांव, गणपति खिदुआ. पूर्वी सिंहभूम से टिकु सरदार, गुनोधर, रणजीत, रविंद्र नायक, समीर, महादेव और मुदतू मुर्मू है.
70 मीटर क्षेत्र में फैला मलबा: उत्तरकाशी के सिलक्यारा में चार धाम रोड परियोजना पर ये हादसा हुआ. जो 12 नवंबर को मलबा ढह जाने के कारण सुरंग गिर गया. घटना के बाद सुरंग के 70 मीटर क्षेत्र में मलबा फैल गया, जिससे मजदूरों का रास्ता बंद हो गया. जहां रोड परियोजना सुरंग में मलबा गिर जाने के कारण 41 मजदूर सुरंग में ही फंस गये है. पिछले कुछ दिनों से मजदूरों को पाइप के जरिये खाना और पानी दिया गया. विभाग की मानें तो सुरंग से निकलने पर मजदूरों को एयरलिफ्ट किया जायेगा.




