
Ranchi: आरएसएस के कार्यक्रम ‘लोकमंथन’ (देश, काल और स्थिति) पर सरकार चार करोड़ रुपये खर्च करेगी. यह कार्यक्रम पूरी तरह से आरएसएस को समर्पित है. खेल गांव में आयोजित यह कार्यक्रम 27 से 30 सितंबर तक चलेगा. 27 सितंबर को शाम चार बजे इस कार्यक्रम का उद्घाटन उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू करेंगे. कार्यक्रम में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, सीएम रघुवर दास, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे.
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इस कार्यक्रम का आयोजन आरएसएस की अनुषंगी इकाई प्रज्ञा प्रवाह और सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा किया जा रहा है. मुंबई की एक ईवेंट कंपनी को पूरे कार्यक्रम के आयोजन का जिम्मा दिया गया है.
350- 400 कार्यकर्ताओं की व्यवस्था की जिम्मेवारी पांच IAS को
इस कार्यक्रम में 350 से 400 बुद्धिजीवी, कलाकार और आरएसएस कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे. इनकी व्यवस्था की जिम्मेवारी पांच आईएएस अफसरों को सौंपी गई है. कार्मिक ने इन पांच आईएएस अफसरों को 24 सितंबर से ही पर्यटन विभाग में योगदान देने का आदेश भी जारी कर दिया है. जिन अफसरों को व्यवस्था संभालने की जिम्मेवारी दी गई है. उनमें आदित्य रंजन, अनन्य मित्तल, उत्कर्ष गुप्ता, ताराचंद और नमन प्रियेश लकड़ा का नाम शामिल है. प्रेस कांफ्रेंस में पर्यटन मंत्री अमर बाउरी ने बताया कि मीडिया सीधे कार्यक्रम का कवरेज नहीं करेंगी. मीडिया के लिये अलग से ब्रीफिंग की व्यवस्था की गई है.
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क्या है ‘लोकमंथन’
लोकमंथन में इस संस्करण में भारतबोध जन-गण-मन विषय पर विचार-विमर्श होगा. लोकमंथन 2018 का मुख्य लक्ष्य कला से लेकर पर्यावरण तक के विभिन्न विषयों पर बहुस्तरीय चर्चा करना है. लोकमंथन का पहला संस्करण 12 से 14 नवंबर 2016 में भोपाल में हुआ था. इसमें वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य पर चर्चा की गई थी. लोकमंथन के जरिये बुद्धिजीवियों और कर्मशील लोगों के बीच संपर्क पुनस्थापित करने का प्रयास किया जायेगा. 30 सितंबर को दिन के 11 बजे समापन समारोह होगा. समापन समारोह की मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन होंगी.
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‘भारत का मानस क्या है’ इस पर होगी चर्चा
चार दिनी महासम्मेलन में सभी भादीदारों के लिये सकारात्मक परिणामों को लक्षित कर बहुस्तरीय चर्चा होगी. इसके साथ ही भारत का मानस क्या है, क्या था, क्या होना है और किस दिशा में इसे जाना चाहिये, इस पर चर्चा होगी. महासम्मेलन में वरिष्ठ बुद्धिजीवियों, कलाकारों और कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया है. चार दिनों के दरमियान समाजावलोकन, विश्वालोकन, आर्यावलोकन और आत्मावलोकन विषय पर चर्चा होगी.




