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बिजली कंपनियों की कुल संपत्ति 4000 करोड़, कर्ज 6500, दूसरी लाइन से बिजली लेने में हर महीने 17 करोड़ का भुगतान

Ranchi : झारखंड में बोर्ड-निगम का आंकड़ा भी चौंकाने वाला है. बिजली बोर्ड, वर्तमान में चार कंपनी ऊर्जा विकास निगम, उर्जा संचरण निगम, बिजली वितरण निगम और उर्जा उत्पादन निगम की कुल संपत्ति लगभग 4000 करोड़ की आंकी गई है. लेकिन कर्ज 6450 रुपये हैं. मतलब पूरी संपत्ति से भी 2450 करोड़ रुपये अधिक का कर्ज है. ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने की वजह से दूसरे कंपनी एनटीपीसी और पीजीसीआईएल के ट्रांसमिशन लाइन से बिजली ली जा रही है. इसके एवज में दूसरी कंपनी को हर माह लगभग 17 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा है. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने दूसरे कंपनी के ट्रांसमिशन लाइन से बिजली लेने के लिये 28 पैसे प्रति यूनिट से दर तय की है.

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ट्रांसमिशन लाइन नहीं, हर साल 204 करोड़ का भुगतान

ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने के कारण हर साल बिजली सप्लाई के लिये दूसरे कंपनी को लगभग 204 करोड़ का भुगतान हो रहा है. हर महीने व्हीलिंग चार्ज के रूप में लगभग 17 करोड़ रुपये का भुगतान हो रहा है. ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण पीजीसीआइएल के ही लाइन से एनटीपीसी, पीटीसी और एनएचपीसी से बिजली ली जा रही है. हर महीने लगभग 400 करोड़ की बिजली खरीदी जाती है, इसके एवज में 230 से 235 करोड़ रुपये ही राजस्व की प्राप्ति होती है.

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क्यों कर्ज के बोझ से दब गई बिजली कंपनियां

प्रदेश की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से निजी और सेंट्रल सेक्टर पर टिक गई है. निजी और सेंट्रल सेक्टर से हर दिन औसतन 660 मेगावाट बिजली ली जाती है. पिछले दो साल में बिजली खरीद में 40 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है. दो साल पहले लगभग हर माह 360 करोड़ रुपये की बिजली खरीदी जाती थी. अब हर माह लगभग 400 करोड़ रुपये की बिजली खरीदी जा रही है. डीवीसी का बकाया 3450 और टीवीएनएल का बकाया बढ़कर 3100 करोड़ रुपये हो गया है.

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1200 करोड़ का भुगतान फिर भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं

ट्रांसमिशन लाइन और ग्रिड निर्माण को लेकर पीजीसीआईएल के साथ जून 2014 में करार हुआ था. करार के मुताबिक, दिसंबर 2015 तक 19 ट्रांसमिशन लाइन और 10 ग्रिड का निर्माण कार्य पूरा करना था. करार की मियाद पूरा होने के बावजूद भी काम पूरा नहीं हुआ. करार के वक्त यह प्रोजेक्ट 1310 करोड़ का था. अब यह बढ़कर 1700 करोड़ रुपये का हो गया है. इस हिसाब से 390 करोड़ का अतिरिक्त भार राज्य सरकार पर पड़ा है. पीजीसीआईएल को अब तक काम के एवज में लगभग 1200 करोड़ रुपये भुगतान भी कर दिया गया है.

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औने-पौने कीमत पर दी गई पीटीपीएस की संपत्ति

पीटीपीएस की संपत्ति एनटीपीसी को औने-पौने कीमत पर दे दी गई. इसके खिलाफ झारखंड राज्य पावर इंजीनियर्स एसोशिएसन ने भी सरकार को पत्र लिखा है. एसोसिएशन का कहना है कि पीटीपीएस में मौजूद 100 करोड़ के स्क्रैप की कीमत सिर्फ 3.32 करोड़ लगाई गई है. पूर्व प्लांट की कीमत लगभग 2000 करोड़ थी, जिसे ज्वाइंट वेंचर के तहत 482 करोड़ में ही दे दिया गया. लगभग 1000 करोड़ के पतरातू डैम एनटीपीसी को प्लांट चलाने के लिये मुफ्त में दे दिया गया.

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क्या कहते हैं संचरण निगम के निदेशक

झारखंड राज्य संचरण निगम के निदेशक अतुल कुमार के अनुसार व्हीलिंग चार्ज प्रति यूनिट 28 पैसा है. हर माह वितरण निगम लगभग 17 करोड़ रुपये का भुगतान करता है. ट्रांसमिशन लाइन बन जाने के बाद व्हीलिंग चार्ज नहीं लगेगा.

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