
Ranchi: एक बार फिर से राज्य में बिजली संकट शुरू हो गया है. हर एक दो घंटे में बिजली कटौती हो रही है. पिछले कुछ समय से राज्य में हर दो तीन महीने में बिजली संकट उभर आती है. हर बार होने वाली बिजली संकट के बाद भी झारखंड बिजली वितरण निगम उत्पादक कंपनियों को समय पर भुगतान नहीं करती है. नतीजा ये होता है कि राज्य में बार बार बिजली की किल्लत होती है. जबकि व्यवस्था में सुधार से परे, अधिकारी और खुद राज्य सरकार केंद्र द्वारा बिजली रोक देने की दलील देते नजर आ रहे है.
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बिजली संकट को लेकर जेएमएम हमलावर
वहीं इस पूरे मामले पर झामुमो हमलावर है. झामुमो प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य की ओर से बयान जारी किया गया कि राज्य सरकार चाहेगी तो देश की बत्ती गुल कर देगी. ऐसे में हर तीन महीने में बिजली संकट की बात लोगों को परेशान करती है. वरीय अधिकारियों की माने तो राज्य में फिलहाल चार सौ मेगावाट बिजली की कमी है. कुल मांग 2700 मेगावाट की जगह उपलब्धता 2300 मेगावाट है. ऐेसे में लोगों को परेशानी हो रही है. जबकि जेबीवीएनएल का बिजली उत्पादक कंपनियों पर बकाया की बात करें तो ये राशि 735 करोड़ रुपए है. समय पर उत्पादक कंपनियों को •ाुगतान नहीं होने पर केंद्र सरकार बिजली कटौती करती है. ऐसे में केंद्र व राज्य सरकार की खींचतान की वजह से झारखंड की जनता पिस रही है, उन्हें अक्सर घंटो अंधेरे में रहना पड़ता है. दिन में भी बिजली नहीं होने की वजह से काम-धंधा बंद करना पड़ रहा है.
पावर एक्सचेंज में भी बिजली की कमी
जेबीवीएनएल की मानें तो बिजली आपूर्ति में कमी होने पर निगम इंडियन एनर्जी एक्सचेंज अथवा पावर एक्सचेंज इंडिया लिमिटेड से बिजली खरीद कर आपूर्ति की जाती है. लेकिन इन पावर एक्सचेंज में भी बिजली की कमी है. इस कारण मांग के अनुरूप पावर एक्सचेंज से भी बिजली नहीं मिल रही है.पावर एक्सचेंज से बिहार-झारखंड के लिए केवल 800 से 1200 मेगावाट ही बिजली न उपलब्ध हो पा रही है,. जेबीवीएनएल को सोलर पावर से भी 460 मेगावाट का आवंटन मिलता है. इससे दिन में 450 मेगावाट पावर की आपूर्ति होती है. लेकिन विंड पावर से भी इस समय सिर्फ 135 मेगावाट ही बिजली मिल रही है. बिजली की कम उपलब्धता के कारण राजधानी के सबस्टेशनों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है. ग्रिडों को पीक आवर में करीब 35 मेगावाट कम बिजली मिल रही है.
हर बार केंद्र की कमी बतायी जा रही:
पिछले कुछ समय से राज्य में बिजली संकट आम बात हो गयी है. कभी बिजली खरीद का भुगतान नहीं होने पर, तो कभी तकनीकि कारणों से. इन सबके बीच केंद्र सरकार को ही जेबीवीएनएल अधिकारी कोसते नजर आते है, कि राज्य को बिजली नहीं दी जा रही है. जबकि इस साल के शुरूआत से केंद्र सरकार ने बिजली खरीद के लिये नयी नियमावली लागू की है. जिसके तहत समय पर बिजली खरीद का पैसा भुगतान नहीं होने पर सेंट्रल पुल से खुद ही बिजली काट दी जाती है.




