
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट को लेकर कड़ी टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी भी अदालत का अपने से ऊपरी अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जा कर आदेश देना ‘संवैधानिक फ़िलॉसफ़ी के विरुद्ध’ है.एक रेप सर्वाइवर की याचिका पर फ़ैसला देते हुए कोर्ट ने ये बात कही. महिला ने गर्भपात की इजाज़त मांगी थी.
सुप्रीम कोर्ट की यह कड़ी टिप्पणी शनिवार को हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद आई जिसमें कोर्ट ने सर्वाइवर की मांग को ख़ारिज कर दिया था. हाई कोर्ट ने शनिवार को इस केस पर सुनवाई की जबकि ये मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था.
इस संबंध में अपनी कड़ी टिप्पणी में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “गुजरात हाई कोर्ट में क्या हो रहा है? भारत में कोई भी अदालत किसी ऊंची अदालत के आदेश के ख़िलाफ़ आदेश पारित नहीं कर सकती. यह संवैधानिक फ़िलॉसफ़ी के ख़िलाफ़ है. हम हाई कोर्ट के इस तरह आदेश देने की सराहना नहीं करते.”
महिला के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात की एक रेप सर्वाइवर की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें गर्भपात की इजाज़त दे दी. ये आदेश सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने दिया. लड़की के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्होंने सात अगस्त को हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.
उन्होंने बताया एमटीपी (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी) एक्ट 2021 के तहत महिलाओं को 24 हफ़्ते के अंदर गर्भ गिराने का अधिकार देता है. इसके तहत सक्षम न्यायालय के सामने याचिका दाखिल करते हुए 24 हफ़्ते के बाद भी गर्भपात की अनुमति मिल सकती है.
याचिका पर गौर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “भारतीय समाज में शादी के बाद गर्भधारण करना दंपति और समाज के लिए खुशी की वजह होता है लेकिन शादी के इतर जब अनचाहा गर्भ हो तो वो महिला के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है.”
सुप्रीम कोर्ट ने इसके पहले शनिवार को गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले पर सवाल उठाए थे, जिसमें लड़की को गर्भ गिराने की अनुमति देने से मना कर दिया गया था.




