
Ranchi: कांके स्थित स्लॉटर हॉउस पर बुधवार को न्यूज विंग में प्रकाशित खबर पर आखिरकार कंपनी ने भी मुहर लगा दी. बंद पड़े स्लॉटर हाउस का काम देखने वाली ‘माइक्रो ट्रांसमिशन सिस्टम’ (एमटीएस) के ओनर के मुताबिक इसके संचालन में उसे लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है. ऐसे में इसे चलाने का काम एमटीएस ने शहर के ही एक स्थानीय कंपनी को दिया गया है. कंपनी का काम केवल टेक्निकल सहयोग का ही रह गया है. कहा जा रहा है कि उस स्थानीय कंपनी के मालिक कांग्रेस के ही एक स्थानीय युवा नेता हैं. उसी की कंपनी अब एमटीएस के अधीन स्लॉटर हाउस चलाने का काम करेगी. कंपनी का नाम ‘अर्स एंड एलम लाइव स्टोक एक्सपोर्टर’ बताया जा रहा है. इस पूरे मामले की पुष्टि एमटीएस के ओनर सुदेश झा और स्थानीय कंपनी के मालिक ने भी न्यूज विंग से फोन पर हुई बातचीत में की है.
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न्यूज विंग ने प्रकाशित की थी खबर
मालूम हो कि बुधवार को न्यूज विंग ने एक खबर प्रकाशित की थी. प्रकाशित खबर के मुताबिक कांके में 18 करोड़ रुपये की लागत से बने स्लॉटर हाउस का कार्य देख रही कंपनी ‘माइक्रो ट्रांसमिशन सिस्टम’ संभवतः कभी भी बोरिया-बिस्तर बांध काम छोड़ सकती है. ऐसा इसलिए, क्योंकि एक तरफ तो रांची नगर निगम अभी तक शहर की विभिन्न जगहों पर धड़ल्ले से मीट बेच रही दुकानों को बंद कराने में सफल नहीं हो सका है. ऊपर से कंपनी को स्लॉटर हाउस के मेंटेनेंस पर हर माह करीब 13 से 14 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है.
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एमटीएस ओनर ने कहा- शहर में हमारी बात सुनेगा कौन
एमटीएस कंपनी के ओनर सुदेश झा ने भी न्यूज विंग से बातचीत में बताया कि मीट कटाई की डे-टू-डे गतिविधि के लिए ही स्थानीय कंपनी ‘अर्स एंड एलम लाइव स्टोक एक्सपोर्टर’ को स्लॉटर हाउस का काम दिया गया है. उनके मुताबिक अगर स्थानीय कंपनी को काम नहीं देते हैं, तो उनकी बात शहर में सुनेगा कौन. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्लॉटर हाउस के टेक्निकल हिस्सा देखने का काम अंततः एमटीएस ही करेगी. पूरे मामले की जानकारी निगम को होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि संबंधित स्थानीय कंपनी अभी शहर से बाहर है, जल्द ही वह रांची पहुंच कर इससे संबंधित कागजात निगम को उपलब्ध करा देगी.
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समझौते की राशि क्या, कंपनी का यह आंतरिक मामला: सुदेश झा
स्थानीय कंपनी को काम करने के एवज में कितनी राशि दी जाएगी, इस सवाल पर एमटीएस के ओनर सुदेश झा ने बताया कि यह कंपनी का आंतरिक मामला है. हमारा काम किसी तरह से स्लॉटर हाउस अच्छी तरह चले, उसी को ध्यान में रखना है. इसी को ध्यान में रख स्थानीय कंपनी को यह काम दिया गया है. एमटीएस का काम केवल टेक्निकल सहयोग का ही रहेगा. स्लॉटर चलाने में जो भी मुनाफा होगा, वह दोनों पक्षों के बीच शेयर किया जायेगा. वहीं निगम को पूरे कार्य पर 20 प्रतिशत की राशि कंपनी भुगतान करेगी.




