
Dumka: मसानजोर डैम बंगाल का या फिर झारखंड का? डैम की जमीन किसकी, उसके पानी पर किसका अधिकार होना चाहिए. इस तरह के तमाम सवाल संताल के चौक-चौराहों पर चर्चा का विषय बने हुए हैं. इस सवाल पर राजनीति भी खूब हो रही है. चंद दिनों पहले मंत्री लुईस मरांडी ने कहा था कि मसानजोर डैम पर झारखंड का हक है और उसपर नजर डालने वालों की आंखें निकाल ली जाएंगी.
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अब हेमंत सोरेन ने ट्विट कर कहा है कि
बीजेपी को मसानजोर के विस्थापितों से मतलब नहीं, वे सिर्फ वोटबैंक की राजनीति कर रही है. जेएमएम लगातार मसानजोर डैम के विस्थापितों का मुद्दा उठाता रहा है.
इसके साथ ही हेमंत सोरेन ने अपने ट्विट में उन चिट्ठियों को भी अटैच किया है जो समय-समय पर जेएमएम नेताओं ने मसानजोर डैम को लेकर लिखे थे.

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I strongly condemn the pedestrian attitude of @BJP4Jharkhand over the #MasanjoreDam issue. Hardly bothered about people displaced due to the dam, their only concern is vote bank politics. Previously @JmmJharkhand has raised this issue multiple times in the Assembly. 1/2 pic.twitter.com/LakbMyCmi5
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 9, 2018
भावनाओं को भड़काकर हिंसा फैलाना बीजेपी का मकसद- जेएमएम
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कहा कि मसानजोर डैम के मसले पर बीजेपी भावनाओं को भड़काकर वोटबैंक पॉलिटिक्स कर रही है. उन्होने कहा कि बीजेपी झारखंडियों और बंगालियों के बीच हिंसा फैलाना चाहती है. जेएमएम का आरोप है कि पार्टी ने विस्थापितों का मुद्दा उठाया लेकिन उसने कभी गलत भाषा का प्रयोग नहीं किया.

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हेमंत को झारखंड से ज्यादा महागठबंधन की चिंता- बीजेपी
मसानजोर डैम को जेएमएम का पुराना मुद्दा बताये जाने को लेकर बीजेपी ने तंज कसा है. बीजेपी ने कहा है कि अगर हेमंत ये मानते हैं कि मसानजोर डैम पर झारखंड के लोगों का हक होना चाहिए तो वे इसके लिए आवाज उठाएं. दुमका बीजेपी के जिलाध्यक्ष ने कहा कि हेमंत सोरेन इसलिए खामोश हैं क्योंकि उन्हे ममता बनर्जी के साथ बन रहे महागठबंधन की चिंता ज्यादा है और झारखंड के लोगों के हक की कम. उन्होने कहा कि हेमंत बताएं कि उन्होने चिट्ठियां लिखने के अलावा विस्थापितों के लिए क्या किया. अब जब बीजेपी झारखंड के लोगों को न्याय दिलाने के लिए लड़ रही है तो जनता के आक्रोश से बचने के लिए वे पुराने खत दिखा रहे हैं.
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मसानजोर पर यथास्थिति बनाए रखने पर सहमति
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बुधवार को वीरभूम और दुमका के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बैठक हुई. लगभग तीन घंटे तक चली इस बैठक के बाद ये तय हुआ कि मसानजोर पर फिलहाल यथास्थिति बरकरार रखी जाएगी. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वीरभूम के डीएम किसी कारणवश बैठक में नहीं आ सके. उनकी जगह वीरभूम के एडीएम और कार्यपालक अभियंता बैठक में शामिल हुए.
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