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मसानजोर डैम की तरफ आंख उठाकर देखने वाले की आंखें निकाल ली जायेगीः लुईस मरांडी

मसानजोर डैम को लेकर झारखंड और बंगाल सरकार के बीच घमासान

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Dumka: मसानजोर डैम की तरफ कोई भी आंख उठाकर देखेगा, उसकी आंखे निकाल ली जायेंगी. ये बातें समाज कल्याण मंत्री डॉ. लुईस मरांडी ने प्रेसवार्ता के दौरान मसानजोर में कही. मंत्री ने बंगाल सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास डीड है, तो उसको सार्वजानिक करें, लोग जानना चाहते हैं कि डीड कितने वर्षों का है. बंगाल सरकार अपनी डीड अनुरूप कार्य करे. कांग्रेस के शासन काल में हुए बंगाल और बिहार सरकार के बीच के वार्ता में अब गड़बड़ी होने की आशंका है. बंगाल सरकार वार्ता के दौराने हुए समझौते के कागजात सार्वजनिक नहीं कर रही है. दोनों राज्यों के बीच हुए वार्ता की निर्धारित समय तिथि समाप्त हो चुकी है.

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मंत्री लुईस ने कहा कि डैम की जमीन सड़क का हिस्सा नहीं है. बंगाल सरकार बताए कि बोर्ड लगाने की अनुमति किसने दी है. मंत्री ने कहा कि मसानजोर झारखंड क्षेत्र में आता है और राज्य सरकार अपनी सहमति के अनुसार कार्य करेगी. डैम का रंग पूर्व की तरह ही होगा. बोर्ड पर भी झारखंड लिखा होगा.

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बंगाल सरकार ने लगा दिया अपना बोर्ड

डॉ. लुईस मरांडी ने बताया कि बंगाल की पुलिस ने बीत दिनों झारखंड में अपनी गतिविधि बढ़ा दी गई थी. इसकी सूचना उनको संगठन के माध्यम से मिली. उन्होने बताया कि दो वर्ष पूर्व यह बोर्ड नहीं लगाया गया था. सड़क के बनते ही बंगाल सरकार ने बिना किसी जानकारी और अनुमति लिए अपना बोर्ड लगा दिया. उन्होने कहा कि यह जमीन दुमका क्षेत्र के अंदर आती है. इस क्षेत्र में होने वाली समस्याओं को वह स्वयं हल करती हैं और करेंगी. उन्होने बताया कि कुछ दिन पूर्व जब वह इस मार्ग से गुजर रही थी, तो बोर्ड में ‘वेल कम टू मसानजोर, बंगाल सरकार’ लिखा हुआ था. मंत्री ने कहा कि संगठन ने निर्णय लिया है कि क्षेत्र झारखंड का है और बोर्ड में भी झारखंड लिखा होना चाहिए.

मसानजोर डैम के पास प्रदर्शन करते बीजेपी कार्यकर्ता
मसानजोर डैम के पास प्रदर्शन करते बीजेपी कार्यकर्ता

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सीमा पर भाजपा और तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच तनाव

यहां बता दें कि असम में लागू एनसीआर के बाद रोहिंग्या मुसलमान और बंगालादेशी घुसपैठ मामले को लेकर पश्चिम बंगाल और झारखंड सरकार के बीच तल्खी बढ़ गई है. पश्चिम बंगाल के बीते पंचायत चुनाव में दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में तृणमूल और भाजपा के कार्यकर्त्ताओं के बीच नोंक-झोंक भी हुई थी. बंगाल सरकार द्वारा भाजपा पर उनके उम्मीदवारों को परेशान करने का आरोप लगाया गया था. इसके बाद तृणमूल कार्यकर्त्ताओं ने भाजपा के कार्यकर्त्ताओं के घर पर पार्टी का झंडा लगाने से रोकने की धमकी दी थी. जबाब में मंत्री डॉ. लुईस मरांडी बंगाल सीमा पर पहुंच ममता सरकार को ललकारी थी. इसके बाद मसानजोर डैम के आसपास मां, माटी और मानुष के नाम के बोर्ड लगाए गये. भाजपा जिला अध्यक्ष निवास मंडल ने विरोध करते हुए झारखंड सरकार के अधिग्रहित जमीन, दरबारपुर गांव में, प्रवेश द्वार पर लगे गेट पर झारखंड का लोगों लगाया था. बंगाल पुलिस ने इसे पुनः द्वारा हटाकर बंगाल सरकार का लोगों लगा दिया था.

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विस्थापितों को हक दिलाने के लिए मंत्री ने ली शपथ

मसानजोर डैम के विस्थापित मामले में डॉ. लुईस मरांडी ने कहा कि विस्थापितों के हक के लिए वे जमीन-आसमान एक कर देंगी. मंत्री ने संकल्प लिया कि विस्थापितों को उनका अधिकार दिलाकर ही वो दम लेंगी. किसी भी हाल में विस्थापितों का हक मिलेगा. उन्होने कहा कि 144 मौजा के जितने भी विस्थापित हैं, उनको उनका हक मिलेगा.

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डैम के आसपास बंगाल के लोगों को बसा रही है बंगाल सरकार

मसानजोर डैम का निर्माण 1950 में शुरू किया गया और 1955 में निर्माण कार्य पूरा किया हुआ. मंत्री ने कहा कि 144 मौजा के लोग मसानजोर डैम के पानी तक से वंचित हैं. किसी को सही तरीके से मुआवजा भी नहीं मिला. डैम के पानी से उत्त्पन्न होने वाली बिजली भी झारखंड को नहीं मिल पाती है. मसानजोर डैम के कारण 140 गांव के ग्रामीण विस्थापित हुए हैं. बंगाल सरकार अपने लोगों को वहां बसा रही है. मंत्री ने बंगाल सरकार को चैलेंज करते हुए कहा कि जबतक वह रहेंगी बंगाल के लोगों को 144 मौजा के आड़ में बसने नहीं देंगी.

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