
Ranchi: केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीति और झारखंड सरकार के नौकरशाहों के कार्पोरेट परस्त रवैये से उपजे मुद्दों से जुड़े 14 सूत्री मांगों को लेकर झारखंड के मजदूर व कर्मचारी कल यानि 6 जून को श्रम भवन के समक्ष विशाल प्रदर्शन करेंगे. धरना प्रदर्शन के पूर्व डोरंडा के श्रीकृष्ण सिंह पार्क से एक रैली भी निकाली जाएगी. सीटू झारखंड राज्य कमिटी के आह्वान पर आयोजित हो रहे इस विरोध प्रदर्शन के संबंध में झारखंड सीटू के महासचिव बिश्वजीत देब ने बताया कि आज जनता के साथ-साथ देश की स्थिति चिंताजनक एवं गंभीर है. केंद्र की मौजूदा नीतियां न केवल मजदूर, किसान और जनविरोधी है, बल्कि राष्ट्रविरोधी भी है. इससे हमारी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ देश की एकता और अखंडता भी प्रभावित हो रही है. देश की मेहनतकश जनता बेरोजगारी एवं मंहगाई के साथ-साथ कल्याणकारी योजनाओं ,सामाजिक सुरक्षा और सब्सिडी के लिए बजटीय आवंटन में लगातार कमी की मार झेल रही है.
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सीटू के कार्यकारी अध्यक्ष भवन सिंह ने कहा है कि वर्तमान राज्य सरकार की घोषणाओं के बावजूद यहां के कारपोरेट प्रभावित नौकरशाहों के मजदूर विरोधी रवैये के कारण, स्थाई रोजगार में भारी गिरावट तथा अनुबन्धित कर्मचारी, आउटसोर्स कर्मचारी , GIG वर्कर, प्रवासी मजदूर, स्व-नियोजित युवा आदि कामगारों के बढ़ते संख्या तथा बिगड़ती कामकाजी परिस्थितियों के बावजूद, EPF, ESI, मातृत्व लाभ सह अन्य सामाजिक सुरक्षा और कानूनी कवरेज सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक पहल की भारी कमी गहरी चिंता की विषय बनी हुई है. एक तरफ सार्वजनिक क्षेत्र और बड़े औद्योगिक घरानों में भी स्थाई प्रकृति का काम ठेका श्रमिकों के माध्यम से कराया जाता है तो वहीं छोटे ठेकेदारों से लेकर बड़े उद्योगपतियों द्वारा श्रम कानूनों का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है; दूसरी ओर न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण, सभी श्रेणियों के कामगारों को अनुसूची में सूचीबद्ध करने और अधिसूचनाओं के कार्यान्वयन के क्षेत्रों में घोर कमी व्याप्त है, जिससे कामगारों के लिए संकट पैदा हो गया है, पीड़ित मजदूरों को न्याय पाने की विलंबित प्रक्रिया एक क्रूर सच्चाई है.
इस मौके पर कोषाध्यक्ष अनिर्बन बोस ने नीतिगत कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, श्रम कानूनों के दायरे में नहीं आने वाले श्रमिक, स्व-नियोजित युवा के सामने अपने जीवन और आजीविका पर संकट का सामना करने की बात कही तो वहीं राज्य कमेटी सदस्य प्रतीक ने आंगनबाड़ी सेविका/सहायिका, मिड डे मील वर्कर तथा सहिया कामगारों को सामाजिक एवं कानूनी सुरक्षा तथा न्यूनतम मजदूरी जैसे अधिकारों से वंचित रखे जाने पर चिंता जताई. नेताओं ने इन मुद्दों से संबंधित 14 सूत्री मांग पत्र झारखंड सरकार के श्रम मंत्री को संबोधित करते हुए जिला श्रम कार्यालयों में प्रस्तुत किए जाने की बता कही. राज्य भर से करीब 3000 कार्यकर्ता धरना-प्रदर्शन में शामिल होंगे और प्रदर्शन के बाद सीटू का प्रतिनिधिमंडल ज्ञापन सौंपेगा. .
प्रमुख मांगें
(1) श्रम विभाग द्वारा बनाए गए 4 LABOUR CODES के प्रारूपित नियमों पर ट्रेड यूनियनों के साथ चर्चा सुनिश्चित करें।
(2) न्यूनतम मजदूरी अनुसूची में गैर-सूचीबद्ध GIG WORKERS सहित सभी कामगारों को शामिल करें और न्यूनतम मजदूरी परामर्शदातृ पर्षद की बैठक बुलाकर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा दिए गए प्रस्ताव के अनुसार न्यूनतम मजदूरी दर में वृद्धि करें।
(3) निजी औद्योगिक घरानों द्वारा प्रमुख नियोक्ता के रूप में नियुक्त किए जा रहे, ठेका, प्रशिक्षु, अपरेंटिस, NEEM, कैजुअल, आउटसोर्स आदि कामगारों के लिए श्रम कानूनों के कवरेज के उल्लंघन के खिलाफ निरीक्षण और अभियोजन सुनिश्चित करें।
(4) असंगठित श्रमिक सहित सभी कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा और कानूनी कवरेज तथा दोषी नियोक्ताओं को दंडित करना सुनिश्चित करें.
(5) ठेका,अस्थायी, आउटसोर्स कामगार का नियमितीकरण तथा समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित करें ; स्थायी प्रकृति का नौकरियों के ठेकाकरण पर रोक लगाए ।
(6) सरकारी परियोजना कर्मियों (Scheme Workers) एवं अनुबन्धित कर्मचारियों के लिए वैधानिक न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करें तथा सरकारी विभागों में सेवा नियमित करें। ग्रेच्युटी, पेंशन , 12 महीने वेतन एवं काम करने की स्थिति में सुधार सुनिश्चित करें
(7) निर्माण श्रमिकों एवं बीड़ी श्रमिकों के कल्याण बोर्डों की निधियों का पारदर्शी संचालन सुनिश्चित करें ।
(8) न्यूनतम मजदूरी अधिनियम द्वारा कवर नहीं किए गए प्रवासी मजदूर , अनौपचारिक और GIG WORKERS आदि के लिए कल्याण बोर्ड का गठन करें।
(9) प्रवासी श्रमिकों, ई-श्रम एवं अन्य पोर्टलों में पंजीकृत श्रमिकों सहित विभिन्न श्रेणियों के असंगठित कामगारों को घोषित सुविधाओं सहित राशन कार्ड की उपलब्धता सुनिश्चित करें, श्रम हित में उपलब्ध समस्त केन्द्रीय एवं राज्य सरकार के श्रम पोर्टलों के बारे में समुचित प्रचार किया जाए।
(10) मनरेगा के लिए आवंटन में वृद्धि तथा शहरी क्षेत्रों में रोजगार गारंटी योजना का विस्तार सुनिश्चित करें।
(11) ट्रेड यूनियनों के पुन: पंजीकरण और पंजीकरण की प्रक्रिया की समयबद्धता सुनिश्चित करें।
(12) नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत 1 मई (मई दिवस) को अवकाश घोषित करें।
(13) श्रम रोजगार एवं कौशल विकास विभाग में रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति एवं विभाग में पारदर्शी कार्यप्रणाली सुनिश्चित करें ।
(14) श्रम कानूनों का सख्ती से क्रियान्वयन तथा श्रम विभाग की श्रमिक हितैषी भूमिका सुनिश्चित करें। पारदर्शिता के साथ श्रमिक संघों के प्रतिनिधियों वाली संयुक्त समितियों का पुनर्गठन सुनिश्चित करें।




