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पलामू: PM से मन की बात करने वाली अनिता के गांव में बिजली व्यवस्था का बुरा हाल, बांस-बल्ली के सहारे पहुंची है बिजली

Daltonganj : देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से गत 19 जुलाई को सौभाग्य योजना पर मन की बात कर बिजली मिलने से हो रहे फायदे को गिनाने वाली अनिता देवी के गांव में बिजली व्यवस्था का बुरा हाल है. प्रधानमंत्री से बात कर अनिता देवी द्वारा बिजली से हो रहे फायदों का तो बड़ा-बड़ा बखान किया गया, लेकिन इसकी वास्तविक स्थिति दूर-दूर तक नजर नहीं आती. गांव की सड़क काफी जर्जर हालत में है. वहीं बांस-बल्ली के सहारे गांव में बिजली पहुंची है.

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पलामू जिला मुख्यालय डालटनगंज से महज पांच से सात किलोमीटर दूर चैनपुर प्रखंड अंतर्गत हरभोंगा गांव है. यहां बिजली लाने की व्यवस्था देख आप दंग रह जायेंगे. बिजली पहुंचने पर इस गांव में हो रहे कथित फायदे के कारण इस गांव की पहचान देशस्तर पर हो चुकी है, लेकिन इसकी हकीकत तो कुछ और ही बयां करती है.

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कैसे पहुंची है यहां बिजली?

हरभोंगा गांव में बिजली बांस और बल्ली के सहारे गांव में पहुंची है. गांव में जाने पर बिजली के कई खंभे तो नजर आयेंगे, लेकिन उसपर बिजली के तार नहीं लगाए गए हैं. गांव में बिजली भगवान भरोसे रहती है. गांव के युवा चंदन ने बताया कि गांव में बिजली के खंभे लंबे समय से गड़े हुए हैं, लेकिन उसपर बिजली के तार नहीं लगाए गए हैं. मजबूरन बांस के सहारे बिजली ग्रामीणों द्वारा दूर से लायी गयी है. एक फेज बिजली रहने के कारण हमेशा फाल्ट होते रहता है. ट्रांसफार्मर की स्थिति तो काफी जर्जर है.

खुद के पैसे से बनवाते हैं फाल्ट

गांव की महिला कमला देवी ने बताती है कि अक्सर ट्रांसफार्मर में फाल्ट आने पर दो-से तीन दिनों तक गांव में बिजली नहीं रहती. सूचना देने पर बड़ी मुश्किल से मिस्त्री गांव में आते हैं. जिसके बाद गांव वाले खुद से पैसे जुटाकर फाल्ट ठीक करते हैं. देवनाथ बताते हैं कि बिजली की नियमित आपूर्ति उनके गांव हरभोंगा में नहीं होती है. इससे अच्छा तो ढिबरी युग की था. कम से कम यह विश्वास था कि जब तक तेल रहेगा, दीया जलता रहेगा.

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क्या था अनिता के घर का हाल

इन सबके बीच खोजते-खोजते हम आखिरकर मंजिल तक पहुंच गए. घर से अनिता देवी निकली. अनिता ने पीएम मोदी से बात की थी और बताया था कि गांव में बिजली आने से गांव की तस्वीर बदल गयी है. अनिता के घर में बिजली तो है. दो बल्ब के होल्डर भी दिखे, लेकिन किसी में भी बल्ब नहीं था. खुद अनिता के घर भी बिजली बांस-बल्ली के सहारे पहुंची थी.

क्या कहा अनिता देवी ने

दरअसल, अनिता गांव के स्वयः सहायता समूह की सदस्य है और इसी दौरान अनिता का चयन बिजली विभाग ने पीएम से बात करने के लिए चुना था. अनिता बताती है कि समूह के कर्ताधर्ता ने उससे कहा था कि डीडीसी साहब इंटरव्यू लेंगे. मैं आ गयी. जैसा बताया गया मैं वैसा बोली. बिजली गांव में है, यही जानकारी दी. बिजली कैसे आयी, इसके बारे में कुछ नहीं पूछा गया, इसलिए जानकारी नहीं दी.

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यह तो सच है कि पीएम मोदी की सरकार में गांव-गांव तक बिजली पहुंची है, लेकिन क्या गांव मात्र में बिजली पहुंचा देना ही सरकार का लक्ष्य है. बिजली कितने देर रहती है. कैसे संचालित होती है क्या इसपर सरकार को काम करने की जरूरत नहीं है.

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