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Dhanbad: सिंदरी में आयोजित श्रीराम कथा के अंतिम दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

Dhanbad: शहरपुरा शिव मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा का मंगलवार को समापन हुआ. कथा व्यास डॉ अमृता करूणेश्वरी ने अंतिम दिन की कथा में लंका दहन, राम-रावण युद्ध, विभीषण का राज्याभिषेक सहित राजा राम के राज तिलक प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया. साथ ही ने सुंदर कांड के माध्यम से पवन पुत्र हनुमान के चरित्र का भी वर्णन किया. हनुमानजी के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लोगों ने जब हनुमानजी से कहा कि आप भगवान श्रीराम की सेवा के लिए ही अवतरित हुए हैं. तो आप उनके कार्य पूरे करो.

इस पर हनुमानजी ने लंका जाकर रावण को मारने और माता सीता को वापस लाने की बात कही. जिसे सुन सभी लोग डर गए और ऐसा करने से मना कर दिया. कथा व्यास डॉ अमृता करूणेश्वरी ने वर्तमान सामाजिक व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज कलयुग की मार से बूढ़ा बाप लंगड़ा हो गया है और बेटा अंधा हो गया है. यदि समाज में भ्रष्टाचार और आतंकवाद को मिटाना है तो ताकत युवा की और दिमाग किसी बुजुर्ग का, जोश जवान का और होश बुढ़ापे का साथ होना जरूरी है. तभी पूरे राष्ट्र का उत्थान हो सकेगा.

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 अंतिम दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

श्री रामकथा के अंतिम दिन भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी. कथा व्यास डॉ अमृता करूणेश्वरी ने लंका काण्ड का मार्मिक वर्णन करने हुए कहा कि शान्ति के सारे प्रयास असफल हो जाने पर युद्ध आरम्भ हो गया. लक्ष्मण और मेघनाद के मध्य घोर युद्ध हुआ. शक्तिबाण के वार से लक्ष्मण मूच्र्छित हो गये. उनके उपचार के लिये हनुमान सुषेण वैद्य को ले आये और संजीवनी लाने के लिये चले गये. गुप्तचर से समाचार मिलने पर रावण ने हनुमान के कार्य में बाधा के लिये कालनेमि को भेजा जिसका हनुमान ने वध कर दिया. औषधि की पहचान न होने के कारण हनुमान पूरे पर्वत को ही उठा कर वापस चले.

 

 

 

मार्ग में हनुमान को राक्षस होने के सन्देह में भरत ने बाण मार कर मूच्र्छित कर दिया परन्तु सच जानने पर अपने बाण पर बिठा कर वापस लंका भेज दिया. इधर, औषधि आने में विलम्ब देख कर राम प्रलाप करने लगे. सही समय पर हनुमान औषधि लेकर आ गये और सुषेण के उपचार से लक्ष्मण स्वस्थ हो गये. रावण ने युद्ध के लिये कुम्भकर्ण को जगाया. युद्ध में कुम्भकर्ण ने राम के हाथों परमगति प्राप्त की. लक्ष्मण ने मेघनाद से युद्ध करके उसका वध कर दिया. राम और रावण के मध्य अनेकों घोर युद्ध हुये और अन्त में रावण राम के हाथों मारा गया.

विभीषण को लंका का राज्य सौंप कर राम, सीता और लक्ष्मण के साथ पुष्पक विमान से अयोध्या के लिये प्रस्थान किया. सीता, लक्ष्मण और समस्त वानरसेना के साथ राम अयोध्या वापस पहुंचे. राम का भव्य स्वागत हुआ. भरत के साथ सर्वजनों में आनन्द व्याप्त हो गया. वेदों और शिव की स्तुति के साथ राम का राज्याभिषेक हुआ. चारों भाइयों के दो-दो पुत्र हुये. रामराज्य एक आदर्श बन गया. कथा के दौरान झांकियां भी प्रस्तुत की गई.

रामायाण हमें जीना सिखाती है : डॉ अमृता करूणेश्वरी 

कथा व्यास डॉ अमृता करूणेश्वरी ने कहा कि रामायण हमें जीने के तरीके सिखाती है. कथा व्यास ने श्रीराम कथा का वर्णन करते हुए कहा गया कि दूसरों की सम्पत्ति चाहे कितनी भी मूल्यवान हो उस पर हमारा कोई अधिकार नहीं है. चौदह वर्ष वनवास पूर्ण करने के बाद भगवान श्रीराम जब वापस अयोध्या पहुंचे तो अयोध्यावासी खुशियों से झूम उठे. रामायण हमें आदर, सेवा भाव, त्याग व बलिदान के साथ दूसरों की सम्पत्ति पर हमारा कोई अधिकार नहीं है, ऐसा सिखाती है.

उन्होंने बताया कि जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने दीन-दुखियों, वनवासियों आदिवासियों के कष्ट दूर करते हुए, उन्हें संगठित करने का कार्य किया एवं उस संगठित शक्ति के द्वारा ही समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर किया. हर राम भक्त का दायित्व है कि पुनीत कार्य में अपना सहयोग प्रदान करें. यह राम कार्य है. बताया कि बुराई और असत्य ज्यादा समय तक नहीं चलता. अन्तत: अच्छाई और सत्य की जय होती है. अधर्म पर धर्म की जीत हमेशा होती आई है.

श्रीराम के राज्याभिषेक के प्रसंग के दौरान पूरे पंडाल में पुष्पों की वर्षा भक्तों द्वारा की गई. कथा के समापन अवसर पर श्री राम कथा आयोजन समिति के तत्वाधान में मंगलवार की सुबह हवन का भी आयोजन किया गया. कल बुधवार को भंडारा का आयोजन किया गया है.

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