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11 अप्रैल को हेमंत सरकार के खिलाफ भाजपा का उलगुलान, प्रोजेक्ट भवन के घेराव के जरिये पार्टी दिखाएगी ताकत

Ranchi: प्रदेश भाजपा हेमंत सरकार के खिलाफ उलगुलान करने को अपनी तैयारी पूरी कर चुकी है. सांसद और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने पार्टी कार्यालय में सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बिचौलियों से घिरी इस जनविरोधी सरकार से राज्य की 3.50 करोड़ जनता अब त्रस्त हो चुकी है. पूर्व में पंचायत, प्रखंड स्तर पर भाजपा ने जनांदोलनों के जरिये संघर्ष दिखाया था. अब 11 अप्रैल को राज्य स्तर पर उलगुलान का डंका बजेगा. इस दिन प्रोजेक्ट भवन का ऐतिहासिक घेराव होगा.
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भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार इस प्रोग्राम से डर गयी है. वह हिंसा का सहारा ले सकती है. खूंटी, धनबाद सहित अन्य जिलों में स्थानीय थानेदार भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं को रांची जाने से चेता रहे हैं. बस मालिकों को भी धमकी दी जा रही है. घेराव कार्यक्रम के लिए दूसरे दलों द्वारा हिसाब किताब मांगे जाने पर दीपक ने कहा कि पार्टी पूरी पारदर्शिता, जवाबदेही से काम करती है. ऐसे में जिसे हिसाब जानना हो, उनसे संपर्क करे. साथ ही उन्होंने प्रशासनिक पदाधिकारियों से घेराव कार्यक्रम के दौरान ईमानदारीपूर्वक अपना कर्तव्य निभाने की अपील की. मौके पर पूर्व विधायक गंगोत्री कुजूर और सह मीडिया प्रभारी अशोक बड़ाईक भी मौजूद थे.

प्रचार वाहन को किया झंडा दिखाकर रवाना

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवम सांसद दीपक प्रकाश और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 11अप्रैल के कार्यक्रम के लिए दो प्रचार वाहन को झंडी दिखाकर सोमवार को रवाना किया. इससे पूर्व दोनों ने नारियल फोड़ विधिवत पूजन किया एवं एक दूसरे को मिठाई खिलायी.इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री एवं सांसद आदित्य साहू, बालमुकुंद सहाय, प्रदीप वर्मा, शिवपूजन पाठक,प्रतुल शाहदेव, अमित कुमार, अशोक बड़ाईक, अविनेश कुमार,केके गुप्ता, संजय जयसवाल, शोभा यादव, सूर्य प्रभात, सतीश सिन्हा, राहुल शाहदेव सहित कई अन्य भी उपस्थित थे.

आखिर घेराव क्यों

दीपक प्रकाश ने कहा कि अभी राज्य और देश में सबसे विफल हेमंत सोरेन सरकार ही है. राज्य में अराजकता की स्थिति है. चुनाव के समय महागठबंधन ने घोषणा पत्र में वादा किया था कि हर वर्ष 5 लाख युवाओं को नौकरी देंगे. ऐसा नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता देंगे. यहां तक कि सीएम ने खुद बाद में कहा था कि अगर वे 5 लाख नौकरी नहीं दिला सके तो राजनीति से संन्यास ले लेंगे. पर ऐसा नहीं हो सका है. प्राकृतिक संसाधनों, मानव संसाधनों से भरपूर इस राज्य के नौजवान जहां तहां भटक रहे हैं. सड़कों पर उतर कर अपने लिए न्याय मांग रहे हैं तो लाठियां मिल रही हैं.

भ्रष्टाचार चरम पर है. बिचौलिये ही सरकार चला रहे हैं. प्रदेश में बेरोज़गारी दर राष्ट्रीय दर से दोगुना हो चुका है जबकि 3 लाख 27 हजार हज़ार पद रिक्त पड़े हैं. स्वास्थ्य विभाग में 73% पद, कृषि विभाग में 72% पद, ग्रामीण विभाग में 73% पद रिक्त हैं. रजिस्टर्ड बेरोज़गारों की संख्या 2019 के तुलना में 8 गुना बढ़कर 85122 से बढ़कर 676855 हो गयी है. वास्तव में सरकार के नियत में खोट है. नौकरी देना सरकार के नियत में ही नहीं है.

385300 ग्राम आवास की स्वीकृति होने के बावजूद मात्र 41000 आवास ही बन पाए हैं. झारखंड में प्रति व्यक्ति आय 85400 है जबकि देश में 1.97 लाख प्रति व्यक्ति है. तीन वर्षों में लगभग डेढ़ लाख से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गये हैं. बहन बेटियों की इज्जत तार तार किया जा रहा है. प्रत्येक दिन हत्या का प्रतिशत भी देश के आँकड़े से कहीं ज़्यादा है. नक्सल घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. बिचौलियों के लिए सरकार कार्य कर रही है. पूरे देश की सबसे निकृष्ट सरकार हेमंत सरकार है. राज्य में वित्तीय अराजकता की स्थिति है. अधिकारियों के यहाँ छापे पड़ने पर जेएमएम, कांग्रेस और राजद के पेट में दर्द हो रहा है.

सरकार तुष्टिकरण की राजनीति और वोट बैंक के कारण विशेष लोगों को, अपराधियों को संरक्षण दिया जा रहा है. इससे संताल परगना की डेमोग्राफिक चेंज हो गयी है. हिंसात्मक घटनाओं को अंजाम देने वालों को सरकार संरक्षण दे रही है.

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