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CHAKRADHARPUR : झामुमो में फिर से वापसी कर रही है जिप अध्यक्ष लक्ष्मी सुरिन, पार्टी में मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी 

CHAKRADHARPUR : झामुमो के समर्थन के बाद जिला परिषद अध्यक्ष बनी लक्ष्मी सुरिन ने एक बार फिर से झामुमो में अपनी घर वापसी की कोशिशें तेज कर दी हैं. हालांकि पार्टी बेसिस पर चुनाव नहीं हुआ था फिर भी जीत के बाद जश्न में चक्रधरपुर ,चाईबासा , मझगांव विधायक के साथ फोटो आने के बाद झामुमो में वापस आने का चर्चा तेज हो गई थी. बता दें कि लक्ष्मी सुरिन वर्ष 2019 में पार्टी के विरुद्ध जाते हुए जगन्नाथपुर विधानसभा से चुनाव लड़ी थी. जबकि झामुमो कांग्रेस प्रत्याशी सोनाराम सिंकू को समर्थन दे रही थी. उस दौरान लक्ष्मी सुरिन के द्वारा पार्टी विरोधी कार्य करने पर उसे झामुमो से निष्कासित कर दिया गया था. लेकिन लगातार तीन बार जिला परिषद् चुनाव जीतने व इस बार जिला परिषद् अध्यक्ष बनने के बाद वह घर वापसी की राह देख रही हैं. (नीचे भी पढ़ें)

इस सम्बन्ध में लक्ष्मी सुरिन ने चक्रधरपुर के विधायक सह झामुमो जिला अध्यक्ष सुखराम उराँव को पत्र लिखकर उनके निष्कासन को वापस लेते हुए उन्हें फिर से झामुमो में शामिल करने की मांग की है. पत्र मिलने के बाद जिला अध्यक्ष श्री उरांव ने त्वरित कार्रवाई करते हुए झामुमो केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन को लक्ष्मी सोरेन के द्वारा निष्कासन वापसी हेतु लिखा पत्र अनुशंसा करते हुए अग्रसित कर दिया है. बता दें कि लक्ष्मी सुरिन झामुमो से निष्कासित होने के बावजूद भी पार्टी के काफी करीब थी. झामुमो ने जिला परिषद् चुनाव से लेकर उन्हें अध्यक्ष बनाने तक समर्थन दिया. यही नहीं जिला परिषद् अध्यक्ष के चुनाव से ठीक पहले झामुमो जिला अध्यक्ष सुखराम उराँव पार्टी समर्थित सभी जीते हुए जिप सदस्यों को साथ लेकर झामुमो कार्यकारी अध्यक्ष सह सीएम हेमन्त सोरेन से रांची में मुलाक़ात की थी. इस मुलाकात में लक्ष्मी सुरिन भी साथ थी. (नीचे भी पढ़ें) 

पार्टी में नहीं रहते हुए भी लक्ष्मी सुरिन पर पार्टी का इतना बड़ा विश्वास इतना बताने के लिए काफी है की लक्ष्मी सुरिन एक बड़ा चेहरा बनकर झामुमो में उभर रही हैं. पार्टी में फिर से शामिल होने का लक्ष्मी सुरिन का आवेदन महज एक औपचारिकता माना जा रहा है. जल्द ही उन्हें पार्टी की सदस्यता देते हुए लक्ष्मी सुरिन को पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी भी दी जा सकती है. इधर लक्ष्मी सुरिन के झामुमो में वापसी से कांग्रेस को परेशानी हो सकती है क्योंकि लक्ष्मी सुरिन ने उन्हीं के प्रत्याशी के खिलाफ जगन्नाथपुर में चुनाव लड़ने का साहस दिखाया था. विधानसभा चुनाव में सोनाराम सिंकू 32499 वोट लाकर विधायक बन गए थे. वहीँ लक्ष्मी सुरिन को 6617 वोट मिले थे और वह 14 प्रत्याशियों के बीच पांचवें नंबर पर थी.

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