
Jamshedpur: 15 दिन के अंदर टाटा कमिंस वर्कर्स यूनियन के चुनाव कराने की समय सीमा खत्म होने के बाद भी कोई सुगबुगाहट नहीं है और प्रबंधन और यूनियन में अघोषित शांति दिख रही है. 9 अप्रैल को शहर आए अनूप सिंह ने प्रबंधन को चुनाव के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था और कहा था कि अगर प्रबंधन इस 15 दिन में चुनाव प्रक्रिया को शुरू नहीं कराता तो वह प्रशासन की देखरेख में चुनाव कराने की सिफारिश करेंगे. लेकिन 16 दिन बितने पर भी न तो प्रबंधन और न ही यूनियन चुनाव को लेकर किसी तरह की बैठक बुलाई है.
अनूप सिंह ने साफ कर दिया था कि चुनाव में प्रबंधन का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा. चुनाव में चुनकर आए कमेटी मेंबर्स तय करेंगे कि अध्यक्ष बाहरी होगा या अंदर का. प्रबंधन यह तय नहीं करेगा कि अध्यक्ष अंदर का होगा. उल्लेखनीय है कि प्रबंधन ने यूनियन की स्टीयरिंग मीटिंग में साफ कर दिया है कि यूनियन का अध्यक्ष इंटर्नल होना चाहिए. इसे लेकर अभी भी प्रबंधन और अनूप सिंह में एका नहीं है. यह बात अलग है कि प्रबंधन ने प्लांट के अंदर अनूप सिंह के साथ बैठक कर टकराव को खत्म करने का प्रयास किया है.
अब आगे क्या?
ट्रेड यूनियन के विशेषज्ञों का कहना है कि अनूप सिंह को यह अधिकार नहीं है कि वह जिला प्रशासन की देखरेख में चुनाव कराने की अनुशंसा करें. ट्रेड यूनियन एक्ट के अनुसार यह आदेश केवल कोर्ट दे सकता है. यूनियन चुनाव में प्रशासन की सीधी भागीदारी नहीं होती है, जब तक कि यूनियन कोर्ट में यह मांग नहीं रखें कि जिला प्रशासन की देखरेख में चुनाव हो. ऐसे में प्रबंधन अगर अड़ जाय कि अनूप सिंह को नहीं आने देना है तो उनके लिए यूनियन अध्यक्ष बन पाना मुश्किल होगा. यही नहीं इस मामले के राजनीतिक रंग लेने और टाटा समूह के शीर्ष अधिकारियों पर केस होने के बाद टाटा कमिंस प्रबंधन वेट एंड वाच की स्थिति में है. हेमंत सरकार की स्थिरता को लेकर जिस तरह से अंदरखाने की खबर आ रही हैं, वैसे में प्रबंधन की कोशिश है कि अगर सरकार बदलती है तो फिर आगे बढ़ा जाय. लेकिन अब देखना यह है कि 15 दिन की समय सीमा खत्म होने के बाद अनूप सिंह का अगला कदम क्या होता है?
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