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Jamshedpur: तो क्या टाटा कमिंस के ग्रेड की अवधि भी चार साल की हो जाएगी…

Jamshedpur: टाटा मोटर्स में ग्रेड समझौता होने के बाद टाटा कमिंस में ग्रेड को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. कंपनी के कर्मचारियों को यह डर सताने लगा है कि कहीं टाटा कमिंस प्रबंधन भी टाटा मोटर्स की तर्ज पर ग्रेड की अवधि को तीन साल से बढ़ाकर चार साल नहीं कर दें. टाटा कमिंस में ग्रेड अमूमन टाटा मोटर्स की तर्ज पर ही होता है. ऐसे में टाटा कमिंस वर्कर्स यूनियन के नेताओं के साथ ही कर्मचारियों के बीच भी ग्रेड को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है. यूनियन के चुनाव को लेकर जारी विवाद के चलते यह भी माना जा रहा है कि कहीं प्रबंधन, स्टीयरिंग कमेटी के साथ ही ग्रेड समझौता नहीं कर लें. कर्मचारियों का कहना है कि अभी नई यूनियन के अस्तित्व में नहीं आने के चलते प्रबंधन ग्रेड में अपने मन के अनुसार बदलाव कर सकता है.
चुनाव को लेकर फिर चुपी साधी यूनियन ने
हाल ही में अनूप सिंह के प्लांट दौरे के बाद लगा कि चुनाव जल्द हो जाएगा. लेकिन एक बार फिर चुनाव को लेकर प्रबंधन-यूनियन ने चुप्पी साध ली है. वैसे अनूप सिंह ने साफ कर दिया है कि चुनाव यूनियन की देखरेख में होगा. प्रबंधन का किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं होगा. अगर प्रबंधन हस्तक्षेप करेगा या चुनाव कराने में लेटलतीफी करेगा तो वह प्रशासन की देखरेख में चुनाव कराने की मांग करेंगे. लगभग दो साल से प्रबंधन और अनूप सिंह के बीच चल रही रस्‍साकशी के बाद हाल ही पैच अप हुआ है, लेकिन चुनाव नहीं होने से ग्रेड में देरी हो रही है.
13 माह से लंबित है चुनाव
यूनियन का चुनाव लंबित हुए 13 माह हो गए. यही नहीं, इस एक अप्रैल से ग्रेड और जीआईएस (ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम) लंबित हो गया. किसी यूनियन के अस्तित्व में नहीं होने के चलते प्रबंधन और यूनियन के बीच कोई समझौता नहीं हो पा रहा है. सूत्रों का कहना है कि अभी तक चुनाव होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं.
2018 में हुआ था पिछला चुनाव
तीन साल से यूनियन का मुकम्मल अस्तित्व नहीं है. 2018 में पिछला चुनाव हुआ था. चुनाव के कुछ ही महीने बाद यूनियन की गुटबाजी तेज हो गई. अभी यूनियन ने काम करना शुरू ही किया था कि आपसी विवाद के चलते तत्कालीन अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने 2019 में यूनियन के सारे पदाधिकारियों को पद से हटाकर स्टीयरिंग कमेटी बना दी थी. स्टीयरिंग कमेटी बनने के बाद समस्याएं तो खत्म नहीं हुईं, यूनियन का पावर कम होता गया. दो साल तक स्टीयरिंग कमेटी के भरोसे चलने वाली यूनियन कर्मचारियों का भला नहीं करा सकी. 2021 में जब यूनियन के तीन साल का कार्यकाल खत्म हुआ तो बर्खास्त अरूण सिंह मामले को लेकर प्रबंधन और राजेन्द्र प्रसाद सिंह के विधायक बेटे अनूप सिंह के बीच की कड़वाहट बढ़ती गई. यह कड़वाहट इतनी ज्यादा बढ़ गई कि राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख का लाभ उठाकर प्रबंधन के आला अधिकारियों पर केस तक किया गया. इसके चलते प्रबंधन और अनूप सिंह के बीच की दूरी और बढ गई. इस साल के शुरू में जब यूनियन ने चुनाव प्रक्रिया शुरू की तो कोरोना का हवाला देकर चुनाव को रोक दिया गया.
अभी क्या है स्थिति
अनूप सिंह द्वारा जिला प्रशासन को की गई शिकायत के बाद श्रम विभाग ने जनवरी की चुनाव प्रक्रिया को रद्द करते हुए चुनाव नियमावली के तहत नये सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया है. लेकिन पत्र के आने के बाद चुनाव कमेटी आगे नहीं बढ़ रही है.

Sanjeevani

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MDLM

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