
Jamshedpur : साकची स्थित टैगोर एकेडमी में मधुमक्खी के हमले से घायल क्लास दो की छात्रा हर्षिता का करीब बीस दिनों तक इलाज चला. फिर भी वह पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो पाई है. उसे अब सर्जरी की आवश्यकता है. इस मामले में स्कूल प्रंबधन की लापरवाही के साथ पीड़ित छात्रा की किसी तरह की सहायता और संवेदना नहीं देने से मामला और तूल पकड़ लिया. भाजपा नेता विकास सिंह की अगुआयी में छात्रा के पिता दीपक चंद्रा समेत अन्य लोगों ने आंदोलन का आह्वान कर दिया. साथ ही साकची थाना पहुंचकर स्कूल के प्रबंधक, प्रधानाध्यापिका एवं क्लास टीचर के खिलाफ शिकायत की गई. उसके बाद भी न्यायसंगत कार्रवाई नहीं होने पर स्कूल के समक्ष आमरण अनशन पर बैठने की चेतावनी दी गई. उसके बाद आखिरकार स्कूल प्रबंधन इस पूरे मामले में बैकफुट पर आ गया.
इसकी शुरुआत तब हुई जब स्कूल का एक प्रतिनिधिमंडल मानगो के सुभाष कॉलोनी स्थित हर्षिता के घर पहुंचा. मौके पर भाजपा नेता विकास सिंह भी उपस्थित थे. इस दौरान स्कूल प्रबंधन ने मामले में अपनी गलती मानते हुये हर्षिता के परिजनों की चार महत्वपूर्ण मांगे मान ली. इसके तहत जब तक हर्षिता स्वस्थ ना हो जाए तब तक स्कूल प्रबंधन उसकी ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था करेगा. ताकि हर्षिता की पढ़ाई इतने दिनों तक बाधित न हो. इसके अलावा स्कूल प्रबंधन के प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि हर्षिता के पिता की माली हालत ठीक नहीं है. ऐसे में हर्षिता के इलाज में अब तक लगने वाले खर्चे के वहन साथ उसका किसी बड़े अस्पताल में इलाज भी विद्यालय की ओर से ही करवाया जाय.
हर्षिता के परिजनों के साथ विकास सिंह ने हर्षिता के क्लास टीचर को भी सस्पेंड करने की मांग की. ताकि स्कूल के अन्य शिक्षकों में भी बच्चों के प्रति सहानुभूति और जग सके. इसके साथ ही स्कूल परिसर से मधुमक्खी के छत्ते को पूरी तरह साफ कर उसे सैनिटाइज करने की भी मांग की गई, जिससे इस तरह की घटना किसी दूसरे बच्चे के साथ नहीं घटे. प्रतिनिधिमंडल में स्कूल की प्रिंसिपल मधुछंदा, चेयरपर्सन अचिंतम दासगुप्ता एवं सचिव समानता कुमार शामिल थे. इससे पहले घर पहुंचते ही स्कूल की प्रिंसिपल ने हर्षिता को चॉकलेट, बिस्कुट और मिठाई देकर गोद में लेकर उसका हाल जाना और परिजनों की मांगो को पूरा करने का आश्वासन दिया.
यह है मामला
बीते 31 मार्च को हर्षिता अपने स्कूल टैगोर एकेडमी गई हुई थी. उसी दौरान स्कूल परिसर में भरे हुए मधुमक्खी के छत्ते से निकलकर मधुमक्खियों का झुंड इसके कपड़े के अंदर चला गया. वह रोते बिलखते अपने क्लास टीचर के पास गई और कहा कि मैम मेरे कपड़े के अंदर कीड़ा घुस गया है, जो मुझे काट रहा है. इस पर क्लास टीचर ने उसे फटकार लगाते हुए भगा दिया. साथ ही कहा कि बदमाशी करोगी तो क्लास-टू से नाम काटकर केजी में नाम लिखवा दूंगी. टीचर के मुंह से क्लास से नाम काटने की बात सुनकर हर्षिता डर गई, इस बीच मधुमक्खियों ने हर्षिता के शरीर को काटकर छलनी कर दी. हालत यह हुयी कि स्कूल से घर पहुंचते ही वह मूर्छित होकर गिर पड़ी. उसकी मां ने जब उसका कपड़ा खोला तो उसकी हालत देखकर दंग रह गई. हर्षिता का पूरा शरीर मधुमक्खी के काटने से लाल हो गया था. उसकी मां ने घर में उसका प्राथमिक उपचार करते हुए पाउडर लगाया. तभी हर्षिता को काफी तेज बुखार हो गया. इससे घबराकर मेडिकल दुकान चला रहे हर्षिता के पिता के पास वह पहुंची.
उसके पिता दीपक चंद्रा हर्षिता को पहले डॉक्टर अग्रवाल फिर डॉक्टर लुकटुके एवं उसके बाद डॉक्टर अभिषेक के पास ले गये. फिर भी हर्षिता की हालत में सुधार नहीं हुआ. डॉक्टरों ने दीपक चंद्रा से कहा कि बच्ची खतरे में है, उसे तुरंत टीएमएच ले जायें. हर्षिता के माता पिता उसे तत्काल टीएमएच ले गये. वहां पांच दिन रहने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी तो दे दी गई, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि हर्षिता पूरी तरह ठीक नहीं हुई है उसे बड़े अस्पताल में ले जाने की जरुरत है. तब तक बच्ची ठीक भी नहीं हुई थी और अस्पताल का भारी-भरकम बिल बन चुका था. इसे लेकर बच्ची के परिजन चिंतित थे. हालांकि अब उसके उचित इलाज और आगे की पढ़ाई का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है.
इसे भी पढ़ें : कोरोना के बढ़ते मामलों ने फिर बढ़ाई चिंता: दिल्ली में लौटा पाबंदियों का दौर, मास्क न पहनने पर लगेगा 500 रुपए का जुर्माना




